अंबिकापुर।। खबरी गुल्लक ।। 9 मार्च 2026।।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अंबिकापुर में एक अनोखी पहल ने सभी का दिल जीत लिया। मातृशक्ति गौ सेवा जनकल्याण सेवार्थ संगठन की महिलाओं ने सरगुजा जिले के प्रसिद्ध कैलाश गुफा में 300 से अधिक वानरों को अपने हाथों से भोजन कराया। इसी क्रम में शहर के पोस्ट ऑफिस के निकट डॉग शेल्टर में 150 से ज्यादा कुत्तों को दही-भात परोसा गया। वहीं, अंबिकापुर जिला पशु चिकित्सालय में प्रतिदिन शाम को पीड़ित और बीमार गौमाताओं की सेवा जारी है। यह पहल न केवल महिलाओं की संवेदनशीलता को दर्शाती है, बल्कि जीव-जंतुओं के प्रति उनकी समर्पित सेवा को भी रेखांकित करती है।
श्रीमती ममता अग्रवाल के नेतृत्व में मातृशक्ति गौ सेवा जनकल्याण सेवार्थ की गो-सेविकाओं ने इस विशेष दिन को यादगार बनाने के लिए कमर कस ली। एक बड़ा दल सरगुजा के कैलाश गुफा की ओर रवाना हुआ। यहां जंगल के बीच स्थित इस पवित्र गुफा में सैकड़ों वानर विचरण करते हैं। सेविकाओं ने केला, चना, गाजर, खीरा, पाव और रोटी जैसे पौष्टिक भोजन लेकर पहुंचीं। अपने हाथों से वानरों को खिलाते हुए उन्होंने कहा कि ये वानर भी तो भगवान के अंश हैं। उनकी सेवा करना हमारा पुण्य कार्य है। गुफा क्षेत्र में मौजूद ग्रामीणों ने भी इस दृश्य को देखकर वाह-वाह की। लगभग चार घंटे तक चली इस सेवा में 300 से अधिक वानरों ने भरपूर भोजन ग्रहण किया।
दोपहर होते ही टीम अंबिकापुर वापस लौटी और सीधे पोस्ट ऑफिस के बगल स्थित डॉग शेल्टर पहुंची। यहां सड़क हादसों और परित्याग के शिकार 150 से अधिक कुत्तो की देखभाल होती है । सेविकाओं ने ताजा दही- भात तैयार कराया और हर कुत्ते को प्यार से खिलाया। शेल्टर के संचालक ने बताया कि ये बहनें नियमित रूप से आती हैं। आज का यह भोजन कुत्तों के लिए अमृत समान है। कुत्तों की पूंछें लहराने लगीं और वे सेवा भाव से अभिभूत नजर आए। इस दौरान सेविकाओं ने शेल्टर की सफाई भी की और घायल कुत्तों के घावों पर मरहम लगाया।
संध्या होते ही जिला पशु चिकित्सालय में सेवा का दौर शुरू हो गया। यहां प्रतिदिन शाम को मातृशक्ति की बहनें पहुंचती हैं। बीमार और पीड़ित गौमाताओं को पशु आहार, हरा चारा, केला, गुड़, हरी सब्जियां और ताजी रोटियां खिलाई जाती हैं। साथ ही गोशाला की साफ-सफाई, दवा-चिकित्सा और अन्य कार्य किए जाते हैं। आज भी दर्जनों गौमाताओं ने भरपूर भोजन किया। ममता अग्रवाल ने खबरी गुल्लक को बताया कि यह सेवा जनसहयोग से चल रही है। महिला दिवस पर हमने इसे विस्तार दिया, लेकिन यह निरंतर जारी रहेगी। जीवों की सेवा ही सच्ची मातृशक्ति है। चिकित्सालय के डॉक्टरों ने भी इस पहल की सराहना की और कहा कि इससे पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर हो रहा है। यह पहल अंबिकापुर वासियों के लिए प्रेरणादायक है। संगठन की महिलाएं न केवल घर-परिवार संभालती हैं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों- जीव-जंतुओं की सेवा में भी अग्रणी हैं। स्थानीय लोगों ने सोशल मीडिया पर इनकी तस्वीरें शेयर कर सराहना की।





