अंबिकापुर।। खबरी गुल्लक ।।
सरगुजा जिले में भाषाई भेदभाव का शर्मनाक मामला सामने आया है। एक निजी प्ले स्कूल ने सरगुजिहा बोली में बात करने वाले मात्र 4 वर्षीय बच्चे को दाखिला देने से साफ इंकार कर दिया। स्कूल प्रबंधन का तर्क था कि यह सरगुजिहा बोलचाल अन्य बच्चों पर दुष्प्रभाव डालेगी। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के निर्देश पर NSUI सरगुजा ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर स्कूल की मान्यता रद्द करने और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उधर जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंहदेव की पहल पर बच्चे को बचपन प्ले स्कूल में निःशुल्क प्रवेश मिल गया।
6 दिनों के डेमो के बाद बोली बनी बाधा
अंबिकापुर शहर के एक प्रमुख प्ले स्कूल ने 4 वर्षीय बच्चे को 6 दिनों तक डेमो क्लास में बुलाया। बच्चा सरगुजा की आम बोलचाल की सरगुजिहा भाषा में बात करता है, जो क्षेत्र की लोकप्रिय स्थानीय बोली है। डेमो के बाद स्कूल प्रशासन ने साफ कह दिया कि child's भाषा अन्य बच्चों पर बुरा असर डालेगी, इसलिए दाखिला नहीं दिया जा सकता। यह घटना विभिन्न समाचार माध्यमों के जरिए पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव और कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक तक पहुंची।
टीएस सिंहदेव के निर्देश पर शुक्रवार को NSUI सरगुजा ने जिलाध्यक्ष आशीष जायसवाल के नेतृत्व में सरगुजा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि दोषी निजी स्कूल की मान्यता तत्काल समाप्त की जाए और शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के उल्लंघन के लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई हो। ज्ञापन सौंपने वालों में आकाश यादव, ऋषिकेश मिश्रा, अंकित जायसवाल, ऋसभ जायसवाल, प्रियांशु जायसवाल, अभिषेक सोनी, संजर नवाज, अतुल यादव एवं ऋसभ राय शामिल थे।
टीएस सिंहदेव का सख्त रुख, कहा अभिजात्य सोच
पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने इस घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा भाषा के आधार पर 4 वर्ष के मासूम बच्चे को दाखिला न देना शिक्षा के अधिकार अधिनियम- 2009 का खुला उल्लंघन है। बच्चे को स्कूल में भविष्य गढ़ने के लिए भेजा जाता है, लेकिन सरगुजा की अपनी भाषा में रचे- बसे बच्चे को सरगुजा का ही स्कूल ठुकरा रहा है। कमी बच्चे में नहीं, बल्कि स्कूल प्रबंधन की अभिजात्य वर्गीय सोच में है। सिंहदेव ने अधिकारियों से त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिया।आदित्येश्वर की पहल: बच्चे को मिला नया स्कूल
आदित्येश्वर शरण सिंहदेव की सक्रियता से बच्चे को तुरंत 'बचपन प्ले स्कूल' में प्रवेश दिला दिया गया। NSUI सरगुजा की टीम ने बच्चे और उसके अभिभावकों के साथ स्कूल पहुंचकर निःशुल्क एडमिशन कराया। स्कूल संचालक प्रतीक दीक्षित ने कहा, "शिक्षा सहित किसी भी सेवा में भाषाई भेदभाव स्वीकार्य नहीं। भाषा के आधार पर योग्यता का आकलन गलत है। हमारा स्कूल सभी बच्चों के लिए खुला है।



