सूरजपुर ने रचा जल संरक्षण में नया कीर्तिमान, देश में चौथा और प्रदेश में अव्वल.. जल संरक्षण मुहिम में राष्ट्रीय पहचान, देश के टॉप-10 जिलों में शामिल

सूरजपुर ने रचा जल संरक्षण में नया कीर्तिमान, देश में चौथा और प्रदेश में अव्वल.. जल संरक्षण मुहिम में राष्ट्रीय पहचान, देश के टॉप-10 जिलों में शामिल

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सूरजपुर। खबरी गुल्लक।4 सितंबर 2026

जल संरक्षण के क्षेत्र में सूरजपुर जिले ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए देश में चौथा स्थान और छत्तीसगढ़ में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। जल संचय जन भागीदारी अभियान के तहत जिले में किए गए व्यापक जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण के कार्यों और जनभागीदारी के परिणामस्वरूप सूरजपुर ने देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है।बारिश की हर बूंद को सहेजने और उसे धरती के भीतर पहुंचाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षित करने की दिशा में छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले ने देश के सामने जनभागीदारी का प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण में सूरजपुर जिला ने जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के शीर्ष 10 जिलों में स्थान बनाने में सफल रहे हैं। सूरजपुर जिला ने देश में चौथा और छत्तीसगढ़ प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे नवाचारों और जनभागीदारी आधारित प्रयासों की जानकारी राष्ट्रीय मंच पर साझा की। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को केवल शासकीय योजनाओं और जल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं रखा है। किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को इससे जोड़कर इसे व्यापक जनअभियान का स्वरूप दिया गया है। सूरजपुर की यह उपलब्धि केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि किसानों, ग्राम पंचायतों, जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और जिलेवासियों की सामूहिक भागीदारी का परिणाम है। जल संरक्षण को जनअभियान का स्वरूप देते हुए जिले में बारिश की हर बूंद को सहेजने और उसे भू-जल के रूप में सुरक्षित करने पर विशेष जोर दिया गया।



इसमें किसान जल संरक्षण के केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार हैं। किसान अपनी भूमि उपलब्ध करा रहे हैं, पंचायतें और स्थानीय समुदाय सहयोग कर रहे हैं तथा विभिन्न विभागों और योजनाओं के समन्वय से जल संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। जल संरचनाओं की जियो-टैगिंग, नियमित मॉनिटरिंग और प्रगति की समीक्षा को भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। जल सखी, जल मित्र, किसान और पंचायत प्रतिनिधि गांवों में जल संरक्षण की इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं।  खेत में ही वर्षा जल को रोकने से भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलने के साथ सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर होने की संभावना है। लंबे समय में इससे खेती की वर्षा पर निर्भरता कम करने और जल सुरक्षा बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी।

देश के शीर्ष 10 जिला में सूरजपुर हुआ शामिल 

          सूरजपुर जिले ने राज्य स्तर की उपलब्धि के साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर अपनी  उपस्थिति दर्ज कराई है। जल संरक्षण के क्षेत्र में सूरजपुर जिला का नाम देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल किया गया हैं। सूरजपुर जिले में जल संरक्षण को स्थानीय समुदायों से जोड़ते हुए गांव और पंचायत स्तर पर वर्षा जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण के कार्य किए गए हैं। स्थानीय परिस्थितियों और जरूरतों के अनुरूप जल संरचनाओं के निर्माण के साथ लोगों की भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है।

          कलेक्टर श्रीमती रेना जमील ने कहा कि जल संरक्षण केवल शासकीय योजनाओं तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। सूरजपुर जिले का देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल होना जल संरक्षण के प्रति जनभागीदारी और सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। जिले में वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण एवं जल स्रोतों के संरक्षण के कार्यों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बारिश की हर बूंद को सहेजने के लिए जनभागीदारी को और मजबूत करते हुए जल संरक्षण के कार्यों को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।

          जिला पंचायत सीईओ श्री विजेन्द्र सिंह पाटले ने कहा कि ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तहत जिले में ग्राम पंचायत स्तर पर वर्षा जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण के कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों, किसानों, जल सखियों, जल मित्रों और ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी से सूरजपुर में जल संरक्षण के प्रयासों को निरंतर गति मिल रही है।

जल संरक्षण से सूरजपुर में बढ़ी समृद्धि की राह

सूरजपुर जिले में जल संरक्षण के व्यापक प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव आया है। जिले में अब तक 588399 जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जिससे 94.89 लाख घन मीटर जल भराव क्षमता का सृजन हुआ है। इसके परिणामस्वरूप 5,608.26 हेक्टेयर सिंचित रकबे में वृद्धि हुई है। फॉर्म पोंड, तालाब गहरीकरण, अमृत सरोवर, रिचार्ज पिट, कंटूर ट्रेंच और गेबियन चेक डैम जैसी संरचनाएँ जल संचय के साथ कृषि एवं ग्रामीण आजीविका को मजबूती प्रदान कर रही हैं।

जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ के मंत्र को जमीन पर उतार रहा सूरजपुर 

प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के ‘कैच द रेन - जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ के संदेश को छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप धरातल पर उतारा है। जिले की भौगोलिक विविधता को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में वहां की आवश्यकता और जल उपलब्धता के अनुसार जल संचयन तथा भू-जल पुनर्भरण की संरचनाएं विकसित की जा रही हैं। जिला प्रशासन का प्रयास है कि बारिश का अधिकतम पानी गांव और खेत की सीमा के भीतर ही रोका जाए। इससे न केवल भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सिंचाई, पेयजल और अन्य स्थानीय जरूरतों के लिए जल उपलब्धता को भी बेहतर बनाया जा सकेगा।

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