धमतरी। खबरी गुल्लक
मगरलोड जनपद में वर्ष 2007 में हुए शिक्षाकर्मी भर्ती फर्जीवाड़ा मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 10 दोषी शिक्षाकर्मियों की दो धाराओं में सुनाई गई सजा को बरकरार रखा है। दो धाराओं में सजा यथावत रहने के कारण सभी दोषियों को जेल भेज दिया गया।
न्यायालयीन सूत्रों के अनुसार मामले की शुरुआत 22 जुलाई 2011 को हुई थी, जब ग्राम चंदना निवासी कृष्णकुमार साहू ने मगरलोड थाना में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि वर्ष 2007 की शिक्षाकर्मी भर्ती में कूटरचित फर्जी हायर सेकेंडरी अंकसूची एवं प्रमाण-पत्रों के आधार पर नियुक्तियां प्राप्त की गई हैं। शिकायत की जांच के बाद पुलिस ने नारायण प्रसाद कश्यप, त्रिवेणी साहू, मेणुका कंवर, खेमनलाल साहू, ललेश कुमार साहू, सुरेश यादव, दुर्गा साहू, धर्मेन्द्र साहू, पिलेश्वर साहू तथा जितेन्द्र कुमार साहू के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 एवं 471 के तहत अपराध दर्ज किया था।
प्रकरण की सुनवाई के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मोना चौहान ने 10 फरवरी 2020 को सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए धारा 420 एवं 468 के तहत पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास तथा धारा 471 के तहत एक वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। दोषी 16 से 83 दिनों तक जेल में रहने के बाद जमानत पर रिहा हुए और उन्होंने अतिरिक्त सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राधेश्याम ध्रुव ने अपील पर सुनवाई के बाद धारा 420 के तहत पांच वर्ष तथा धारा 471 के तहत एक वर्ष के सश्रम कारावास की सजा और दोनों धाराओं में लगाए गए जुर्माने को यथावत रखा। जुर्माना अदा नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं, धारा 468 के तहत दोषसिद्धि को निरस्त कर दिया गया।
दो धाराओं में सजा बरकरार रहने के बाद न्यायालय के आदेश पर सात पुरुष दोषियों को जिला जेल धमतरी तथा तीन महिला दोषियों को केंद्रीय जेल रायपुर भेज दिया गया। यह फैसला लंबे समय से लंबित इस भर्ती फर्जीवाड़ा मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।




