ईसाई धर्म अपनाने के दबाव से युवक ने लगाई थी फांसी.. अदालत ने पत्नी,सास, ससुर,दो साली सहित 5 दोषियों को दी 5 - 5 वर्ष कारावास की सजा

ईसाई धर्म अपनाने के दबाव से युवक ने लगाई थी फांसी.. अदालत ने पत्नी,सास, ससुर,दो साली सहित 5 दोषियों को दी 5 - 5 वर्ष कारावास की सजा

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धमतरी।खबरी गुल्लक 

 ईसाई धर्म अपनाने के लिए दबाव बनाए जाने से परेशान होकर लिनेश साहू निवासी  द्वारा फांसी लगा आत्महत्या कर लिए जाने के मामले में अदालत ने मृतक की पत्नी करणा साहू 27 वर्ष,  ससुर राजकुमार साहू 54 वर्ष,  सास गौरी साहू 48 वर्ष,  साली किरण साहू 31 वर्ष व कनिष्का साहू 19 वर्ष सभी निवासी रायपुर को 5 - 5 वर्ष कारावास की सजा दी है। यह घटना ग्राम पोटियाडीह में 7 दिसंबर 2024 को हुई थी।  आत्महत्या करने से पहले  लिनेश साहू ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर  स्टेटस और मैसेज डाला था, जिसमें उसने उल्लेख किया था कि वह पत्नी और ससुराल पक्ष से परेशान है। मृतक ने आरोप लगाया था कि उसपर ईसाई धर्म अपनाने के लिए उसकी पत्नी सहित ससुराल पक्ष के द्वारा दबाव  डाला जा रहा है। इसके बाद पोटियाडीह में 7 दिसंबर 2024 को लिनेश साहू ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।

 मामले की विवेचना में जुटी पुलिस के द्वारा मृतक का मोबाइल जब्त कर जांच की,जिसमें आत्महत्या के कारणों का डिजिटल साक्ष्य एकत्रित करते हुए मृतक की पत्नी सहित ससुराल पक्ष के 5 लोगों को आरोपी बनाया था। आरोपों के घेरे में मृतक लिनेश साहू की 2 सालियां भी शामिल थीं। कोर्ट ने सभी पांच लोगों को पांच-पांच साल के कारावास और पांच-पांच सौ रुपए का अर्थदंड लगाया है। दरअसल, पूरा मामला 7 दिसंबर 2024 का है। लिनेश साहू ने पोटियाडीह स्थित अपने घर में जान दे दी थी। 

लोक अभियोजक गीतेश प्रजापति के ने मीडिया को बताया कि लिनेश साहू की शादी रायपुर निवासी करूणा साहू से हुई थी। जिससे उनका एक बच्चा भी हुआ। आरोप था कि संतान होने के बाद  पत्नी और ससुराल पक्ष के द्वारा लिनेश पर ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बनाते हुए प्रताड़ित किया जाने लगा,जिससे परेशान होकर लिनेश साहू ने आत्महत्या कर ली थी। मृतक की पत्नी सहित ससुराल पक्ष धर्मांतरित हो चुका था, वे ईसाई धर्म को मानते थे, जबकि लिनेश साहू हिंदू धर्म को मानता था। ससुराल वालों के द्वारा उसपर  ईसाई धर्म अपनाने दबाव बनाया जा रहा था। ससुराल वालों को यह उम्मीद थी कि संतान होने के बाद लिनेश साहू को ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, इसलिए संतान होने तक ससुराल वाले शांत रहे, इसके बाद धर्मपरिवर्तन के दबाव बनाया जाने लगा। 



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