अम्बिकापुर। खबरी गुल्लक। 21 सितंबर 2026।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी पर शासन के स्पष्ट आदेशों की अवहेलना करते हुए एक व्याख्याता को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजने के बजाय जिले के भीतर ही पदस्थ रखने का गंभीर आरोप लगा है। सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम गाँधी ने संयुक्त संचालक लोक शिक्षण शिक्षा सरगुजा संभाग अम्बिकापुर को एक लिखित शिकायत सौंपी है, जिसमें व्याख्याता गणित संतोष साहू की पदस्थापना में हुई कथित अनियमितताओं की जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है। लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ द्वारा 25 जून 2026 को जारी आदेश तथा स्कूल शिक्षा मंत्री द्वारा 23 जून 2026 की समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुसार, जिला एवं विकासखंड शिक्षा कार्यालयों में वर्षों से संलग्न शिक्षकों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर तत्काल भेजे जाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। इन आदेशों का उद्देश्य विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर करना और प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखना था। शिकायतकर्ता के परवेज आलम गांधी का आरोप है कि व्याख्याता गणित संतोष साहू जिनकी मूल पदस्थापना शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सोनगरा, जिला सूरजपुर में है, उन्हें उनके मूल विद्यालय में भेजने के बजाय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय सरगुजा से स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, केशवपुर में कार्यमुक्त कर दिया गया। यह कार्यवाही शासन की मंशा एवं आदेशों के विपरीत प्रतीत होती है। इतना ही नहीं, संतोष साहू के प्रतिनियुक्ति आदेश में भी मूल पदस्थापना का जिला सूरजपुर होने के स्थान पर सरगुजा अंकित किया गया, जो प्रथम दृष्ट्या गंभीर प्रशासनिक त्रुटि अथवा तथ्यात्मक विसंगति प्रतीत होती है। इस त्रुटि के आधार पर उन्हें मूल पदस्थापना स्थल भेजने के बजाय जिले में ही बनाए रखने का प्रयास किया गया है।
यह है आरोप - 1. संतोष साहू, व्याख्याता गणित को तत्काल प्रभाव से उनके मूल पदस्थापना शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सोनगरा जिला सूरजपुर में कार्यमुक्त किए जाने के निर्देश प्रदान किए जाएँ।
2. संतोष साहू के प्रतिनियुक्ति आदेश में जिला सूरजपुर के स्थान पर जिला सरगुजा अंकित किए जाने की गंभीर त्रुटि की जांच कर दोषी अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाए।
3. भविष्य में शासन के आदेशों के निष्पक्ष एवं समान रूप से पालन हेतु आवश्यक निर्देश जारी किए जाएँ, ताकि किसी भी कर्मचारी को प्रभाव अथवा मिलीभगत के आधार पर अनुचित लाभ न मिल सके।
छत्तीसगढ़ में हाल के महीनों में शिक्षकों के तबादले और पदस्थापना को लेकर कई आदेश जारी किए गए हैं। अगस्त 2026 में लगभग 700 शिक्षकों के स्थानांतरण आदेश जारी किए गए थे, जबकि 400 नामों को विभिन्न कारणों से अंतिम सूची से बाहर कर दिया गया था। विभाग ने स्पष्ट किया था कि तबादलों में स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था और विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी गई है।
हालांकि कुछ मामलों में शिक्षकों की पदस्थापना में अनियमितताओं के आरोप भी सामने आए हैं। सितंबर 2026 में बिलासपुर में एक जांच रिपोर्ट में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी और विधि प्रभारी पर गंभीर आरोप लगे थे, जिनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी।
सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम गाँधी ने अपनी शिकायत में कहा है कि इस पूरे घटनाक्रम से यह प्रतीत होता है कि जिले के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से एक गणित व्याख्याता को अपने मूल विद्यालय में जाने से बचाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि शासन का स्पष्ट उद्देश्य सभी संलग्न शिक्षकों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजना है। अब यह देखा जाना बाकी है कि संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण सरगुजा संभाग अम्बिकापुर इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करते हैं और क्या शासन के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कोई जांच आयोग गठित किया जाता है। इस संबंध में व्याख्याता संतोष साहू से संपर्क नहीं हो पाने के कारण उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।




