ADD

ज्योति मिशन स्कूल के हॉस्टल में छात्रा से रेप.. दोषी फादर प्रिंसिपल को उम्रकैद, शिकायत पर पीड़िता की ही पिटाई करने के दोषी दो अध्यापिकाओं को 7-7 वर्ष कैद

0

 

बिलासपुर।। खबरी गुल्लक।।

छत्तीसगढ़ के चिरमिरी के  ज्योति मिशन स्कूल में हॉस्टल में रह कर चौथी कक्षा में पढ़ रही 9 वीं की छात्रा से रेप और शिकायत पर शिक्षिकाओं द्वारा fir दर्ज कराने के बजाए मारपीट किए के मामले में उच्च न्यायालय ने निचले अदालत के दोषमुक्त आदेश को खारिज करते हुए न सिर्फ कड़ी टिप्पणी की बल्कि इसके साथ कोर्ट ने कोरिया जिला के ज्योति मिशन स्कूल के फादर प्रिंसिपल को उम्रकैद, 10 हजार रुपए अर्थदंड तथा अपराध होने से रोकने का प्रयास नहीं कर उल्टे पीड़िता की ही पिटाई करने के आरोपी दो अध्यापिकाओं को 7-7 वर्ष कैद व 5-5 हजार रुपए अर्थदंड की सजा से दंडित किया है। पीड़िता को 10 वर्ष बाद हाईकोर्ट से इंसाफ मिला है। 

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल के डबल बेंच ने चौथी कक्षा की 9 वर्षीय छात्रा के साथ दरिंदगी करने के आरोपियों को दोषमुक्ति किए जाने के निर्णय को निरस्त करते हुए कहा रेप या सेक्शुअल असॉल्ट की विक्टिम साथी नहीं होती, और उसके सबूतों को कानून के हिसाब से कन्फर्म करने की जरूरत नहीं होती। कन्फर्म करना सिर्फ समझदारी की बात है, सजा के लिए कोई शर्त नहीं है। कोर्ट ने कहा कि, अगर विक्टिम की गवाही भरोसेमंद, नैचुरल, एक जैसी और भरोसेमंद है, और उसमें कोई बड़ी कमी नहीं है, तो कोर्ट बिना किसी इंडिपेंडेंट कन्फर्मेशन के भी उस पर कार्रवाई कर सकता है। पीड़िता की गवाही प्रारंभ से भरोसेमंद रही है। 

न्यायालयीन सूत्रों के मुताबिक चिरमिरी क्षेत्र की महिला ने 9 सितंबर 2015 को पुलिस में लिखित शिकायत की थी। शिकायत में कहा गया कि, उसकी 9 वर्ष की बेटी ज्योति मिशन स्कूल में हॉस्टल में रह कर चौथी कक्षा में पढ़ रही है। उसने स्कूल के गार्ड के माध्यम से सूचना दी कि, वह बीमार है, इस पर वह बेटी से मिलने गई। बेटी ने मां को यूरिनल से ब्लड आने, पेट दर्द होने की बात कही, बताया कि, रात में वह बाथरूम गई थी। गर्ल्स बाथरूम बंद होने पर वह लड़कों के बाथरूम में गई थी, वहां कोई पाउडर डला था, पानी डालने के बाद उसे चक्कर आने लगा वह कमरे में आकर सो गई। रात में वह सोई थी उसी समय एक व्यक्ति आकर उसके साथ कुछ करने लगा जब वह चिल्लाई तो वह भाग गया उसकी चप्पल की आवाज आई, इसके बाद उसे तकलीफ होने लगी, उसने इस बात की जानकारी शिक्षिका किस्मारिया को दी तो उसने डांटकर पीटा और किसी से नहीं बताने के लिए कहा। फिलोमीना केरकेट्टा को भी घटना की जानकारी दी, उसने भी मना किया और चोट में सरसों तेल लगाने की सलाह दी थी। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल के डबल बेंच अदालत ने यह फैसला दिया। 

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें (0)