निजीकरण,आउटसोर्सिंग,ठेका प्रथा के खिलाफ छग स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने किया आंदोलन का ऐलान.. प्रदेश अध्यक्ष अनिल पाण्डेय ने कहा देंगे ज्ञापन, मांग पूरी नहीं हुई तो काम काज कर देंगे ठप, होगा बेमुद्दत हड़ताल

निजीकरण,आउटसोर्सिंग,ठेका प्रथा के खिलाफ छग स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने किया आंदोलन का ऐलान.. प्रदेश अध्यक्ष अनिल पाण्डेय ने कहा देंगे ज्ञापन, मांग पूरी नहीं हुई तो काम काज कर देंगे ठप, होगा बेमुद्दत हड़ताल

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रायपुर।।खबरी गुल्लक ।।

 छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रांतीय कार्यालय रायपुर  में प्रांताध्यक्ष अनिल पाण्डेय के नेतृत्‍व एवं संरक्षक ओपी शर्मा के मार्गदर्शन में प्रदेश स्तरीय महासमिति की अहम बैठक सम्पन्न हुई, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के निजीकरण, आउटसोर्सिंग व ठेका प्रथा तथा कर्मचारियों के वेतन व न्‍यायपूर्ण नीति लागू कराने की मांगों पर गहन चर्चा हुई। बैठक में सर्वसम्मति से आंदोलन का निर्णय लिया गया और प्रदेशव्यापी बचाव-प्रवर्तन तथा समन्वित कदम उठाने का संकल्प लिया गया। 

प्रांताध्यक्ष अनिल पाण्डेय ने  कहा कि स्वास्थ्य विभाग का किसी भी रूप में निजीकरण स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि HLL जैसी कंपनियों को पैथोलॉजी व फार्मेसी सौंपने की प्रक्रिया से स्वास्थ्य सेवाओं के सार्वजनिक स्वभाव पर चोट पहुंचेगी और इससे कर्मचारियों की नौकरी व भविष्य असुरक्षित होंगे। पाण्डेय ने कहा कि हम निजीकरण के परिणामस्वरूप आने वाले नौकरी और गुणवत्ता के संकट को सहन नहीं करेंगे। कर्मचारियों, अधिकारियों और आम जनता के हित में यह कदम घातक साबित होगा। 

उन्होंने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री व स्वास्थ्य सचिव से तत्काल शाशन स्तर पर लंबित विभागीय प्रस्तावों को लागू करने की मांग दोहराई  जिसमें स्वास्थ्य कर्मचारियों का पुनरीक्षित वेतनमान, संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन, जीवन दीप कर्मचारियों के शोषण के विरुद्ध स्पष्ट नीति और विभाग के स्वीकृत रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति प्रक्रिया तात्कालिक शुरू करने का आग्रह शामिल है। 

बैठक में पाण्डेय ने प्रदेश के युवाओं के भविष्य पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दूसरे प्रदेशों के डॉक्टर, नर्स व पैरामेडिकल कोर्स के लिए पंजीकरण अनिवार्यता समाप्त करने के कदम से यहाँ के युवा बेरोजगार हो सकते हैं और फर्जी डिग्रियों वाले लोगों के प्रवेश से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर प्रश्न खड़ा होगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में गुणवत्ता व पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। 

कर्मचारी अधिकारी महासंघ के संयोजक अनिल शुक्ला ने भी बैठक को संबोधित करते हुए विभाग में चल रहे विभिन्न निजीकरण प्रयोगों का कड़ा विरोध जताया। शुक्ला ने कहा कि यह नीतियाँ कर्मचारियों व आम जनता दोनों के हितों के खिलाफ हैं और महासंघ इन मांगों का पुरजोर समर्थन करता है। बैठक में निर्णय लिया गया कि संघ चरणबद्ध आंदोलन करेगा। सर्वसम्मति से प्रथम चरण में 22 जुलाई को प्रदेश के समस्त जिला मुख्यालयों पर संघ के पदाधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा नारेबाजी कर जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री व स्वास्थ्य सचिव को ज्ञापन सौंपा जाएगा। यदि इन मांगों को सन्तोषजनक रूप से नहीं माना जाता है तो इसके बाद अनिश्चितकालीन आंदोलन की राह अपनाई जाएगी।  

महासमिति व कोर कमेटी ने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन शांतिपूर्ण एवं संगठित तरीके से चलेगा तथा कर्मचारी, अधिकारी नियमित, संविदा, दैनिक वेतनभोगी व जीवन दीप सभी एकजुट रहेंगे। बैठक में प्रांतीय पदाधिकारी, प्रांतीय संयोजक, संभागीय अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष और बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे।  

प्रांताध्यक्ष अनिल पाण्डेय ने समापन में सभी पदाधिकारियों व सदस्यों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने स्तर पर जुटकर संघ की रणनीति को सुदृढ़ बनाएं और 22 जुलाई के प्रथम चरण में बड़ी संख्या में भाग लेकर संघ की मांगों को मजबूती से रखें। 



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