अंबिकापुर ।खबरी गुल्लक।
एचआईवी एड्स नियंत्रण में सरगुजा ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए सुरक्षित श्रेणी में पहुंचकर छत्तीसगढ़ प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। भारत सरकार के मिशन एड्स सुरक्षा अभियान में सरगुजा की उल्लेखनीय प्रगति, अब सुरक्षित प्लस श्रेणी प्राप्त करना अगला लक्ष्य है।
भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) द्वारा संचालित राष्ट्रीय एड्स एवं यौन संचारित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सरगुजा जिले ने एचआईवी/एड्स की रोकथाम, संक्रमित व्यक्तियों की शीघ्र पहचान, नियमित उपचार एवं संक्रमण नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मिशन एड्स सुरक्षा के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्यों की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए सरगुजा जिले ने सुरक्षित श्रेणी में स्थान प्राप्त किया है एड्स नियंत्रण संगठन के वर्गीकरण के अनुसार सरगुजा जिला एचआईवी संक्रमण के मध्यम प्रसार वाले जिलों की श्रेणी में बिलासपुर के साथ शामिल है।सरगुजा जिले ने कलेक्टर अजीत बसंत के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर छत्तीसगढ़ राज्य का प्रथम जिला बनने का गौरव प्राप्त किया है।
भारत सरकार ने एचआईवी संक्रमण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से 1 दिसंबर 2027 तक देश में एचआईवी महामारी पर प्रभावी नियंत्रण तथा वर्ष 2030 तक एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य के खतरे के रूप में समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस अभियान के अंतर्गत देश के 18 राज्यों के 219 उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। जिला स्तर पर योजनाबद्ध जांच, उपचार, जनजागरूकता एवं विभिन्न विभागों के समन्वय को इस अभियान की सफलता का प्रमुख आधार बनाया गया है।
मिशन एड्स सुरक्षा के तहत जिलों की उपलब्धियों का मूल्यांकन संघर्षशील, सक्षम, सुरक्षित एवं सुरक्षित प्लस जैसी श्रेणियों में किया जाता है। तीन प्रमुख लक्ष्यों के अंतर्गत अधिकाधिक एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की पहचान, संक्रमित व्यक्तियों को नियमित एंटीरेट्रोवायरल उपचार उपलब्ध कराना तथा उपचाररत मरीजों में वायरल लोड को नियंत्रित करना शामिल है। सुरक्षित प्लस श्रेणी के लिए इन उपलब्धियों को और मजबूत करते हुए माता से शिशु में संक्रमण की रोकथाम एवं अन्य निर्धारित मानकों को प्राप्त करने पर विशेष बल दिया जाता है। सरगुजा जिले में अब तक 824 एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की पहचान की गई है, जिनमें 801 मरीजों का एंटीरेट्रोवायरल उपचार प्रारंभ किया गया है तथा 99 प्रतिशत से ज्यादा वायरल लोड सप्रेशन दर्ज किया गया है। जिला प्रशासन के नेतृत्व, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के मार्गदर्शन तथा जिला एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी के निर्देशन में दिशा टीम, एकीकृत परामर्श एवं जांच केंद्र, एआरटी केंद्र, प्रयोगशाला सेवाओं तथा राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम से जुड़े सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों से यह उपलब्धि संभव हुई है। स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा नियमित परामर्श, उपचार की निरंतरता, मरीजों की निगरानी एवं समुदाय में जागरूकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि एचआईवी संक्रमण की पहचान होना जीवन का अंत नहीं है। समय पर जांच, नियमित उपचार और चिकित्सकीय परामर्श से एचआईवी संक्रमित व्यक्ति लंबा एवं स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। प्रभावी उपचार से वायरल लोड नियंत्रित होने पर व्यक्ति के स्वास्थ्य में सुधार होता है और संक्रमण के आगे फैलने का खतरा भी कम होता है। इसलिए प्रत्येक संक्रमित व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के जांच, परामर्श एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध कराना कार्यक्रम की प्रमुख प्राथमिकता है।
संक्रमितों की गोपनीयता और सम्मान जरूरी: अजीत वसंत कलेक्टर
इस अवसर पर कलेक्टर अजीत बसंत ने कहा आगामी दिनों में अधिकाधिक जोखिमग्रस्त व्यक्तियों की स्वैच्छिक जांच, गर्भवती महिलाओं की एचआईवी जांच, संक्रमित गर्भवती महिलाओं का समय पर उपचार, माता से शिशु में संक्रमण की रोकथाम, नियमित वायरल लोड परीक्षण तथा उपचार से छूटे मरीजों को पुनः चिकित्सा सेवाओं से जोड़ने के प्रयासों को और सुदृढ़ किया जाएगा। इसके साथ ही एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों के प्रति सामाजिक भेदभाव समाप्त करने और गोपनीयता एवं सम्मान के साथ उपचार उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
जिला एड्स कन्ट्रोल सोसायटी सरगुजा के प्रभारी डॉ शैलेंद्र गुप्ता ने जानकारी दी कि सरगुजा का अगला संकल्प सुरक्षित से सुरक्षित प्लस की ओर बढ़ना है, ताकि प्रत्येक संक्रमित व्यक्ति को समय पर उपचार मिले, हर नवजात को संक्रमण से बचाया जा सके और आने वाली पीढ़ियों को एचआईवी एड्स के खतरे से सुरक्षित रखा जा सके।




