अंबिकापुर। खबरी गुल्लक। 24 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में भूमि अधिग्रहण और सर्वे की कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें डीएसपी समेत दो दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए और इलाके में तनाव फैल गया। घटना सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड अंतर्गत मदननगर- धरमपुर इलाके की है, जहां शुक्रवार सुबह भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों ने भारी विरोध जताया। ग्रामीणों ने पुलिस टीम पर पथराव कर दिया, जिससे डीएसपी समेत आधा दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए। घायलों में महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं, जिनमें से कई को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
ग्रामीणों के पथराव और हमले के चलते पुलिस कर्मियों में भगदड़ मच गई और वे पीछे भाग खड़े हुए, जबकि ग्रामीण लाठी-डंडा से लैस होकर हमला करते रहे। इस हिंसक झड़प में प्रधान आरक्षक, महिला आरक्षक सहित कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। घटना के बाद इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और प्रशासन ने स्थिति पर कड़ी नजर बनाए रखी है। पूरे क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है और कई जिलों की पुलिस को मौके पर तैनात किया गया है। ग्रामीणों के विरोध के बीच कार्रवाई को रोक दिया गया है।
भूमि अधिग्रहण और सर्वे को लेकर इलाके में लंबे समय से विवाद बना हुआ है। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के लिए सर्वे दल गांव पहुंचा था, लेकिन ग्रामीणों ने खेती के समय बिना सहमति और पर्याप्त जानकारी के सर्वे कराने पर नाराजगी जताते हुए विरोध शुरू कर दिया था। सूरजपुर जिले में भूमि अधिग्रहण को लेकर यह पहली हिंसक घटना नहीं है। इससे पहले भी फरवरी 2026 में लटोरी तहसील के सुंदरगंज गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान पथराव की घटना हुई थी, जिसमें जेसीबी मशीन और पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त हो गए थे। दिसंबर 2025 में भी कोयला खदान विस्तार के विरोध में 30 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे, जब ग्रामीण SECL की अमेरका कोयला परियोजना के विस्तार का विरोध कर रहे थे। इन घटनाओं से क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर स्थानीय ग्रामीणों और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति स्पष्ट होती है। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती की है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि उनकी सहमति और पूरी जानकारी मिलने के बाद ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए। प्रशासन, SECL और ग्रामीणों के बीच बातचीत की संभावना भी जताई जा रही है।




