अंबिकापुर। खबरी गुल्लक
रघुनाथपुर के ग्राम सिलसिला के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि मां कुदरगढ़ी मिनरल्स फैक्ट्री द्वारा बॉक्साइट के भंडारण से गांव में एक बड़ा बांधनुमा ढांचा बन गया है, जिसके कारण बारिश का पानी खेतों में भर गया और खड़ी फसलें पूरी तरह डूब गईं। ग्रामीणों का कहना है कि इस स्थिति से उनकी कृषि भूमि बुरी तरह प्रभावित हुई है और आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
आवेदकगण ने उप तहसील रघुनाथपुर के नायब तहसीलदार को दिए आवेदन में मांग की है कि स्थल का तत्काल निरीक्षण कराया जाए, जलभराव की निकासी की व्यवस्था की जाए और फसल नुकसान का उचित मुआवजा दिलाया जाए। आवेदन में यह भी उल्लेख है कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो ग्रामवासी आंदोलन के लिए बाध्य हो सकते हैं, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और फैक्ट्री प्रबंधन पर होगी।
ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्री का मलबा या भंडारण सामग्री इस तरह जमा की गई है कि पानी का प्राकृतिक प्रवाह रुक गया है। इससे खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने की स्थिति बनी है, जिससे धान सहित अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। आवेदन में यह भी कहा गया है कि कई परिवारों के सामने भरण-पोषण का संकट उत्पन्न हो गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि केवल निरीक्षण ही नहीं, बल्कि मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच की जाए और प्रभावित किसानों को तत्काल राहत दी जाए। उनके अनुसार, जब तक पानी निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं होती, तब तक हर बारिश में यही समस्या दोहराई जा सकती है।
आवेदन में नायब तहसीलदार से अनुरोध किया गया है कि वे राजस्व अमले को भेजकर जमीन की स्थिति, जलभराव और फसल क्षति का सर्वे कराएं। साथ ही यह भी मांग की गई है कि संबंधित फैक्ट्री के कारण बने अवरोध को हटाकर खेतों से पानी निकासी सुनिश्चित की जाए। प्रतिलिपि पुलिस चौकी प्रभारी रघुनाथपुर को भी भेजी गई है, जिससे मामला प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर संज्ञान में आ सके। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन अब खेतों में पानी भरने से नुकसान गंभीर रूप ले चुका है।
ग्राम सिलसिला में मां कुदरगढ़ी एल्युमिना फैक्ट्री को लेकर ग्रामीण विरोध पहले भी सामने आ चुका है। वर्ष 2021 में भी ग्राम सभा के कथित फर्जी प्रस्ताव के आधार पर अनुमति दिए जाने का आरोप लगाते हुए फैक्ट्री संचालन निरस्त करने की मांग उठी थी। इससे यह संकेत मिलता है कि गांव और फैक्ट्री के बीच विवाद नया नहीं है और समय-समय पर अलग-अलग रूपों में सामने आता रहा है। इस तरह अब जलभराव और फसल नुकसान का मुद्दा ग्रामीणों की बड़ी चिंता बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो यह विवाद और गहरा सकता है तथा क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन सकती है।




