अंबिकापुर। खबरी गुल्लक।
संभाग मुख्यालय अंबिकापुर के प्रमुख व्यावसायिक मार्गों पर फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों पर व्यापारियों के कब्जे ने शहर की सड़क जीवन को बदहाल कर दिया है। ब्रह्म रोड, देवीगंज रोड, सदर रोड, स्कूल रोड, नवापारा मार्ग, मनेंद्रगढ़ रोड और बनारस रोड जैसे व्यस्त मार्गों पर दुकानदार अपने व्यापारिक सामान को फुटपाथ तक फैला रहे हैं, जिससे पैदल यात्रियों को चलने के लिए जगह नहीं मिल रही और वाहन चालक अनायास ही सड़क पर आकर खड़े हो जाते हैं। इससे रोज़मर्रा के यातायात में भीषण जाम के साथ दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
स्थानीय निवासियों और राहगीरों ने बताया कि दुकानदारों द्वारा फुटपाथों पर रखे गए स्टॉल, दुकानों की अस्थायी निर्माण सामग्री और व्यापारिक सामान ने पैदल मार्ग पूरी तरह बंद कर दिए हैं। खासकर सुबह और शाम के समय बाजारों में भारी भीड़ जमा हो जाती है, जिससे छोटे बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए आवाजाही मुश्किल हो गई है। कई बार पैदल यात्रियों को मजबूरन सड़क पर चलना पड़ता है, जहां से तेज रफ्तार वाहनों के चलते दुर्घटना की आशंका बनती है। दोपहिया और चारपहिया वाहन अनियोजित तरीके से सड़क पर पार्क कर दिए जाते हैं, जिससे आपातकालीन वाहन भी समय पर नहीं पहुंच पाते।
बंदोबस्त और प्रबंधन के अभाव में स्थानीय व्यापारिक गतिविधि और आवागमन दोनों प्रभावित हो रहे हैं। निगम के जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की लगातार उपेक्षा पर आम जनता का रोष बढ़ रहा है। स्थानीय पुलिस प्रशासन भी इस मामले में नाकाफी नजर आ रहा है — नागरिकों का आरोप है कि शिकायत के बाद भी धारा प्रवर्तन में निदानात्मक कार्रवाई नहीं की जा रही, और कहीं-कही कुछ समय के लिए हटाने के बाद फिर से कब्जा कर लिया जाता है।
नागरिक अब मांग कर रहे हैं कि स्थानीय निगम पार्षद और संबंधित अधिकारी मिलकर एक समयबद्ध कार्ययोजना जारी करें, जिसमें फुटपाथों की पुनर्जीवन, अवैध कब्जे हटाने, चिन्हित पर्किंग स्थानों का निर्माण और विक्रेताओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था शामिल हो।
पैदल चलने वाले लोगों के अधिकार का हो रहा हनन - आशु अग्रवाल
मानवाधिकार एसोशिएशन सरगुजा के अध्यक्ष आशु अग्रवाल ने कहा कि फुटपाथ सार्वजनिक संपत्ति है और इसका दुरुपयोग न केवल पैदल यात्रियों के अधिकारों का हनन है बल्कि यह जीवन-मरण से जुड़ी सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है। प्रशासन, निगम और पुलिस को मिलकर ठोस एवं दीर्घकालिक समाधान अपनाना होगा। अस्थायी दंडात्मक कार्रवाई के बजाय संरचित व्यवस्था, प्रवर्तन और विक्रेताओं के पुनर्वास पर काम किया जाना चाहिए। यदि तुरंत कदम नहीं उठाए गए तो बड़ा हादसा भी हो सकता है।




