अंबिकापुर। खबरी गुल्लक
छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी, अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव परवेज आलम गांधी ने चीन के साथ भारत के संबंधों और संवेदनशील सीमाई क्षेत्रों को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल भाषणों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर किए गए दावों से सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि सीमा पर मजबूत रणनीति, स्पष्ट नीति और प्रभावी कार्रवाई से होती है।
उन्होंने कहा कि लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़े सवाल देश की सुरक्षा, क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से सीधे जुड़े हैं। भारतवासियों को गलवान घाटी की उस घटना को कभी नहीं भूलना चाहिए, जिसमें जून 2020 में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में भारत के 20 वीर जवान शहीद हुए थे। उन वीर जवानों का बलिदान देश हमेशा याद रखेगा। ऐसे गंभीर मुद्दों पर सरकार की ओर से स्पष्ट जानकारी और जवाबदेही जरूरी है। देश की जनता जानना चाहती है कि चीन के साथ सीमा पर वास्तविक स्थिति क्या है और भारत अपने रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए कौन-कौन से ठोस कदम उठा रहा है।
परवेज गांधी ने कहा कि सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा के सवालों को राजनीतिक प्रचार का विषय बनाने के बजाय संसद और देश की जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों को राष्ट्रविरोधी बताना लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के अनुरूप नहीं है। मजबूत लोकतंत्र में सरकार से सवाल होते हैं और सरकार को तथ्यों के साथ जवाब देना होता है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन वैश्विक मंचों पर भारत के प्रभाव का वास्तविक मूल्यांकन तभी होगा, जब देश की सीमाओं और राष्ट्रीय हितों की रक्षा भी उतनी ही मजबूती से सुनिश्चित हो। कूटनीतिक मंचों की उपलब्धियां अपनी जगह हैं, लेकिन देश की सुरक्षा और संप्रभुता सर्वोपरि है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि चीन के साथ संबंधों में भारत को न राष्ट्रीय हित से पीछे हटना चाहिए और न ही अपनी संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता के सवाल पर किसी प्रकार की अस्पष्टता स्वीकार करनी चाहिए। सरकार को देश को विश्वास में लेते हुए सीमा की स्थिति, सुरक्षा चुनौतियों और दीर्घकालीन रणनीति पर स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा किसी दल की संपत्ति नहीं है। चीन के सामने भारत की संप्रभुता, सीमाओं और राष्ट्रीय हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। भाजपा सरकार से जवाब मांगना राजनीति नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक जवाबदेही का सवाल है। परवेज आलम गांधी ने केंद्र सरकार से मांग की कि चीन से जुड़े सभी संवेदनशील सीमा मामलों पर पारदर्शिता बढ़ाई जाए, संसद को विश्वास में लिया जाए और भारत की क्षेत्रीय अखंडता एवं संप्रभुता की रक्षा के लिए ठोस तथा दीर्घकालीन रणनीति देश के सामने रखी जाए।




