ईद-ए-मिलादुन्नबी आयोजन बना स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल: परवेज आलम गांधी

ईद-ए-मिलादुन्नबी आयोजन बना स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल: परवेज आलम गांधी

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अंबिकापुर। खबरी गुल्लक ।

ईद-ए-मिलादुन्नबी का आयोजन इस वर्ष भी अंबिकापुर में भव्यता के साथ संपन्न हुआ। मुस्लिम समाज द्वारा निकाले गए जुलूस के बाद कला केंद्र मैदान में आयोजित कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों का सम्मान भी किया गया। लेकिन इस आयोजन की सबसे प्रेरणादायक बात कार्यक्रम की समाप्ति के बाद देखने को मिली। कार्यक्रम खत्म होने के बाद मुस्लिम समाज के लोगों ने पूरे कला केंद्र मैदान की स्वयं साफ-सफाई की। खाने-पीने में इस्तेमाल हुए डिस्पोजल सामान, प्लास्टिक की पन्नियां और चारों ओर बिखरे कचरे को एकत्र कर व्यवस्थित किया गया। इतना ही नहीं, जुलूस के प्रारंभ स्थल से लेकर उसके समापन स्थल तक सड़कों पर पड़े प्लास्टिक, डिस्पोजल और अन्य कचरे को भी समाज के लोगों ने मिलकर उठाया। आज जब किसी भी धर्म, समाज या संगठन के बड़े आयोजन और रैलियों के बाद सार्वजनिक स्थानों पर कचरा छोड़ दिए जाने की शिकायत आम हो गई है, ऐसे समय में अंबिकापुर के मुस्लिम समाज की यह पहल निश्चित रूप से एक नई सीख और सकारात्मक संदेश देती है। स्वागत-सत्कार के लिए इस्तेमाल होने वाली डिस्पोजल सामग्री अक्सर कार्यक्रम समाप्त होने के बाद सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर बिखरी दिखाई देती है, जिससे शहर की सुंदरता और स्वच्छता प्रभावित होती है।ईद-ए-मिलादुन्नबी के इस आयोजन के बाद मुस्लिम समाज ने यह संदेश दिया है कि धार्मिक आयोजन केवल अपनी आस्था और परंपरा तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज और शहर के प्रति जिम्मेदारी निभाने का भी माध्यम बन सकते हैं। अपने आयोजन के बाद स्वयं सफाई करना सामाजिक जिम्मेदारी, अनुशासन और अंबिकापुर के प्रति प्रेम का सुंदर उदाहरण है।इस पहल से निश्चित रूप से अन्य सामाजिक और धार्मिक संगठनों को भी प्रेरणा मिलेगी कि किसी भी बड़े आयोजन के बाद उसकी जिम्मेदारी वहीं समाप्त नहीं होती, बल्कि आयोजन स्थल और आसपास की स्वच्छता बनाए रखना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

अंबिकापुर को स्वच्छ, सुंदर और सद्भावपूर्ण बनाने की दिशा में यह छोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण पहल है। ऐसी सकारात्मक सोच और अनुकरणीय पहल के लिए सीरत-उन-नबी कमेटी के सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों का दिल से आभार, जिन्होंने ईद-ए-मिलादुन्नबी के अवसर पर समाज के सामने एक सुंदर मिसाल पेश की। यही अंबिकापुर की गंगा-जमुनी तहज़ीब, सामाजिक एकता और जिम्मेदार नागरिकता की असली पहचान है।

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