अंबिकापुर/ रायपुर।। में साइबर ठगों ने एक आरटीओ एजेंट को मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादियों को सहायता देने के नाम पर धमकी देते हुए परिवार समेत तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 17.15 लाख रुपये ट्रांसफर कराए जाने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। फर्जीवाड़ा का खुलासा होने के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक 15 फरवरी 2026 को सुबह शरद कुमार तिवारी 55 वर्ष रायपुर के एक आरटीओ एजेंट हैं,उनके पास फोन आया। ठगों ने खुद को दिल्ली एटीएस और सीबीआई के डीसीपी राजवीर सिंह शेखावत बताया, आधार कार्ड सही बताकर भरोसा जीता। उन्होंने उनके नाम से लिंक मोबाइल नंबर और बैंक खाते का हवाला देकर मनी लॉन्ड्रिंग व आतंकियों को गोपनीय जानकारी लीक करने का आरोप लगाया, गिरफ्तारी वारंट जारी होने की धमकी दी। परिवार के अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार बताकर किसी से बात करने पर रोक लगाई। 16 फरवरी को पूछताछ चली, 17 फरवरी को अकाउंट के 98 प्रतिशत फंड की जांच के नाम पर पेंशनबाड़ा बैंक से 17.15 लाख रुपये आरटीजीएस से महाराष्ट्र के खाते में ट्रांसफर कराए। एफडी वेरिफिकेशन की मांग पर संदेह हुआ, फिर पुलिस को सूचना दी गई। सायबर ठगों ने व्हाट्सएप पर नकली गिरफ्तारी वारंट भेजे और वीडियो कॉल पर पुलिस वर्दी पहनकर निगरानी रखी।परिवार को अलग-थलग कर मानसिक दबाव बनाया।
एसीपी राजेन्द्रनगर नवनीत पाटिल के अनुसार महाराष्ट्र के खाते मोबाइल नंबर व अकाउंट ट्रेसिंग से जांच शुरू कर दी गई है। डीसीपी वेस्ट संदीप पटेल ने स्पष्ट किया कि पुलिस या एजेंसियां व्हाट्सएप से वारंट नहीं भेजतीं, न डिजिटल अरेस्ट करती हैं। ऐसे मामले आने पर सतर्क रहते हुए स्थानीय थाने से संपर्क करना चाहिए।
कानूनी विशेषज्ञ दुग्गल ने कहा जागरूक रहें
सुप्रीम कोर्ट के साइबर लॉ एक्सपर्ट पवन दुग्गल ने कहा कि जागरूकता ही बचाव है। एटीएस, सीबीआई या कस्टम कभी मोबाइल कॉल या वारंट नहीं भेजते। कूरियर, मनी लॉन्ड्रिंग या आतंकी केस के नाम पर डराएं तो नजरअंदाज करें। शिकायत के लिए 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें, जल्दी रिपोर्टिंग से पैसे वापसी संभव है।

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