ब्रेकिंग: फर्जी एनओसी के सहारे लकड़ी तस्करी का बड़ा खेल बेनकाब, वनविभाग ने बिहार जा रही ट्रक किया जब्त.. दो गिरफ्तार

ब्रेकिंग: फर्जी एनओसी के सहारे लकड़ी तस्करी का बड़ा खेल बेनकाब, वनविभाग ने बिहार जा रही ट्रक किया जब्त.. दो गिरफ्तार

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अंबिकापुर।खबरी गुल्लक 

सरगुजा जिले में लघु वनोपज के अनापत्ति प्रमाण-पत्र के नाम पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए इमारती लकड़ी की तस्करी करने का बड़ा मामला सामने आया है। वनविभाग की टीम ने लकड़ी से लदे एक ट्रक को जब्त किया और इस मामले में दो आरोपियों को हिरासत में लिया है। प्रारंभिक जांच में आरोप है कि तस्कर लाघुवनोपज के वैध परिवहन के दस्तावेजों की आड़ में बड़ी मात्रा में लकड़ी बिहार ले जा रहे थे। वनविभाग को अंतर्राज्यीय गिरोह की संलिप्तता की आशंका है, जिसके बाद मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है।जानकारी के अनुसार वनविभाग को सूचना मिली थी कि सरगुजा क्षेत्र से लकड़ी की एक बड़ी खेप फर्जी दस्तावेजों के सहारे बिहार की ओर भेजी जा रही है। सूचना पर सतर्क हुई वनविभाग की टीम ने संदिग्ध ट्रक को रोककर जांच शुरू की। ट्रक में लदी लकड़ी के परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।

आरोप है कि आरोपियों ने लघु वनोपज के एनओसी के नाम पर दस्तावेज तैयार कर लकड़ी को वैध बताने की कोशिश की थी। लेकिन विभागीय जांच में दस्तावेजों की प्रामाणिकता और लकड़ी के स्रोत दोनों पर संदेह व्यक्त किया गया। जांच अधिकारियों के अनुसार, इस तरह की कार्रवाई से स्पष्ट होता है कि तस्कर अब केवल रात में अवैध परिवहन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कागजी कारोबार में भी छेड़छाड़ कर व्यवस्था से खिलवाड़ कर रहे हैं।

 ट्रक जब्त, दो आरोपी हिरासत में

कार्रवाई के दौरान वनविभाग ने लकड़ी से भरा ट्रक जब्त कर लिया। ट्रक चालक और दूसरे संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया गया। दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है कि लकड़ी कहां से कटी, किसने लोड कराया, फर्जी दस्तावेज किसने बनवाए और इस खेप को बिहार में किसे सौंपा जाना था। वनविभाग का कहना है कि जब्त की गई लकड़ी और ट्रक को विधिसम्मत कार्रवाई के बाद राजसात किया जाएगा। मामले में आरोपियों के विरुद्ध वन अपराध संबंधी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी है। विभाग दस्तावेज बनाने वालों, वाहन मालिकों, दलालों और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने के लिए आगे की कार्रवाई करेगा।

 अंतर्राज्यीय गिरोह की आशंका

मामले की सबसे बड़ी चिंता यह है कि लकड़ी को बिहार ले जाया जा रहा था। अधिकारियों को आशंका है कि यह केवल स्थानीय स्तर की तस्करी नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार को जोड़ने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का हिस्सा हो सकती है। ऐसे गिरोह अक्सर एक राज्य से लकड़ी काटकर दूसरे राज्यों में भेजकर बड़ी रकम कमाते हैं और जांच से बचने के लिए नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हैं। सरगुजा जिले का लगभग 58 प्रतिशत हिस्सा वनों से ढका है और यहां के जंगल व्यावसायिक लकड़ी सहित कई मूल्यवान वनोपज का स्रोत हैं। ऐसे में नियंत्रित अवैध कटाई और परिवहन न केवल वन संपदा को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि पर्यावरण संतुलन, वन्यजीव आवास और स्थानीय वन अधिकारों पर भी असर डालता है। सरगुजा में लकड़ी की अवैध कटाई और परिवहन के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। हाल ही में लुंड्रा क्षेत्र में वनविभाग ने अवैध लकड़ी परिवहन के आरोप में भारी वाहन और मशीनें जब्त की थीं, जबकि बिहारपुर क्षेत्र में भी खैर-छिंद जैसी प्रजातियों की कटाई और तस्करी की शिकायतें उठती रही हैं।  इस बीच वनविभाग ने नाका जांच, रात्रि गश्ती और दस्तावेज सत्यापन का अभियान तेज किया है। वनविभाग के अनुसार अब जब्त ट्रक और लकड़ी के अलावा एनओसी जारी करने की प्रक्रिया, दस्तावेजों की उत्पत्ति तथा आरोपियों के मोबाइल व वाहन से जुड़े सबूतों की जांच की जाएगी। यदि गिरोह का संबंध उजागर हुआ तो और लोगों को गिरफ्तार किए जाने की संभावना है।

सख्त कार्रवाई जरूरी

प्रशासन और वनविभाग पर अब दबाव है कि वह केवल ट्रक जब्त करने तक सीमित न रहे, बल्कि इस काले कारोबार की जड़ तक पहुंचे। ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि सरगुजा के जंगलों की रक्षा के लिए नियमित निगरानी, पारदर्शी दस्तावेज सत्यापन और सख्त कानूनी कार्रवाई जरूरी है।



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