राजीव गांधी शिक्षा मिशन सरगुजा में हुए फर्नीचर घोटाले के विवेचना में एसीबी को लग गए 10 साल, दस आरोपियों के ख़िलाफ़ 20 हजार पन्नों का चालान पेश

राजीव गांधी शिक्षा मिशन सरगुजा में हुए फर्नीचर घोटाले के विवेचना में एसीबी को लग गए 10 साल, दस आरोपियों के ख़िलाफ़ 20 हजार पन्नों का चालान पेश

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अम्बिकापुर।खबरी गुल्लक 

राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तहत वर्ष 2010-11 में स्कूलों के लिए फर्नीचर खरीदी में कथित अनियमितता के मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं एंटी करप्शन ब्यूरो  ने 10 आरोपियों के खिलाफ करीब 20 हजार पन्नों का चालान विशेष न्यायालय, अम्बिकापुर में पेश किया है। जांच में शासन को ₹67,48,008.28 की आर्थिक क्षति होने का उल्लेख किया गया है। चालान अपराध क्रमांक 28/2017 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्रस्तुत किया गया। इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता और कांग्रेस नेता परवेज आलम गांधी के द्वारा भी शिकायत की गई थी।

जांच के अनुसार, वर्ष 2010-11 में अविभाजित सरगुजा जिले के मिडिल स्कूलों में फर्नीचर उपलब्ध कराने के लिए सर्व शिक्षा अभियान के तहत करीब 2.70 करोड़ का आवंटन मिला था। जिला कार्यालय, राजीव गांधी शिक्षा मिशन, अम्बिकापुर ने तत्कालीन कलेक्टर एवं जिला मिशन संचालक की मंजूरी से सीएसआईडीसी की दरों पर 10 फर्मों को क्रय आदेश जारी किए। इन आदेशों के एवज में कुल 2,68,18,838 के चेक 28 मार्च 2011 को जारी किए गए थे। आदेश में 20 दिन के भीतर फर्नीचर की आपूर्ति की शर्त रखी गई थी।

समाचार पत्रों में शिकायतें प्रकाशित होने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने 20 अप्रैल 2013 को जांच के निर्देश दिए। कलेक्टर सरगुजा की ओर से गठित तीन सदस्यीय समिति ने 3 से 12 जून 2013 तक जांच कर 19 जुलाई को प्रतिवेदन सौंपा। समिति के मुताबिक, कलेक्टर ने भौतिक सत्यापन के बाद ही चेक जारी करने का निर्देश दिया था, लेकिन तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक एस.पी. पाण्डेय ने लेखापाल से चेक लेकर आपूर्ति से पहले ही 6 से 9 अप्रैल 2011 के बीच वितरित कर दिए।

 सत्यापन से पहले भुगतान का आरोप

जांच में पाया गया कि फर्मों ने देयकों के साथ स्कूलवार आपूर्ति सूची और प्रधान पाठकों की हस्ताक्षरयुक्त पावतियां प्रस्तुत नहीं की थीं। भुगतान के बाद भी ये पावतियां उपलब्ध नहीं कराई गईं। आरोप है कि फर्नीचर की गुणवत्ता जांच, क्रय समिति से भौतिक सत्यापन और फर्मों के साथ अनुबंध की प्रक्रिया पूरी किए बिना भुगतान कर दिया गया। तीन प्रतिशत सुरक्षा निधि भी जमा नहीं कराई गई। जांच में इसे भंडार क्रय नियमों और वित्तीय निर्देशों की अनदेखी बताया गया है।

विवेचना में दर्शन फेब्रिकेटर, रायपुर के नाम जारी क्रय आदेश को लेकर भी गंभीर अनियमितता का आरोप है। आरोप के मुताबिक, आदेश फर्म के संचालक के बजाय आकृति प्रिंटिंग प्रेस, अम्बिकापुर के संचालक संजय पटेल को दिया गया और उन्हें दर्शन फेब्रिकेशन के नाम से बैंक खाता खुलवाने को कहा गया। इस खाते में ₹22,91,909 का चेक जमा हुआ और राशि निकाल ली गई। जांच में कहा गया है कि इस फर्म ने किसी स्कूल में फर्नीचर की आपूर्ति नहीं की। संजय पटेल ने पूछताछ में कथित तौर पर ₹7 लाख कमीशन के रूप में एस.पी. पाण्डेय को देने की बात कही। इसी तरह, महारानी स्टील एंड अप्लायंस, रायपुर को 11,44,349 का भुगतान हुआ, लेकिन जांच के अनुसार संबंधित फर्म ने भी किसी स्कूल में फर्नीचर नहीं पहुंचाया। उसके संचालक प्रेमचन्द जैन की 7 अगस्त 2025 को मृत्यु हो चुकी है। शेष आठ फर्मों पर आदेशित मात्रा से कम फर्नीचर देने का आरोप है।

 10 आरोपियों के नाम चालान में फर्मवार गणना में आपूर्ति नहीं किए गए फर्नीचर की राशि 56,84,848, वैट की राशि 9,47,938 और निरीक्षण शुल्क 1,15,222.28 बताई गई है। इनका कुल योग 67,48,008.28 है।

यह हैं आरोपी

चालान में तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक एवं सेवानिवृत्त अधिकारी सत्यप्रकाश पाण्डेय और दर्शन फेब्रिकेशन के संचालक संजय पटेल के अलावा अम्बिका अलमीरा एंड स्टील फेब्रिकेटर्स के अजय कुमार अग्रवाल, सेलेनो स्टील की ममता अग्रवाल, महामाया फेब्रिकेटर्स के बिधी सिंह कटलारिया, सूर्या स्टील एंड वुडन इंडस्ट्रीज के राजकुमार बंसल, श्री साई इंडस्ट्रीज के संदीप तिवारी, श्याम मेटल प्रोडक्ट्स के हितेश कुमार अग्रवाल, श्री श्याम इंडस्ट्रीज के रितेश कुमार अग्रवाल और पंकज फर्नीचर मार्ट के संजीव गुप्ता को आरोपी बनाया गया है।

जांच एजेंसी का आरोप है कि एस.पी. पाण्डेय ने संबंधित आपूर्तिकर्ताओं के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र और छल के जरिए सरकारी राशि का दुरुपयोग किया तथा आपूर्ति और सत्यापन से पहले भुगतान कराया। एजेंसी के अनुसार, पाण्डेय और संजय पटेल को अपना पक्ष रखने और बयान दर्ज कराने के लिए कई बार नोटिस दिए गए, लेकिन वे जांच में शामिल नहीं हुए। दोनों को 19 अगस्त 2026 को गिरफ्तार कर न्यायिक मजिस्ट्रेट, अम्बिकापुर के समक्ष पेश किया गया था। मामले में आरोप न्यायालय में विचाराधीन हैं,चालान पेश होना दोषसिद्धि नहीं है।

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