अंबिकापुर।। खबरी गुल्लक।। 5 जनवरी 2026
जिला नोडल अधिकारी राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं जन स्वास्थ्य कार्यक्रम जिला सरगुजा डॉ शैलेन्द्र गुप्ता ने शीत लहर की वर्तमान स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि अम्बिकापुर एवं उत्तर छत्तीसगढ़ क्षेत्र में वर्तमान में मौसम की स्थिति सामान्य से भिन्न बनी हुई है। रात्रि एवं प्रातःकालीन न्यूनतम तापमान सामान्य औसत से लगभग 4 से 6 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया जा रहा है तथा कई क्षेत्रों में तापमान 4 से 7 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुँच गया है। यह स्थिति शीत लहर जैसी परिस्थितियों को दर्शाती है, जिससे मानव शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। अत्यधिक ठंड के कारण शरीर में थमरिगुलेटरी असंतुलन उत्पन्न होता है, जो विशेष रूप से संवेदनशील वर्गों के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है। इस प्रकार की ठंड में रक्त वाहिकाओं का संकुचन होता है, जिससे रक्तचाप में वृद्धि देखी जा सकती है। हृदय रोगियों में कोरोनरी वेसोस्पाज़्म की संभावना बढ़ जाती है, जिसके परिणामस्वरूप तीव्र हृदयाघात जैसे गंभीर जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं। श्वसन तंत्र पर ठंड का सीधा प्रभाव पड़ता है, जिससे दमा एवं सीओपीडी जैसे रोगों के लक्षणों में तीव्रता आ सकती है। अत्यधिक ठंड के संपर्क में आने से बुजुर्गों, नवजात शिशुओं एवं निराश्रित व्यक्तियों में हाइपोथर्मिया की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। इसके अतिरिक्त, ऊपरी एवं निचले श्वसन पथ के संक्रमण तथा निमोनिया के मामलों में वृद्धि की संभावना बनी रहती है।
इन परिस्थितियों में कुछ जनसमूह विशेष रूप से उच्च जोखिम में रहते हैं, जिनमें 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग, नवजात एवं पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चे, गर्भवती महिलाएँ, हृदय, फेफड़े, मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप से ग्रस्त रोगी, साथ ही खुले में कार्य करने वाले श्रमिक एवं निराश्रित व्यक्ति शामिल हैं। इन वर्गों को ठंड से बचाव के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। ठंड से होने वाले दुष्प्रभावों से बचाव हेतु नागरिकों को बहु-परत ऊनी अथवा थर्मल वस्त्र पहनने, सिर, कान, हाथ एवं पैरों को पूर्ण रूप से ढककर रखने, प्रातःकालीन एवं रात्रिकालीन अत्यधिक ठंड में अनावश्यक बाहर निकलने से बचने तथा पर्याप्त कैलोरी युक्त आहार एवं गरम तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी जाती है। ठंड से बचाव के लिए शराब सेवन को लेकर फैली भ्रांति से बचना आवश्यक है, क्योंकि शराब शरीर की ऊष्मा को बनाए रखने के बजाय उसे और कम कर देती है, अतः इसका सेवन पूर्णतः वर्जित है।
स्वास्थ्य तंत्र की दृष्टि से सभी स्वास्थ्य संस्थानों को शीत लहर की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। श्वसन एवं हृदय रोगों से संबंधित आवश्यक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। ऑक्सीजन, नेबुलाइज़र तथा आपातकालीन बेड की व्यवस्था को सुदृढ़ रखने पर विशेष बल दिया गया है। ठंड से संबंधित बीमारियों की शीघ्र पहचान एवं प्राथमिक प्रबंधन हेतु संबंधित प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है। आशा एवं एएनएम कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्रों में बुजुर्गों, दीर्घकालिक रोगियों एवं अन्य संवेदनशील व्यक्तियों की सक्रिय निगरानी करें तथा आवश्यकता पड़ने पर शीघ्र स्वास्थ्य संस्थानों से संपर्क स्थापित करें।
जिला स्वास्थ्य प्रशासन आम नागरिकों से अपील करता है कि वे मौसम की वर्तमान परिस्थितियों को गंभीरता से लें, आवश्यक सावधानियाँ अपनाएँ तथा किसी भी प्रकार के लक्षण जैसे अत्यधिक ठंड लगना, सांस फूलना, सीने में दर्द या अत्यधिक कमजोरी महसूस होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। शीत-जनित रोगों से बचाव संभव है, बशर्ते समय रहते सावधानी एवं उपचार सुनिश्चित किया जाए।

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