अंबिकापुर।खबरी गुल्लक
बलरामपुर-रामानुजगंज के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव पर लगे करीब 4.51 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता और गबन के गंभीर आरोपों के बीच उन्होंने कलेक्टर को अपना विस्तृत स्पष्टीकरण पत्र सौंपा है। इस जवाब में यादव ने जांच रिपोर्ट में लगाए गए सभी आरोपों को निराधार और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए खारिज किया है। प्रशासनिक जांच टीम ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में मनीराम यादव पर विभिन्न मदों में कुल 4 करोड़ 51 लाख 66 हजार रुपये से अधिक की अनियमितता का आरोप लगाया था। इसके आधार पर कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने उन्हें नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। अपने करीब 20 पन्नों के जवाब में यादव ने हर एक बिंदु पर दस्तावेजी सबूतों और मजबूती के साथ अपना पक्ष रखा है।
प्रमुख आरोप और उनका खंडन
आरोप - फर्मों को भुगतान में अनियमितता, दूसरे के खाते में राशि भेजा गया
जवाब - फर्म मालिकों के लिखित आवेदन पर ही भुगतान हुआ, जिसमें किसी की आपत्ति नहीं। पूर्व अधिकारियों के कार्यकाल का 4.42 लाख रुपये का व्यय भी इसमें शामिल।
आरोप - लेखन साम राशि को विभाजित कर कोटेशन प्रक्रिया से बचना, स्टॉक पंजी नहीं रखा।
जवाब - सामग्री सीधे स्कूलों में पहुंची, इसलिए जिला कार्यालय के स्टॉक में दर्ज नहीं हुई। GeM पोर्टल से गुणवत्ता प्रमाण-पत्र प्राप्त है।
आरोप - न्यायालयीन प्रकरण व्यय में 5 लाख रुपये के आवंटन में गबन।
जवाब - उच्च न्यायालय में 30 लंबित मामलों की जवाबदेही और फोटोकॉपी के लिए राशि खर्च हुई, सभी देयक संलग्न।
आरोप - शासकीय वाहन के डीजल का दुरुपयोग।
जवाब - शासकीय वाहन जर्जर होने पर अपने निजी वाहन से अधिकारी के निर्देश पर मोटिवेशन कार्यक्रम में गए, केवल ईंधन व्यय 12,200 रुपये DMF मद से लिया।
आरोप - विज्ञान किट खरीद 43.28 लाख रुपये की खरीद में डिलीवरी चालान और स्टॉक एंट्री का अभाव।
जवाब - सामग्री जिला कार्यालय में नहीं, बल्कि सीधे 44 स्कूलों में पहुंची। जिला स्तरीय 6 समितियों ने भौतिक सत्यापन कर गुणवत्ता प्रमाण-पत्र दिया है।
आरोप - परीक्षा व्यय प्रश्न पत्र मुद्रण और अन्य परीक्षा कार्यों में 33.18 लाख रुपये की अनियमितता।
जवाब - पारदर्शी कोटेशन प्रक्रिया अपनाई गई। नेशनल प्रिंटर्स रांची को कम दर और गोपनीयता शर्त पर आदेशित किया गया। 25.90 लाख रुपये का भुगतान RTGS से हुआ।
जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल
मनीराम यादव ने अपने जवाब में केवल आरोपों का खंडन ही नहीं किया, बल्कि जांच प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बार-बार यह तर्क दिया है कि जांच दल ने दुर्भावनापूर्वक और काल्पनिक तथ्यो के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है। उनका कहना है कि यदि वास्तव में गबन का आरोप सत्य है, तो प्रकरण में जिला कोषालय अधिकारी की संदिग्ध भूमिका की भी जांच होनी चाहिए क्योंकि सभी भुगतान कोषालय की जांच के बाद ही हुए हैं। इसके अलावा उन्होंने कार्यालय के एक वरिष्ठ लिपिक पर फर्जी अंकसूची जारी करने में भूमिका का आरोप लगाया है, जिसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की नस्ती प्रचलन में है। यादव का दावा है कि जांच दल का उस लिपिक के प्रति लगाव जांच को प्रभावित कर रहा है।




