अंबिकापुर के लुचकी से भाथूपारा नहर पर भी भू माफियाओं ने कर लिया कब्जा.. रात में जेसीबी से पाटा नहर, मकान भी बन रहे..

अंबिकापुर के लुचकी से भाथूपारा नहर पर भी भू माफियाओं ने कर लिया कब्जा.. रात में जेसीबी से पाटा नहर, मकान भी बन रहे..

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अंबिकापुर।खबरी गुल्लक 

 अंबिकापुर शहर की जल निकासी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंता पैदा हो गई है। शहर की दूसरी प्रमुख नहर, जो लुचकी क्षेत्र से भाथूपारा तक जाती है पर भूमाफियों का कब्जा लगातार बढ़ रहा है। बीती रात भूमाफियों ने जेसीबी मशीन से नहर को मिट्टी से पाट दिया। नहर के ऊपर मकान निर्माण भी जारी है, जिससे न केवल नहर का अस्तित्व खतरे में है, बल्कि आने वाले वर्षों में शहर के इस हिस्से में जलजमाव और बाढ़ जैसी समस्या का खतरा भी गहरा गया है। वर्तमान समय में अंबिकापुर के भारतमाता चौक से दरिमा मोड़ के बीच बांकी जलाशय की नहर में हुए अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन कार्रवाई कर रहा है। जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग की संयुक्त टीम नहर की भूमि का सीमांकन कर अतिक्रमण हटाने का प्रयास कर रही है। इस कार्रवाई में अब तक कई कब्जे हटाए जा चुके हैं और बड़े निर्माणों पर भी बुलडोजर चलाया जा रहा है।

प्रशासन का यह प्रयास इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मार्ग शहर की प्राकृतिक जल निकासी से जुड़ा है। बारिश के मौसम में शहर का अधिकांश जल इसी नहर के माध्यम से निकलता है। इसे दोबारा बहाल करने का प्रयास नागरिकों के हित में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। लेकिन इसी कार्रवाई के बीच एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है कि लुचकी से भाथूपारा की ओर बनी दूसरी नहर की ओर प्रशासन का ध्यान क्यों नहीं जा रहा है? इस नहर पर वर्षों से अवैध कब्जा होता आ रहा है और अब स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि भूमाफियों ने खुलेआम जेसीबी मशीन से नहर को पाटना शुरू कर दिया है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि बीती रात भूमाफियों ने जेसीबी मशीन लगाकर नहर में मिट्टी भर दी। नहर के ऊपर पहले से बने मकानों के अलावा नए निर्माण भी तेजी से चल रहे हैं। इससे नहर का मूल स्वरूप समाप्त होता जा रहा है और जल निकासी का मार्ग धीरे-धीरे बंद होता जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले समय में यहां न केवल जलजमाव की समस्या बढ़ेगी, बल्कि बारिश के दौरान आसपास के मोहल्लों में पानी भरने और संपत्ति को नुकसान का खतरा भी पैदा होगा। नहर की जमीन सरकारी है, फिर भी इस पर अवैध कब्जा कर निर्माण कराया जा रहा है, जिससे शासन-प्रशासन की छवि पर भी सवाल उठ रहे हैं।

 भू माफियाओं के बढ़ते हौसले से उठ रहे सवाल

इस घटना ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि भूमाफियों के हौसले कितने बुलंद हो चुके हैं। प्रशासन की मौजूदगी के बावजूद वे रात के अंधेरे में जेसीबी मशीन चलाकर नहर को पाट रहे हैं। यह सिर्फ एक नहर का मामला नहीं है, बल्कि शहर की जल निकासी व्यवस्था और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। बांकी जलाशय की नहर पर अतिक्रमण का मामला पहले से चर्चा में है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस नहर के लगभग 11 किलोमीटर दायरे में सैकड़ों कब्जे चिह्नित किए गए थे और कई बड़े निर्माणों पर कार्रवाई की गई है।  इसी तरह लुचकी से भाथूपारा की नहर पर भी अगर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई, तो यहां भी बड़े निर्माण खड़े हो जाएंगे और बाद में कार्रवाई करना और कठिन हो जाएगा।

 जल निकासी की दिक्कत बढ़ने का खतरा

नहर केवल पानी ले जाने का माध्यम नहीं है, बल्कि शहर की जल निकासी की रीढ़ है। जब नहर पर कब्जा होता है या उसे पाट दिया जाता है, तो बारिश का पानी किसी अन्य मार्ग से निकलने को मजबूर होता है। इससे सड़कों पर पानी भरता है, मोहल्लों में जलजमाव होता है और नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ती है। अंबिकापुर में पहले भी जल निकासी भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर विवाद सामने आ चुके हैं। नगर निगम ने कुछ मामलों में नोटिस जारी किया था, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठे थे।  ऐसे में लुचकी-भाथूपारा नहर के मामले में भी यही चिंता व्यक्त की जा रही है कि शिकायत के बाद भी कार्रवाई में देरी होगी या नहीं।

 नागरिकों की मांग  तत्काल हो सर्वे और कार्रवाई

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग है कि जिला प्रशासन तुरंत लुचकी से भाथूपारा नहर का सर्वे कराए। नहर की मूल सीमा, चौड़ाई और वर्तमान स्थिति का स्पष्ट नक्शा तैयार किया जाए। इसके बाद अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए और नहर को कब्जामुक्त कराया जाए। नागरिकों का कहना है कि जिस तरह भारतमाता चौक से दरिमा मोड़ के बीच नहर को बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है, उसी तरह लुचकी से भाथूपारा की नहर को भी प्राथमिकता दी जाए। नहर की जमीन पर हो रहे निर्माण को तुरंत रोका जाए और जेसीबी से नहर पाटने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

 प्रशासन पर टिकी है निगाहें 

अब नजरें जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग पर टिकी हैं। यदि प्रशासन इस मामले में तुरंत संज्ञान लेता है और ठोस कदम उठाता है, तो न केवल नहर बचाई जा सकेगी, बल्कि शहर की जल निकासी व्यवस्था भी मजबूत होगी। लेकिन अगर यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में यह नहर भी अतीत की कहानी बन जाएगी और शहर को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। अंबिकापुर की जनता अब यह देखना चाहती है कि प्रशासन केवल एक हिस्से में कार्रवाई करता है या पूरे शहर की जल निकासी व्यवस्था की रक्षा के लिए समान रूप से संज्ञान लेता है। लुचकी से भाथूपारा नहर का मामला अब केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि शहर की भविष्य की जल निकासी और नागरिक सुविधा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है।

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