अंबिकापुर।खबरी गुल्लक।
शारदीय नवरात्रि व दशहरा के उपलक्ष्य में तुलसी साहित्य समिति द्वारा केशरवानी भवन में गीता मर्मज्ञ पं.रामनारायण शर्मा की अध्यक्षता में सरस-कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। पूर्व व्याख्याता सचिदानंद पांडेय कार्यक्रम के मुख्य अतिथि व वरिष्ठ कवि एसपी जायसवाल, आचार्य दिग्विजय सिंह तोमर, पं.चंद्रभूषण मिश्र, प्रताप पांडेय और राजभाषा आयोग के सरगुजा जिला समन्वयक राजेश तिवारी विशिष्ट अतिथि रहे। संचालन कवयित्री आशा पांडेय ने किया।
शुभारंभ मां वागीशा व मां भगवती के पूजन-अर्चन तथा महाकवि तुलसी, एसपी जायसवाल व बीडी लाल द्वारा विरचित विभिन्न रामायणों के आंशिक पाठ से हुआ। पं.रामनारायण शर्मा ने नवरात्रि के साथ विजयादशमी पर्व के विषय में भी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि असत्य पर सत्य व बुराइयों पर अच्छाइयों के विजय का प्रतीक है- दशहरा पर्व। मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम का अवतार दुष्टों के विनाश, संतों की रक्षा और धर्म की संस्थापना के लिए हुआ था। राम ने अंहकारी व आततायी लंकापति रावण का उसकी सेना सहित संहार किया। आज वही निशाचरी संस्कृति आतंकवाद के रूप में पूरी दुनिया को संत्रस्त कर रही है। हिंसा, हत्या, अन्याय, अधर्म, अत्याचार, लूटमार, बदले की भावना, धार्मिक अतिवाद, अराजकता आम हो चली है। कहीं भी शांति नहीं है। रूस-यूक्रेन, अमेरिका-ईरान, इजरायल-हमास के बीच युद्ध जारी है। ऐसी परिस्थिति में प्रभु रामजी के जीवन-आदर्शों को अपनाने की आवश्यकता है। रामत्व के वैश्विक प्रसार से ही शांति का सपना साकार होगा और जनता सुखी होगी। पं.सचिदानंद पांडेय ने श्रीराम को स्त्रियों के मान-सम्मान का रक्षक-समर्थक बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा स्त्रियों के साथ मर्यादित व्यवहार करने के उपदेश ही नहीं दिए बल्कि उसे अपने जीवन में भी अपनाया। जीवनसंगिनी सीता, माता कौशल्या, सुमित्रा, कैकेयी, शबरी, यहां तक की राक्षस कुल में जन्मी शूर्पनखा- सभी के प्रति प्रभु रामजी ने सदा ही आदर भाव व्यक्त किया, नारी को सृजन शक्ति के रूप में देखा। स्वयं मां आदिशक्ति की उपासना की। उनकी हर सीख स्त्रियों के लिए सुरक्षित परिवेश बनाती है। कार्यक्रम को पेंशनर्स समाज के जिलाध्यक्ष हरिशंकर सिंह, राजभाषा आयोग के समन्वयक राजेश तिवारी व कविवर एसपी जायसवाल ने भी संबोधित किया और सभी को नवरात्रि व दशहरा पर्व की शुभकामनाएं दीं।
कवि-सम्मेलन में संस्था के अध्यक्ष दोहाकार व शायर मुकुंदलाल साहू ने अपने दोहे में मन के रावण का विनाश करने का आह्वान किया- सभी मनाते दशहरा, है यह पावन रीत। मन का रावण मारिए, तो मानूंगा मीत। कवयित्री आशा पांडेय ने अपने दोहे में माता-पिता का मान रखने की प्रतिबद्धता जताई- शैलराज की लाड़ली, ऐसा देना ज्ञान। मात-पिता का रख सकूं, दुनिया में मैं मान। डॉ.पूनम दुबे 'वीणा' ने अंबे की अनुकंपा पाने की सहज उपाय सुझाए- उतारो सभी आरती, माता की खिले मुस्कान। ओढ़ाओ मां को चुनरी, पूरे करेगी अरमान। डॉ. माधुरी जायसवाल ने मां पार्वती से दर्शन देने का अनुरोध किया- खोल केवाड़ी दाई दर्शन दे-दे दाई, मैं जाहूं गोड़ ला धोए बर दाई मोर, ऐ महामाया दाई, मैं जाहूं गोड़ ला धोए बर। वरिष्ठ कवि बीडी लाल ने मां महामाया को अपने गीतों का हार समर्पित किया- यह गीत तुम्हारी पूजा का हार बने तो हरषाऊं, नैनों में तेरे सपनों के, मनुहार बने तो मुस्काऊं। जय गुप्त ने भवानी से विनय-निवदेन किया- चली आओ मैया तुम, हमारे मन के आंगन में, उतर आओ दिलों में भी, भावों के चिंतन में। गीतकवि कृष्णकांत पाठक ने मां गिरिजा को अंतर्यामी बताया- तू तो जाने मां दिल का हाल, तुझसे अब क्या कहना। तुझे देख हो जाऊं निहाल, तुझसे अब क्या कहना! कवयित्री आशा मिश्रा ने नवरात्र में जगन्माता के सभी स्वरूपों का वर्णन कर उनकी पूजाविधि को अपनी कविताओं में पिरोया। कवि रामलाल विश्वकर्मा ने मातृशक्ति की आराधना करते हुए कहा कि- गोद से उसकी निकलती विश्व की सब शक्तियां, वह प्रेम की प्रतिमूर्ति और दया की खान होती है, क्योंकि वह मां होती है। प्रताप पांडेय ने भी हर परिस्थिति में भी मां के सही होने का विश्वास जताया- वह मां है, कभी गलत नहीं हो सकती। बच्चों की परवरिश में कोई कमी सह नहीं सकती।
इनके अलावा कवि-सम्मेलन में आचार्य दिग्विजय सिंह तोमर की कविता- कंटक की कली हूं, मात-पिता का पता नहीं, एसपी जायसवाल की- जरा ध्यान रखना, ना दिल दुखाना किसी का, अम्बरीष कश्यप की- देखकर लहरों के मिजाजों को, रोकना पड़ता है जहाजों को, चंद्रभूषण मिश्र की- देखकर वो अपनी नजरें झुका लेते हैं, श्यामबिहारी पांडेय की रचना- जो कौम यहां सो जाती है, इतिहास दफन कर देता है, अजय सागर की- जैसे रंग लाती है मेहंदी खुद के पिस जाने के बाद, टांगेगी तस्वीर में माला, मेरे चल देने के बाद व विनोद तिवारी की हास्यपरक कविता को श्रोताओं ने सराहा और उनका भरपूर आनंद भी उठाया। धन्यवाद-ज्ञापन पेंशनर्स समाज के जिलाध्यक्ष हरिशंकर सिंह ने किया। इस दौरान लीला देवी, केके त्रिपाठी, विजयप्रसाद गुप्ता, प्रदीप सोनी, मनीलाल गुप्ता, आरके सिंह, नीलिमा जायसवाल, ईश्वर, प्रमोद सहित बड़ी संख्या में काव्यप्रेमी मौजूद रहे।




