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अंबिकापुर के कार्मेल स्कूल की मनमानी पर डीईओ का डंडा.. थमाया कड़ा नोटिस, छात्रों से वसूले शुल्क का 50 प्रतिशत जुर्माना का प्रस्ताव

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अंबिकापुर।। खबरी गुल्लक।। 

जिला शिक्षा अधिकारी सरगुजा दिनेश कुमार झा ने कार्मेल स्कूल अम्बिकापुर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसमें NCERT किताबें न चलाने, महंगी प्राइवेट किताबें थोपने और अन्य उल्लंघनों का आरोप लगाया गया है। नोटिस में कहा गया है कि यह कृत्य C.B.S.E. Affiliation Bye-Laws 2018 के क्लॉज 2.4.7 के साथ-साथ बैठकों व पत्रों में दिये गये निर्देशों का स्पष्ट व प्रमाणित उल्लंघन है। जिससे आपके विरूद्ध छात्र-छात्राओं से वसूल किये गये कुल फीस राशि समस्त मदों सहित का 50 प्रतिशत् जुर्माना लगाया जाना प्रस्तावित है। डीईओ ने 2 दिन के भीतर जवाब मांगा है।  विगत 3 वर्षों का फीस संरचना उपलब्ध कराने सहित अन्य निर्देश दिया है। डीईओ के नोटिस से स्कूल प्रबंधन में हड़कंप है। 

जारी नोटिस में उल्लेख किया गया है कि  11 अप्रैल 2026 को पालक- शिक्षक बैठक में डीईओ स्वयं तथा  रविशंकर तिवारी, सहायक संचालक, कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी अम्बिकापुर  संजीव कुमार सिंह प्राचार्य, शास उ०मा०वि०सरगंवा अम्बिकापुर,  नीरज शुक्ला प्राचार्य शास०उ०मा० वि० कतकालो अम्बिकापुर,  शिरीष नंदे प्राचार्य, हाई स्कूल अजिरमा अम्बिकापुर तथा  अखिलेश सोनी प्रभारी शिकायत शाखा कार्यालयीन के साथ उपस्थित रहा। पालकों एवं शिक्षकों से बातचीत में तथा लिये गये दस्तावजों से यह तथ्य प्रकाश में आया-

1. C.B.S.E. Affiliation Bye-Laws 2018 के क्लॉज 2.4.7 का उल्लंघन करते हुए कक्षा नर्सरी से 8 वीं तक N.C.E.R.T. की किताबें नही चलाया जा रहा है, केवल Private Publisher की महंगी महंगी किताबें पढ़ाया जाना प्रमाणित पाया गया।

2. कक्षा 8 वीं तक के ज्यादातर अभिभावकों द्वारा अवगत कराया गया कि किताब- कॉपिया किस दुकान से क्रय किया जाना है, यह स्कूल प्रबंधन द्वारा नही बताया गया है किन्तु अम्बिकापुर में केवल एम.पी. डिपार्टमेंटल स्टोर अम्बिकापुर में ही सेट्स के रूप में कक्षा 8 तक की निजी प्रकाशकों की मंहगी मंहगी किताब- कापियों मिल रही हैं। किसी अन्य दुकान में इनके द्वारा निर्धारित की गई प्रकाशकों की किताबें उपलब्ध नही है। श्रीमती निधि सिंह अभिभावक द्वारा जानकारी दी गई कि एम.पी. डिपार्टमेंटल स्टोर से बंडल युक्त किताब- कापियां दी गई। एक-दो किताबें मांगने पर नही दिया गया। मजबूरीवश सेट्स में किताब-कापियों लेना पड़ा।

3. पालकों द्वारा अवगत कराया गया कि बच्चों को गृह कार्य ज्यादा दिया जाता है। एक ही दिन में ज्यादा पाठ्यक्रय पढ़ाया जा रहा है। शिक्षक बच्चों पर मानसिक दबाव डाल रहे हैं। बच्चे रात 12.30 बजे तक गृह कार्य कर रहे हैं। जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकुल प्रभाव पड़ रहा है। यह नई शिक्षा नीति  2020 के प्रावधानों के विपरीत है।

4. अभिभावकों द्वारा अवगत कराया गया कि माह मार्च तथा माह जून में बच्चे बहुत कम दिवस विद्यालय जाते हैं किन्तु बस फीस पूरा लिया जाता है, जो उचित नही है।

5. कई अभिभावकों द्वारा अवगत कराया गया कि शिक्षको द्वारा पाठ्यक्रम पूरा करने के दबाव में जल्दी-जल्दी पढ़ाया जा रहा है, जिससे बच्चों का का concept clear नही हो रहा है।

6. एक अभिभावक द्वारा जानकारी दी गई कि ओसवाल प्रकाशन की किताबें बहुत सस्ती है तथा आसानी से सभी दुकानों पर उपलब्ध हो जाती है। इसलिए पूरक पुस्तकों के रूप में इन किताबों को चलाया जा सकता है।

7. एक अभिभावक द्वारा जानकारी दी गई कि परीक्षा परिणाम के दिन पुस्तकों की सूची उपलब्ध कराया गया, जिससे स्कूल प्रशासन, निजी प्रकाशक तथा पुस्तक दुकानों के बीच सांठगांव होना प्रतीत होता है। पुस्तकों की सूची हर वर्ष जनवरी में उपलब्ध हो जाना चाहिए, जिससे पालक अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी दुकान से किताबें खरीद सकें।

8. प्राचार्य द्वारा अवगत कराया गया कि अगले सत्र से कक्षा 1 ली से 12 वीं तक केवल एन.सी.ई.आर.टी. की किताबें ही चलाया जायेगा। जिस पर निर्देशित किया गया कि अगले शिक्षा सत्र से क्यों? आज से क्यों नही ? आप सभी बच्चों को एनसीईआरटी किताबों का पी.डी.एफ. उपलब्ध करावें एवं जो अभिभावक किताबें वापस करना चाहते हैं उन्हे सहायता प्रदान करें।

9. एक अभिभावक द्वारा जानकारी दी गई कि एनसीईआरटी के अतिरिक्त पुरक पुस्तकें भी जरूरी हैं।

10. एक अभिभावक द्वारा जानकारी दी गई कि प्रत्येक वर्ष निजी प्रकाशकों की किताबें बदल दी जाती है अथवा अंदर कुछ चैप्टर बदल दिया जाता है. जिससे पुरानी किताबें बेकार हो जाती है। 





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