सुरभि गौधाम आवारा मवेशियों के लिए बनी वरदान.. सूरजपुर जिले में एक संकल्प से शुरू हुई सेवा, अब बनी मिसाल..

सुरभि गौधाम आवारा मवेशियों के लिए बनी वरदान.. सूरजपुर जिले में एक संकल्प से शुरू हुई सेवा, अब बनी मिसाल..

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सूरजपुर। खबरी गुल्लक। 12 अगस्त 2026

  कभी सड़कों और गांव की गलियों में भटकते, दुर्घटनाओं की आशंका के बीच असुरक्षित जीवन जीते गौवंश को अब एक सुरक्षित आश्रय मिल रहा है।  छत्तीसगढ़ शासन द्वारा गौवंश एवं मवेशियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए शुरू की गई सुरभि गौधाम योजना ऐसे ही प्रयासों को नई दिशा दे रही है। जब किसी संवेदनशील पहल को वर्षों की सेवा, शासन की योजना और समाज के सहयोग का साथ मिलता है, तो वह केवल एक व्यवस्था नहीं रहती, बल्कि बदलाव की कहानी बन जाती है।  सूरजपुर जिले के ग्राम पंचायत करवां स्थित सुरभि गौधाम आज ऐसी ही एक प्रेरक कहानी कह रहा है। यहां वर्तमान में 208 गौवंश को सुरक्षित आश्रय, चारा, उपचार और संरक्षण मिल रहा है। इनमें 43 घुमंतू गौवंश का रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित वातावरण में रखा गया है।

            मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा गौवंश एवं मवेशियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए शुरू की गई सुरभि गौधाम योजना ने जिले में वर्षों से व्यक्तिगत और सामाजिक प्रयासों के माध्यम से चल रहे गौवंश संरक्षण के कार्यों को नई दिशा दी है। सूरजपुर जिले में योजना के अंतर्गत छह सुरभि गौधाम स्वीकृत हैं, जिनमें तीन का संचालन प्रारंभ हो चुका है, जबकि तीन गौधाम के निर्माण की प्रक्रिया जारी है।

           कारवाँ का सुरभि गौधाम पूर्व में कामधेनु कल्पतरु सेवा संस्थान के रूप में वर्ष 2000 से संचालित हो रहा है। संस्थान के संस्थापक श्री ललन राम राजवाड़े ने घुमंतू एवं निराश्रित गौवंश को सुरक्षित आश्रय देने का संकल्प लेकर इस कार्य की शुरुआत की थी। सीमित संसाधनों के बीच जनसहयोग, स्वयं के प्रयास और श्रम से वर्षों तक इस सेवा को जारी रखा गया। अब शासन की सुरभि गौधाम योजना से जुड़ने के बाद इस सेवा को संस्थागत सहयोग और विस्तार का अवसर मिला है।

शासन के सहयोग से संकल्प पूरा हुआ - ललन

 ललन राम राजवाड़े बताते हैं कि उनका उद्देश्य ऐसा आश्रय तैयार करना था, जहां घुमंतू गौवंश को सुरक्षित रखा जा सके और जरूरतमंद किसानों को उपयोगी गौवंश उपलब्ध कराया जा सके। आज शासन-प्रशासन के सहयोग से उनका यह वर्षों पुराना संकल्प और मजबूत हुआ है। 

कलेक्टर के मार्गदर्शन में योजना ने पकड़ी गति - उप संचालक

   इस सम्बन्ध में पशु चिकित्सा विभाग के उप संचालक डॉ. नृपेंद्र सिंह ने बताया कि कलेक्टर श्रीमती रेना जमील के निर्देशानुसार जिले में गौवंश संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर लगातार कार्य किया जा रहा है। गौधाम में पशु चिकित्सकों द्वारा नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, उपचार एवं टीकाकरण किया जा रहा है। कृत्रिम गर्भाधान सहित आवश्यक पशु चिकित्सा सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि भविष्य में गौधाम में प्रशिक्षण केंद्र, हरे चारे का उत्पादन, जैविक खाद निर्माण तथा पशु मित्र एवं चरवाहे की व्यवस्था विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इससे गौधाम की व्यवस्थाएं मजबूत होने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। गौधाम के संचालन में समिति के अध्यक्ष श्री बेचन राम राजवाड़े, उपाध्यक्ष श्री राम कुशवाहा, कोषाध्यक्ष  रामेश्वर कुशवाहा, सचिव  कामेश्वर राजवाड़े, संस्थापक  ललन राम राजवाड़े, संरक्षक  अरुण सिंह तथा सदस्य  सुमन सिंह,  राजकुमार कुशवाहा,  हेमराज सिंह, ज्ञान सा राजवाड़े एवं  अर्जुन कुशवाहा सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।




  आज करवां का सुरभि गौधाम केवल गौवंश के लिए आश्रय नहीं, बल्कि सेवा से संरक्षण, संरक्षण से संवर्धन और संवर्धन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता एक प्रयास है। वर्षों पहले एक व्यक्ति के संकल्प से शुरू हुई यह यात्रा अब छत्तीसगढ़ शासन की योजना, जिला प्रशासन की पहल, पशु चिकित्सा विभाग की सेवाओं और ग्रामीणों के जनसहयोग से नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है। यही सामूहिक प्रयास आने वाले समय में गौवंश के लिए सुरक्षित आश्रय और ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार व जैविक अर्थव्यवस्था की नई संभावनाओं का आधार बनेगा।

रेस्क्यू से संरक्षण तक, सड़क सुरक्षा में भी मददगार

जिला प्रशासन एवं पशु चिकित्सा विभाग द्वारा घुमंतू गौवंश को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने के लिए लगातार रेस्क्यू अभियान चलाए जा रहे हैं। सड़कों पर विचरण करने वाले मवेशियों को गौधाम तक पहुंचाकर उनकी बेहतर देखभाल सुनिश्चित की जा रही है। इससे गौवंश को दुर्घटनाओं से सुरक्षित रखने के साथ सड़कों पर मवेशियों के विचरण से उत्पन्न होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका को कम करने में भी मदद मिल रही है।

गौधाम बनेगा जैविक उत्पाद और रोजगार का केंद्र

गौधाम में नेपियर घास, भूसा एवं पैरा की व्यवस्था की गई है। स्थानीय किसानों और ग्रामीणों द्वारा भी पैरा एवं चारा उपलब्ध कराकर सहयोग किया जा रहा है। संस्थान द्वारा गोबर से जैविक खाद, जीवामृत, पंचगव्य आधारित खाद, गोबर कंडे, गोबर गैस एवं जैविक कीटनाशक तैयार करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। भविष्य में किसानों से प्राप्त पैरा के बदले उन्हें जैविक खाद उपलब्ध कराने की योजना है। इससे गौधाम को चारे की उपलब्धता मिलेगी, किसानों को जैविक खाद का लाभ मिलेगा और फसल अवशेषों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।

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