बलरामपुर।खबरी गुल्लक
राज्य और केंद्र सरकार के रेल संबंधी फैसलों पर स्थानीय जनहित की आवाज बुलंद करते हुए भाजपा नेता अमरदीप मिंज ने केंद्रीय रेल मंत्री को एक ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में उल्लेख किया है कि अम्बिकापुर बरवाडीह विशेष स्वीकृत रेल मार्ग को पुनर्संशोधित कर बलरामपुर को जंक्शन बनाया जाए और पुराने बरवाडीह–चिरमिरी मार्ग से सरनाडीह से बिन्दा तक का पुराना खंड बहाल किया जाए। अमरदीप मिंज ने कहा है कि वर्तमान सर्वेक्षण में छेड़छाड़ कर नये मार्ग में बदलाव कर दिए गए हैं, जिससे बलरामपुर की विकास संभावनाओं व एक लंबी ऐतिहासिक मांग को नजरअंदाज किया जा रहा है। रेल मंत्रालय ने 26 मई 2026 को अम्बिकापुर से बरवाडीह रेल लाइन तथा रामानुजगंज से गढ़वा रोड जंक्शन तक के मार्ग हेतु निर्माण अधिसूचना जारी की थी।
पत्र में बताया गया है कि रामानुजगंज से गढ़वा रोड तक के खंड पर कोई विरोध नहीं है और स्थानीय लोग उसे स्वीकृति देते हैं। परंतु अम्बिकापुर–बरवाडीह मार्ग के सर्वे में कपट तरीके से बदलाव कर पुराने खंड सरनाडीह से बिन्दा लगभग 40 किलोमीटर को छोड़ कर रामानुजगंज से तेवाली व बिन्दा तक का नया 40 किलोमीटर खंड जोड़ा गया है। ज्ञापन में आरोप है कि नया सर्वे बरवाडीह–चिरमिरी के पुराने पथ को दरकिनार कर रहा है, जबकि उस पुराने पथ पर 1936 से ब्रिटिश काल में बरवाडीह से सरनाडीह तक के अर्थवर्क, पुल- पुलिया व रेलवे के नाम पर भूमि का दाखिला खसरा नं. 66, रकबा 26.2100 हे. है। अम्बिकापुर बरवाडीह विशेष स्वीकृत रेल पथ में रामानुजगंज से तेवाली-बिन्दा तक जो नया 40 किमी भाग प्रस्तावित किया गया है उसे निरस्त किया जाए। पुराना मार्ग बरवाडीह—चिरमिरी मार्ग व सरनाडीह, रामनगर, सालो, नवका, बिन्दा तक का लगभग 40 किमी खंड बहाल किया जाए। बलरामपुर शहर को इस मार्ग पर जंक्शन का दर्जा और उपयुक्त कनेक्टिविटी दी जाए ताकि जिले के सामाजिक-आर्थिक तथा औद्योगिक विकास को बल मिल सके। प्रस्तावित निर्माण कार्य रेलवे के पहले से अधिगृहीत भूमि पर ही कराया जाए तथा किसी अनाधिकृत परिवर्तन के बिना पुनः अधिसूचना जारी की जाए।
1936 में अंग्रेजों ने शुरू किया था योजना
ज्ञापन में औचित्य पेश करते हुए बताया गया है कि बरवाडीह - चिरमिरी रेल पथ की योजना व कार्य 1936 में ब्रिटिश शासन के दौरान कोयला परिवहन के लिए आरंभ किया गया था। उस समय से ही सरनाडीह ग्राम में रेलवे के नाम से दर्ज भूमि मौजूद है और उस मार्ग पर रेलवे के लिए अर्थवर्क और पुल आदि का कार्य किया जा चुका है। स्थानीय लोगों का तर्क है कि पिछले 80–90 वर्षों से इलाके की कई पीढ़ियाँ उस मार्ग पर रेल चलने का सपना देख रही हैं और अचानक सर्वे रूट बदल देने से जनहित की यह लंबित मांग ठुकराई जा रही है।
भाजपा नेता अमरदीप मिंज ने बताया कि बलरामपुर और आसपास के लोग रामानुजगंज गढ़वा रोड खंड का स्वागत करते हैं, परन्तु अपने शहर के विकास, औद्योगिक कनेक्टिविटी और ऐतिहासिक अधिग्रहित भूमि की स्थिति को देखते हुए पुराने मार्ग के बहाली की अनिवार्यता है। ज्ञापन में सर्वे के नक्शों और तुलनात्मक विवरणों का ज़िक्र है, जिनके द्वारा यह स्पष्ट है कि किस प्रकार बदलाव कर पुराने 40 किमी खंड को बहिष्कृत किया गया है। मिंज ने अधिकारियों से आग्रह किया है कि प्रस्तुत नक्शे और दस्तावेजों की जाँच कर निष्पक्ष निर्णय लिया जाए।
किया यह अनुरोध
अमरदीप मिंज ने केंद्रीय रेल मंत्री से अनुरोध किया है कि वे उक्त मार्ग संबंधी अधिसूचना की समीक्षा कर तत्काल पुनः अधिसूचना जारी करें ताकि बलरामपुर को रेल जंक्शन बनाकर रेलवे के पूर्व से अधिगृहीत भूमि पर कार्य प्रारम्भ हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यकता हुई तो वे स्थानीय स्तर पर विरोध-प्रदर्शन और लोकतांत्रिक माध्यमों से जनआवाज़ बुलंद करेंगे, ताकि जनहित की यह मांग सफल हो सके। स्थानीय राजनीतिक व सामाजिक संगठनों के अनुसार यह मसला केवल स्थानीय सविधा का विषय नहीं है बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक विकास, कोयला व खनिज परिवहन, तथा तीन पीढ़ियों की अपेक्षा से जुड़ा संवेदनशील मामला भी है। इसलिए दोनों राज्यों छत्तीसगढ़ व झारखण्ड व रेल मंत्रालय के बीच समन्वित कार्यवाही आवश्यक मानी जा रही है।




