अंबिकापुर।खबरी गुल्लक
संभाग मुख्यालय अंबिकापुर के महामाया पहाड़ में मिले अज्ञात युवक के कंकाल की पहचान परिजनों के द्वारा चप्पल और कपड़े से शुभम कश्यप पिता स्व. मुन्ना कश्यप 33 वर्ष निवासी मायापुर कोतवाली के समीप के रूप में की गई है। इस मामले में परिजनों द्वारा पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल भी उठाया है। मृतक शहर के जयस्तंभ चौक के समीप युग मोबाइल रिपेयर दुकान चलाता था। वह 10 जुलाई की देर रात से लापता था। विदित हो कि महामाया पहाड़ के सागौन नर्सरी के बीच 25 जुलाई 2026 को प्रातः एक पेड़ झूलता सिर का कंकाल और नीचे धड़ मिला था। शव के समीप लेडीज चप्पल मिलने का दावा करते हुए शव महिला का होने की संभावना जताई गई थी। मगर शॉर्ट पीएम में शव पुरुष के होने की पुष्टि हुई थी। कोतवाली पुलिस यह दावा कर रही थी कि मृतक की पहचान के लिए गुमशुदगी के मामलों को खंगाला जा रहा है, लेकिन पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। कोतवाली से चंद फर्लांग की दूरी पर रहने वाला युवक शुभम कश्यप 10 जुलाई की देर रात लापता हुआ था परिजनों ने उसी दिन थाने में सूचना दिया था मगर पुलिस कर्मी चंद कदम चल कर परिजनों को यह भी नहीं बता सके कि पहाड़ में अज्ञात कंकाल, शव मिला है, एक बार देख लो। पुलिस कर्मियों में शव का मौके पर ही पोस्टमार्टम कराते हुए दफन भी करवा दिया। यह आरोप कथित मृतक के परिजनों ने लगाया है।
रात में ले गए थे कोतवाली
मृतक के परिजनों ने बताया कि शुभम कश्यप नशे का आदि था। 10 जुलाई को भी वह नशे में घर आया था, जिससे उसे यह समझ कर कोतवाली ले गए ताकि पुलिस कर्मियों की फटकार से उसकी आदत में सुधार आये। थोड़ी देर बाद परिजन घर लौट गए, शुभम भी पीछे पीछे घर आ रहा था मगर वह रास्ते में गायब हो गया। परिजनों ने उसे ढूंढने का प्रयास किया मगर सफलता नहीं मिलने पर कोतवाली में जानकारी दी। 11 जुलाई को पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज किया, मगर उसे ढूंढने के बजाए ठंडे बस्ते में डाल दिया।
खबर पढ़ परिजनों को पता चला
परिजनों ने आरोप लगाया कि महामाया पहाड़ में अज्ञात शव कंकाल मिलने की जानकारी भी कोतवाली पुलिस ने नहीं दी। सोशल मीडिया और अखबार में छपे खबर को देख परिजन खुद 26 जुलाई की शाम 6 बजे कोतवाली पहुंचे, वहां पुलिस कर्मियों ने उन्हें शव के समीप मिले छपल और कपड़े की फोटो दिखाया तो उनकी आंखे फटी की फटी रह गई। चप्पल और कपड़े शुभम कश्यप के ही थे। जिससे उसकी पहचान परिजनों ने शुभम कश्यप के रूप में की।
बिना पहचान दफनाया
परिजनों ने कहा कि जब मृतक की पहचान नहीं हो पाई थी तो शव को क्यों दफनाया गया। पुलिस ने कहा कि उन्होंने जब शव के संबंध में पूछताछ की तो बताया गया कि मौके पर ही पोस्टमार्टम के बाद दफन करा दिया गया है। इस संबंध में कोतवाली प्रभारी से संपर्क नहीं हो पाने के कारण उसका पक्ष नहीं लिया जा सका।
पुलिस कर्मियों पर अभद्रता का भी आरोप
परिजनों का कहना है कि पहाड़ में शव मिलने की सूचना पर जब वे रविवार की शाम कोतवाली गए तो पुलिस कर्मियों ने चप्पल और कपड़े दिखाए, यह लापता शुभम के होने पर वे रो पड़े। पति की मौत होने पर पत्नी भी बिलख पड़ी। अपनों के खोने पर यह प्रतिक्रिया स्वाभाविक थी। मगर वहां मौजूद एक पुलिस कर्मी गमजदा परिजनों को दुत्कारने लगा ,वहां मौजूद अन्य पुलिस कर्मियों से कहने लगा इन्हें यहां से बाहर भगाओ, पुलिस कर्मियों के इस व्यवहार से परिजन आहत हुए। पुलिस के इस बर्ताव की नागरिकों ने निंदा की।




