सूरजपुर। खबरी गुल्लक।28अक्टूबर2026
टीईटी उत्तीर्ण शिक्षक कल्याण संघ छत्तीसगढ़ ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी सूरजपुर कार्यालय द्वारा शिक्षकों के गोपनीय प्रतिवेदन तैयार करने में की जा रही गंभीर अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। संघ ने आरोप लगाया है कि बीईओ द्वारा की जा रही मनमानी से शिक्षकों में भारी रोष व्याप्त है और वे मानसिक तनाव का सामना करने को विवश हैं। टेट उत्तीर्ण शिक्षक संघ द्वारा लगाए गए यह आरोप यदि सही हैं इससे प्रभावित केवल सुरजपुर जिला नहीं बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ राज्य के शिक्षक, लिपिक,भृत्य प्रभावित हो रहे हैं। संघ द्वारा ज्ञापन के साथ शासन का उक्त आदेश भी सौंपा गया है। संघ का कहना है कि विभाग के अधिकारी अभी तक शिक्षकों को अंधेरे में रखकर मनमानी करते रहे हैं,शोषण करते रहे हैं। मगर अब इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विकासखंड शिक्षा अधिकारियों के द्वारा इस तरह का कृत्य कर अपराध किया जा रहा है, जो ठगी और षड्यंत्र जैसे धाराओं के अंतर्गत आता है, संबंधितों के खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई होनी चाहिए।
संघ ने उठाया यह बिंदु
नियमानुसार शिक्षकों की गोपनीय चरित्रावली का प्रतिवेदक संस्था का प्रधान पाठक होता है, जबकि विकासखंड शिक्षा अधिकारी केवल समीक्षक की भूमिका में होते हैं। इसके विपरीत सूरजपुर बीईओ द्वारा शिक्षकों के प्रतिवेदन में खुद प्रतिवेदक बनकर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं और मनमाने ढंग से टिप्पणियां दर्ज की जा रही हैं, जो सीधे तौर पर नियमों के विरुद्ध है। विभागीय उदासीनता के कारण प्रायः गोपनीय प्रतिवेदन प्रतिवर्ष तैयार नहीं होते और पदोन्नति अथवा नियमितीकरण के समय ही बनाए जाते हैं। ऐसे में बीईओ द्वारा शिक्षकों पर यह दबाव बनाया जा रहा है कि वे पूर्व वर्षों के प्रतिवेदनों पर उस समय पदस्थ रहे तत्कालीन अधिकारियों से हस्ताक्षर करवाकर लाएं, जो शिक्षकों के लिए बेहद अव्यावहारिक और प्रताड़नापूर्ण है। संघ का दावा है कि यदि पूर्व वर्षों का प्रतिवेदन वर्तमान में तैयार किया जा रहा है, तो उस पर वर्तमान प्रतिवेदक एवं वर्तमान समीक्षक के हस्ताक्षर मान्य होने चाहिए। नियमों का पालन न कर शिक्षकों को बेवजह परेशान किया जा रहा है।
संघ की प्रमुख मांगें
बीईओ सूरजपुर की नियम विरुद्ध कार्यप्रणाली पर तत्काल संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाए। स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं कि गोपनीय प्रतिवेदन में केवल प्रधान पाठक को ही प्रतिवेदक माना जाए। पूर्व वर्षों के लंबित गोपनीय प्रतिवेदनों पर वर्तमान प्रतिवेदक एवं समीक्षक के हस्ताक्षर मान्य करने हेतु जिले के सभी विकासखंडों के लिए स्पष्ट गाइडलाइन जारी की जाए, ताकि शिक्षकों का मानसिक शोषण बंद हो सके। ज्ञापन की प्रतिलिपि कलेक्टर सूरजपुर को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई है।









