अंबिकापुर के कुछ वसूलीबाज पत्रकारों ने निजी अस्पतालों को चारागाह बनाया..,20 बेड के दयानिधि अस्पताल को 9 बेड का होने दुष्प्रचार कर दी धमकी.. रूपये दो नहीं तो बदनाम कर दूंगा..! सीएमएचओ की जांच में सोशल मीडिया की खबर निकली झूठी..

अंबिकापुर के कुछ वसूलीबाज पत्रकारों ने निजी अस्पतालों को चारागाह बनाया..,20 बेड के दयानिधि अस्पताल को 9 बेड का होने दुष्प्रचार कर दी धमकी.. रूपये दो नहीं तो बदनाम कर दूंगा..! सीएमएचओ की जांच में सोशल मीडिया की खबर निकली झूठी..

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अंबिकापुर।।खबरी गुल्लक 

शहर के कुछ वसूलीबाज पत्रकार जिले के निजी अस्पतालों को चारागाह बना लिए हैं। मनगढंत आरोप कहा भ्रामक खबर प्रकाशित करते हुए अस्पताल प्रबंधनों की धमकी भी दी जा रही है यदि हमें पैसा नहीं दिया तो बदनाम करके रख देंगे,जिसका सीधा असर व्यवसाय पर पड़ेगा। कई निजी अस्पताल के संचालक इन वसूली बाजों की धमकी से भयभीत होकर अस्पताल की प्रतिष्ठा बचाने रूपये देने के लिए मजबूर होते हैं। इस तरह के मामलों में शिकायतों के बावजूद प्रशासन द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने से वसूलीबाज पत्रकारों का मनोबल बढ़ रहा है। ऐसे वसूलीबाज पत्रकारिता के पेशे को बदनाम भी रहे हैं। ऐसे पत्रकारों के खिलाफ न सिर्फ अपराध पंजीबद्ध होना चाहिए बल्कि कड़ी  से कड़ी सजा भी मिलनी चाहिए। 

बताया जा रहा है कि अम्बिकापुर के गंगापुर स्थित दयानिधि हॉस्पिटल के खिलाफ 9 बेड के लायसेंस में तीन साल में 6 करोड़ रुपये की कमाई का  दावा करते हुए प्रबंधन से एक कथाकथित पत्रकार के द्वारा रूपये की मांग की गई और इनकार करने पर यह भ्रामक खबर प्रकाशित कर दी गई। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ पीएस मार्को स्वास्थ्य टीम के माध्यम से  वास्तविक स्थिति की जानकारी ली तो पता चला कि दयानिधि अस्पताल के पास 9 बेड नहीं बल्कि 20 बेड का लायसेंस है। बीते तीन वर्षों में सर्वाधिक आपरेशन हुए।  जो टर्न ओवर बताया गया वह भी झूठा निकला। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पाया कि दयानिधि अस्पताल के खिलाफ प्रकाशित उक्त खबर भ्रामक और गलत थी। 

झूठी निकली खबरी - सीएमएचओ डॉ पीएस मार्को 

इस संबंध में सीएमएचओ डॉ पीएस मार्को ने कहा कि पोर्टल में प्रकाशित खबर में दयानिधि हॉस्पिटल में 9 बेड पर 3 साल में 6 करोड़ की कमाई खबर प्रकाशित की गई थी। जब दयानिधि हॉस्पिटल में इसकी जांच कराई गई तो पता चला दयानिधि हॉस्पिटल 9 नहीं बल्कि 20 बेड की है। 3 साल में टर्न ओवर 3 करोड़ के आसपास पाया गया।उन्होंने कहा कि 20 बेड के अस्पताल में 3 साल में 9 से 10 करोड़ रुपए का टर्नओवर सामान्य है। निजी अस्पताल की खर्च भी काफी अधिक होती है। 

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