ब्रेकिंग : राहुल गांधी कोल परियोजना से हसदेव अरण्य जंगल को बचाने धरना दे रहे हरिहरपुर , घाटबर्रा के ग्रामीणों से करेंगे मुलाकात .... 13 फरवरी को पहुंचेगी भारत जोड़ों न्याय यात्रा.... जंगल बचाने अदानी के कोल परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों में जगी न्याय की उम्मीदें.....

ब्रेकिंग : राहुल गांधी कोल परियोजना से हसदेव अरण्य जंगल को बचाने धरना दे रहे हरिहरपुर , घाटबर्रा के ग्रामीणों से करेंगे मुलाकात .... 13 फरवरी को पहुंचेगी भारत जोड़ों न्याय यात्रा.... जंगल बचाने अदानी के कोल परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों में जगी न्याय की उम्मीदें.....

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 अम्बिकापुर।  हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खदान के लिए पेड़ों की कटाई व कथित तौर पर ग्रामीण आदिवासियों के साथ अत्याचार के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों से राहुल गांधी मुलाकात करेंगे। राहुल गांधी भारत जोड़ों न्याय यात्रा के दूसरे चरण के अभियान में 8 फरवरी को रायगढ़ होते छत्तीसगढ़ में प्रवेश करेंगे, और 13 फरवरी को उनकी यात्रा अंबिकापुर में पहुंचेगी। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरगुजा लोक सभा क्षेत्र में न्याय यात्रा के दौरान राहुल गांधी सहदेव अरण्य जंगल में लोक खदान के लिए पेड़ों की कटाई के विरोध और जल जंगल जमीन बचाने के लिए आंदोलन कर रहे ग्राम हरिहरपुर सहित अन्य गांव के लोगों से भी मुलाकात करेंगे। राहुल गांधी के न्याय यात्रा के हसदेव अरण्य क्षेत्र में पहुंचने की खबर पर ग्रामीणों में उत्साह देखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि फर्जी ग्राम सभा प्रस्ताव और फर्जी हस्ताक्षर के बलबूते बड़ी संख्या में सशस्त्र पुलिस फोर्स की घेराबंदी कर कोल परियोजना के लिए जंगल का विनाश किया गया। अदानी द्वारा जितने पेड़ों की कटाई का दावा किया जा रहा है वास्तविकता उससे दस गुना अधिक पेड़ों की कटाई कर पूरे जंगल का विनाश कर दिया गया। प्रस्तवित क्षेत्र में बह रहे प्राकृतिक नाला का भी रुख मोड़ने की कोशिश की गई।  दो  माह पूर्व जो क्षेत्र घना जंगल था वह क्षेत्र मौजूदा समय में मैदान और खाई में तब्दील हो गया है। जिससे वनोपज पर निर्भर रहने वाले ग्रामीणों की आजीविका भी छीन गई है, ग्रामीणों ने कहा कि यदि इस पर यह कोल परियोजना निरस्त नहीं किया गया तो संभवतःकोल क्षेत्र का दायरा और बढ़ेगा, जिससे आने वाली पीढ़ी भी इससे प्रभावित होगी। 

कांग्रेस के जांच दल ने किया था निरीक्षण

हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोल ब्लॉक के लिए पेड़ों की कटाई और आदिवासियों द्वारा अत्याचार के लगाए गए आरोपों की जांच के लिए  गठित कांग्रेस की टीम ने आज प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया था। पूर्व मंत्री डॉ प्रेम साय सिंह की अगुवाई में जांच टीम ने साल्ही, हरिहरपुर,घाटबर्रा और फतेहपुर के लोगों से बात की थी। जांच दल को ग्रामीणों ने बताया   था कि     प्रभावित गांव के लोग अपनी जमीन नहीं देने के लिए प्रतिबद्ध है। वे पिछले 675 दिन से जंगल और जमीन बचाने के लिए हरिहरपुर और घाटबर्रा गांव में धरना दे रहे हैं। ग्राम हरिहरपुर में धरने पर बैठे ग्रामीणों  के प्रतिनिधियों रामलाल करियाम साल्ही,इंद्र कुंवर मदनपुर,उमेश्वर साल्ही, सम्पतिया हरिहरपुर ने ग्रामीणों की ओर से एक स्वर से कहा था हसदेव अरण्य क्षेत्र की सभी 23 प्रस्तावित कोयला खदानों को निरस्त किया जाए।

परसा खदान के लिए ग्रामीणों की सहमति नहीं

  पूर्व में कांग्रेस के जांच दल को ग्रामीणों ने यह भी कहा था कि परसा खदान के लिए ग्रामीणों की सहमति नहीं है। 27 जनवरी 2018 को वन अधिकार पट्टा के लिए ग्राम सभा की बैठक हुई थी।ग्राम सभा के प्रस्ताव में 1 से 21 तक खदान का कोई जिक्र नहीं हुआ। ग्रामसभा की समाप्ति  के बाद उदयपुर के रेस्ट हाउस में  अधिकारियों ने सरपंच /सचिव पर दबाव बनाकर अलग से क्रमांक 22 में खदान के लिए सहमति का एजेंडा लिखकर हस्ताक्षर करा लिया। फर्जी ग्रामसभा के प्रस्ताव के सम्बंध में उदयपुर थाना से लेकर महामहिम राज्यपाल महोदय तक शिकायत की जा चुकी है।अभी तक जांच नहीं हुई है।

जिसकी 16 साल पहले हुई मौत, रजिस्टर में उसका भी हस्ताक्षर

  ग्रामीणों के द्वारा कांग्रेस के जांच दल को जानकारी दी गई थी कि घाटबर्रा में सामुदायिक वन अधिकार का पट्टा मिला था ,उसे निरस्त कर दिया। मामला न्यायालय में विचाराधीन है। यहां वनों की कटाई को लेकर विशेष ग्राम सभा हुआ था। ग्रामीणों के विरोध के चलते उसे निरस्त कर दिया गया। आरोप है कि बाद में घर-घर रजिस्टर घुमाकर हस्ताक्षर कराया गया। घाट बर्रा के अधिकांश लोगों ने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया तो फर्जी हस्ताक्षर कराया गया। कृष्णा प्रसाद ने आरोप लगाया था कि  धनीराम आत्मज संतराम की मृत्यु 15-16 साल पहले हो चुकी है। उनका भी हस्ताक्षर रजिस्टर में है। ऐसे कई नाम है जिनकी मृत्यु ग्रामसभा से पहले हो चुकी है लेकिन कार्यवाही पंजी में उनके दस्तखत है ।

अदानी कंपनी बारहमासी नदियों को डायवर्ट कर अस्तित्व कर रही खत्म 

कांग्रेस के जांच टीम के संयोजक पूर्व मंत्री डॉ प्रेम साय सिंह ने जांच के बाद ग्रामीणों के हवाले से मीडिया को बताया था कि बताया नया खुलने वाले परसा खदान के लिए वनों की कटाई की स्वीकृति मिलने की बात कंपनी के लोग कहते हैं हालांकि संबंधित कागज कभी नहीं दिखाया गया, इसे लेकर ग्रामीणों में संशय की स्थिति है। ग्रामीण जन डरे हुए हैं उन्हें लगता है अदानी कंपनी प्रशासन के साथ मिलकर कभी भी जंगल की कटाई शुरू कर सकती है। एक अनुमान के मुताबिक परसा और केते एक्सटेंशन खदान के लिए कुल 9 लाख से अधिक पेड़ काटे जाएंगे।  कांग्रेस की टीम ने हाल में किये जंगल की कटाई और खदान क्षेत्र का निरीक्षण किया। टीम को ग्रामीणों ने दिखाया किस तरह अडानी कम्पनी बारहमासी छोटी नदियों को डाइवर्ट कर उनका अस्तित्व खत्म कर रही है।

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