हत्या के प्रयास और ठगी के आरोपी शिक्षकों को जेल में रहने के बाद भी सिर्फ सस्पेंड, नियमानुसार बर्खास्तगी की होनी चाहिए थी कार्रवाई.. सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम गांधी ने उठाया गंभीर सवाल

हत्या के प्रयास और ठगी के आरोपी शिक्षकों को जेल में रहने के बाद भी सिर्फ सस्पेंड, नियमानुसार बर्खास्तगी की होनी चाहिए थी कार्रवाई.. सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम गांधी ने उठाया गंभीर सवाल

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अम्बिकापुर।खबरी गुल्लक 

सरगुजा जिले में आपराधिक मामलों में संलिप्त शासकीय शिक्षकों को निलंबित करने में देरी और उन्हें विभागीय कार्रवाई से बचाने का आरोप लगाते हुए सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम गांधी ने कलेक्टर, सरगुजा को लिखित शिकायत दी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि हत्या के प्रयास में दोषसिद्ध एक शिक्षक को सजा के बाद भी लगभग नौ माह तक सेवा से निलंबित नहीं किया गया, जबकि अन्य दो आरोपी शिक्षकों को जेल से जमानत मिलने के बाद ही निलंबित किया गया। शिकायत के अनुसार, शासकीय प्राथमिक शाला पेंडरखी, उदयपुर के प्रधान पाठक विजय कुमार यादव पर वर्ष 2019 में थाना मणिपुर में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज हुआ था। अपराध क्रमांक 499/2019 में न्यायालय ने 3 जनवरी 2026 को उन्हें पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। इसके बाद वे लगभग नौ माह जेल में रहे और अक्टूबर 2026 में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से जमानत पाने के बाद बाहर आए। आरोप है कि इतने लंबे समय तक जिला शिक्षा अधिकारी और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी स्तर पर इस बात का संज्ञान नहीं लिया गया कि एक शासकीय शिक्षक दोषसिद्धि के बाद जेल में बंद था। अंततः 22 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश क्रमांक 18338 के तहत उन्हें निलंबित किया गया, जबकि उन्हें बर्खास्त करने की कार्रवाई होनी चाहिए थी। 

शिकायतकर्ता ने मध्यप्रदेश सामान्य प्रशासन विभाग के वर्ष 1977 और 1980 के परिपत्रों का हवाला देते हुए कहा है कि न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि के बाद शासकीय सेवक के विरुद्ध संक्षिप्त जांच के तहत सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, अपील दायर होने के आधार पर भी अनुशासनिक कार्रवाई रोकी नहीं जा सकती।

शिकायत में कहा गया है कि विजय कुमार यादव के मामले में न तो 2019 में गिरफ्तारी की सूचना पर कार्रवाई हुई और न ही सजा के बाद तुरंत बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके विपरीत, उन्हें अपील और जमानत की प्रक्रिया पूरी होने तक विभागीय सुरक्षा दी गई, जिससे शासकीय धन की हानि हुई।

शिकायत में दो अन्य शिक्षकों का मामला भी उठाया गया है। शासकीय प्राथमिक शाला कटघोरिया पारा के प्रधान पाठक राजकुमार टोप्पो को अपराध क्रमांक 132/2026 में 20 जुलाई से 1 अक्टूबर तक कुल 73 दिन जेल में रहना पड़ा। वहीं, शासकीय प्राथमिक शाला जरहाड़ीह के सहायक शिक्षक (एल.बी.) त्रिपाल टोप्पो उसी मामले में 31 अगस्त से 6 अक्टूबर तक 37 दिन पुलिस अभिरक्षा में रहे। सवाल उठाया गया है कि जब दोनों शिक्षक महीनों तक कर्तव्य से अनुपस्थित रहे और जेल में बंद थे, तब ब्लॉक शिक्षा अधिकारी उदयपुर तथा जिला शिक्षा अधिकारी सरगुजा ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? आरोप है कि दोनों को जमानत मिलने के बाद ही निलंबित किया गया, जिससे विभागीय संरक्षण की आशंका पैदा होती है।

सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम गांधी ने कलेक्टर से मांग की है कि आपराधिक प्रवृत्ति वाले शिक्षकों को विभागीय संरक्षण देने और समय पर कार्रवाई न करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध जांच कराई जाए। साथ ही, शासकीय धन की संभावित हानि की वसूली और दोषी अधिकारियों पर अनुशासनिक कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायत के साथ तीनों शिक्षकों के निलंबन आदेश तथा सामान्य प्रशासन विभाग के संबंधित परिपत्रों की प्रतियां संलग्न की गई हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी शीघ्र और किस स्तर पर जांच का निर्देश देता है।


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