रायपुर।।खबरी गुल्लक।।
आखिरकार लंबे इंतजार के बाद छत्तीसगढ़ प्रदेश में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 पारित हुआ। इस विधेयक में जबरदस्ती, प्रलोभन, धोखाधड़ी या गलत जानकारी देकर धर्म परिवर्तन कराने, सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है, जबकि नाबालिगों, महिलाओं, मानसिक रूप से कमजोर लोगों और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़े मामलों में 20 साल तक की सजा और लाखों में अर्थदंड का प्रावधान है। छत्तीसगढ़ विधानसभा में उपमुख्यमंत्री व गृहमंत्री विजय शर्मा ने गुरुवार 19 मार्च 2026 को सदन में विधेयक पेश किया।
धर्म स्वातंत्र्य विधेयक में छल बल, लालच या डिजिटल माध्यम से धर्म परिवर्तन कराना हैं संज्ञेय और गैर जमानती अपराध। 7 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा, 5 लाख तक जुर्माना। महिला/ नाबालिग / एससी-एसटी / दिव्यांग / विकृत चित के धर्मांतरण पर 10 से 20 वर्ष तक कारावास। न्यूनतम 10 लाख जुर्माना। सामूहिक धर्मांतरण कराने पर 10 वर्ष से आजीवन कठोर कारावास, न्यूनतम 25-30 लाख का जुर्माना। विदेशी फंडिंग (धर्मांतरण के लिए विदेशी आर्थिक लाभ), 10 से 20 वर्ष की कारावास, न्यूनतम 20 लाख जुर्माना। विवाह से पहले या बाद में किया गया धर्मांतरण अवैध माना जाएगा। विवाह की तिथि से 60 दिवस पूर्व सक्षम प्राधिकारी को देना होगा घोषणा पत्र। सक्षम प्राधिकारी द्वारा की जाएगी मामले की जांच। 6 माह से 3 वर्ष तक का कारावास, 2 लाख तक का अर्थदंड। अपने मूल/पैतृक धर्म में पुनः वापसी को नहीं माना जाएगा धर्मांतरण। दोषी को पीड़ित व्यक्ति को देना होगा आर्थिक मुआवजा (प्रतिकर), पीड़ितों के लिए विशेष लोक अभियोजक की होगी नियुक्ति। 6 माह के भीतर प्रकरण का निपटारा होगा। विधेयक में अवैध धर्मांतरण कराने वालों के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। इस विधेयक के तहत सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित कानून मौजूदा छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 1968 का स्थान लेगा, जिसे राज्य गठन के समय मध्यप्रदेश से अपनाया गया था। सरकार का दावा है कि इस विधेयक से अवैध धर्मांतरण पर लगाम लगेगी।
मौजूदा कानून से काफी सख्त होगा नया कानून
सरकार का कहना है कि वर्तमान अधिनियम में केवल धर्मांतरण के बाद जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देने का प्रावधान है और जबरन धर्मांतरण को संज्ञेय एवं जमानती अपराध माना गया है, जिसमें अपेक्षाकृत हल्का दंड निर्धारित है। विधेयक के उद्देश्य और कारणों के बारे में बताया गया कि राज्य की भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक परिस्थितियों व प्रौद्योगिकी एवं संचार के साधनों के विस्तार के चलते बल, प्रलोभन और कपटपूर्ण तरीकों से धर्मांतरण को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए मौजूदा कानून अपर्याप्त हो गया है इसलिए एक व्यापक और कठोर कानून आवश्यक है।
सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती
नए विधेयक में बल, जबरदस्ती, अनुचित प्रभाव, प्रलोभन, गलत बयानी, कपटपूर्ण साधनों या विवाह के माध्यम से किए गए अवैध धर्मांतरण को प्रतिबंधित किया गया है। विधेयक में सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से किए गए धर्मांतरण भी शामिल हैं। प्रस्तावित कानून के तहत सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे। विधेयक के अनुसार, अपने धर्म में वापस लौटना धर्मांतरण नहीं माना जाएगा। पारित किये गये विधेयक के तहत, प्रलोभन में धन, उपहार, रोजगार, मुफ्त शिक्षा या चिकित्सा सुविधा, बेहतर जीवनशैली का वादा या विवाह शामिल हैं जबकि प्रताड़ना में मानसिक दबाव, शारीरिक बल या धमकी को शामिल किया गया है।
व्यक्ति को देनी होगी सूचना
सामूहिक धर्मांतरण को दो या उससे अधिक व्यक्तियों के एक ही आयोजन में धर्म परिवर्तन के रूप में परिभाषित किया गया है। प्रस्तावित कानून के तहत धर्मांतरण की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को सक्षम प्राधिकारी, अर्थात जिला मजिस्ट्रेट या उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी को पूर्व सूचना देनी होगी। संबंधित धार्मिक पदाधिकारी को भी अग्रिम सूचना देना अनिवार्य होगा। प्रस्तावित धर्मांतरण का विवरण सात दिनों के भीतर सार्वजनिक किया जाएगा और 30 दिनों के भीतर आपत्तियां दर्ज की जा सकेंगी, जिनकी जांच के बाद आदेश पारित किया जाएगा।
न्यूनतम सात वर्ष की सजा का प्रावधान
विधेयक में उल्लंघन के लिए न्यूनतम सात वर्ष की सजा, जिसे 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और कम से कम पांच लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है। गंभीर मामलों में 10 से 20 वर्ष की कैद और 10 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और 25 लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है। विधेयक में पीड़ितों को 10 लाख रुपए तक मुआवजा देने और मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित करने का प्रावधान भी किया गया है। सरकार ने कहा कि ऐसे मामलों का निपटारा यथासंभव छह माह के भीतर किया जाएगा।
भय, लोभ, अज्ञानता से अब धर्मांतरण संभव नहीं : मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज का दिन ऐतहासिक है, छत्तीसगढ़ विधानसभा में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र् विधेयक 2026 पारित होने के बाद उन लोगों पर रोक लगेगी, किसी की अशिक्षा, गरीबी और अज्ञानता का लाभ और लोभ-प्रलोभ देकर धर्मांतरण कराते थे। इस विधेयक के तहत धर्मांतरण कराने वाले तथा धर्मांतरित अधिकारी के समक्ष पूर्व सूचना देना अनिवार्य होगा। सूचना प्राप्त होने के एक सप्ताह के भीतर नोटिस जारी किया जाएगा और इसकी जानकारी जिला की वेबसाइट पर भी सार्वजनिक की जाएगी। प्राधिकृत अधिकारी एक माह के भीतर पूरे मामले की जांच कर यह सुनिश्चित करेंगे कि कहीं इसमें लोभ, प्रलोभन, भय या किसी प्रकार का दबाव तो शामिल नहीं है। जांच पूर्ण होने के बाद ही, यदि सब कुछ नियमानुसार पाया जाता है, तो अनुमति प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा, बिना अनुमति या किसी भी प्रकार के लोभ, प्रलोभन, भय, अशिक्षा या अज्ञानता के आधार पर धर्मांतरण करना अब संभव नहीं होगा।



