अंबिकापुर।। खबरी गुल्लक।। 14 मई 2026
सरगुजा जिले के विशेष एनडीपीएस कोर्ट ने नशीले इंजेक्शन की अवैध बिक्री के मामले में दो अभियुक्तों को 12-12 वर्ष के सश्रम कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। तीसरे आरोपी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। यह फैसला नशे के खिलाफ अभियान में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि बरामद सामग्री वाणिज्यिक मात्रा में थी। विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट श्री अतुल कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने यह फैसला दिया। शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक नरेन्द्र कुमार पाण्डेय ने पैरवी की।
ग्राहक के इंतजार में खड़े थे, रंगे हाथों दबोचे गए
न्यायालयीन सूत्रों के अनुसार 23 मई 2024 को थाना गांधीनगर में तैनात उप निरीक्षक अश्विनी दीवान को मुखबिर सूचना मिली कि राजमोहनी देवी भवन अम्बिकापुर के बगल की गली में मोटरसाइकिल सीजी 30 बी 9001 पर सवार दो युवक मोहित भारद्वाज और माशुक खान नशीले इंजेक्शन बेचने के लिए ग्राहक का इंतजार कर रहे हैं। सूचना रोजनामचा में दर्ज कर गवाह आकाश सिंह और सुमित राम को साथ लिया गया। नगर पुलिस अधीक्षक को सूचित करने के बाद बिना वारंट तलाशी की गई।
मौके पर घेराबंदी कर संदिग्धों को रोका गया। मोहित कुमार शर्मा उर्फ मोहित भारद्वाज 26 वर्ष रायपारा सांई मंदिर रोड सुभाषनगर और माशुक खान उर्फ सम्मीउल्लाह खान 23 वर्ष बरडीह हालमुकाम गोधनपुर की धारा-50 एनडीपीएस एक्ट के तहत सहमति से तलाशी ली गई। मोटरसाइकिल हैंडल पर लटके झोले से बड़ी मात्रा में नशीला इंजेक्शन बरामद किया गया। वैध दस्तावेज नहीं दिखाए गए। मोटरसाइकिल भी जब्त की गई। क्षेत्रीय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला, अंबिकापुर ने सैंपल परीक्षण में ब्यूप्रेनॉर्फिन की पुष्टि की। विवेचना में सभी प्रक्रियाएं विधिसम्मत पाई गईं।
अदालत ने यह दिया फैसला
अदालत ने मोहित शर्मा और माशुक खान को एनडीपीएस एक्ट की धारा 22(सी) के तहत दोषी ठहराया। रविपाल अमुल कॉलोनी सुभाषनगर को धारा-29 षड्यंत्र के आरोप में बरी कर दिया, क्योंकि अभियोजन सबूत साबित करने में असफल रहा।दंडादेश में दोनों दोषियों को 12 वर्ष सश्रम कारावास, 1 लाख रुपये जुर्माना और जुर्माना न चुकाने पर 6 माह अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई गई। अभियुक्तों के वकील ने पहला अपराध होने का हवाला देकर न्यूनतम सजा की मांग की, जबकि विशेष लोक अभियोजक ने कड़ी सजा पर जोर दिया।
जज श्रीवास्तव ने फैसले में कहा कि ऐसे अपराध युवा पीढ़ी, परिवार और समाज को तबाह करते हैं। वाणिज्यिक मात्रा और अपराध की गंभीरता को देखते हुए यह सजा उचित है।




