अंबिकापुर।।खबरी गुल्लक।। छत्तीसगढ़ के शिमला के नाम से मशहूर सरगुजा जिले के प्रमुख पर्यटन केंद्र में तीन दिवसीय मैनपाट महोत्सव के नाम पर पानी की तरह पैसा बहाया गया मगर सैलानियों को आकर्षित नहीं कर पाए। स्थानीय कलाकारों को उपेक्षित करने के आरोपों के बीच पहले दिन कुर्सियां दर्शकों के लिए तरसती रही। मैनपाट के स्थानीय भाजपा नेताओं के साथ ही प्रबुद्धजनों ने भी उपेक्षा का आरोप लगाया है। शुक्रवार को एक तरफ मुख्यमंत्री उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे तो वहीं दूसरी तरफ कुर्सियां खाली थीं। दर्शक के रूप में केवल अधिकारी और उनके परिवार के सदस्य नजर आ रहे थे।
छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय गायक संजय सुरीला ने भी सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड कर प्रशासन पर स्थानीय कलाकारों को उपेक्षित करने का आरोप लगाया था। हाय रे सरगुजा नाचे जैसे गीत से न सिर्फ सरगुजा बल्कि समूचे छत्तीसगढ़ को झूमने के लिए मजबूर कर देने वाले इस गायक ने जब सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड किया तो कमेंट बॉक्स में बड़ी संख्या में लोगों ने उनका साथ देते हुए, मैनपाट महोत्सव में आमंत्रित नहीं किये जाने पर रोष व्यक्त किया। मैनपाट के एक बड़े वर्ग का कहना है कि मैनपाट महोत्सव अधिकारी कर्मचारियों के लिए शासकीय खर्चे पर पिकनिक का साधन बन कर रह गया है। टेंट, पंडाल सहित अन्य व्यवस्थाओं के नाम पर कमीशनखोरी की जा रही है। दर्शकों की जगह केवल अधिकारी, उनके परिजन और चंद सुरक्षाकर्मी नजर आते हैं ।स्थानीय भाजपा नेताओं से लेकर प्रबुद्धजनों तक ने कलाकारों की उपेक्षा और कमीशनखोरी के आरोप लगाए हैं। महोत्सव अब अधिकारियों के लिए सरकारी खर्चे पर पिकनिक बनकर रह गया है।
और वायरल हो गई बदहाली
मैनपाट, जो अपनी ठंडी वादियों, घने जंगलों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है, पर्यटन को बढ़ावा देने का सुनहरा मौका था। शासन ने लाखों रुपये का बजट आवंटित किया। टेंट सिटी, पंडाल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और खान-पान की भव्य व्यवस्थाएं। लेकिन हकीकत कुछ और थी। पहले दिन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें खाली कुर्सियां और उदास माहौल साफ दिख रहा है। स्थानीय भाजपा नेताओं ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि यह महोत्सव पर्यटन नहीं, बल्कि अफसरों का जश्न था। स्थानीय कलाकारों को नजरअंदाज कर बाहरी कलाकारों को बुलाया गया। हमने मुख्यमंत्री को भी अवगत कराया है।
संजय सुरीला ने धो डाला
सबसे तीखा प्रहार लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी गायक संजय सुरीला ने किया। उनके गीत हाय रे सरगुजा नाचे ने न सिर्फ सरगुजा बल्कि पूरे राज्य को झुमाया है। सुरीला ने सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर प्रशासन पर स्थानीय कलाकारों की उपेक्षा का आरोप लगाया। वीडियो में उन्होंने कहा कि मैनपाट महोत्सव में स्थानीय प्रतिभाओं को क्यों भुला दिया? हम सरगुजा की मिट्टी के कलाकार हैं, फिर भी आमंत्रित नहीं। यह सांस्कृतिक अपमान है। वीडियो पर हजारों लाइक्स और कमेंट्स आए, जहां लोगों ने रोष जताया। एक यूजर ने लिखा कि सरगुजा के कलाकारों को आगे लाओ, बाहरी कलाकार क्या मैनपाट को जानते हैं?
उठ रहा यह सवाल
यह महोत्सव सरगुजा के पर्यटन को झटका है। सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत विपरीत। अब सवाल उठ रहा कि क्या मैनपाट महोत्सव सालाना पिकनिक बनेगा या सच्चा पर्यटन उत्सव? स्थानीय कलाकारों और निवासियों की आवाज अनसुनी रहेगी तो भविष्य अंधकारमय।

.jpg)






















