मरीजाें की जान से खिलवाड़: अम्बिकापुर के महावीर अस्पताल के ICU में फर्जी डिग्री से दो साल तक मरीजों का इलाज कर रहा था डॉ. नुरूल आलम.. स्वास्थ्य विभाग की जांच में खुला खेल, FIR के निर्देश, लैब टेक्नीशियन सुमन की सेवा भी संदिग्ध

मरीजाें की जान से खिलवाड़: अम्बिकापुर के महावीर अस्पताल के ICU में फर्जी डिग्री से दो साल तक मरीजों का इलाज कर रहा था डॉ. नुरूल आलम.. स्वास्थ्य विभाग की जांच में खुला खेल, FIR के निर्देश, लैब टेक्नीशियन सुमन की सेवा भी संदिग्ध

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अम्बिकापुर। खबरी गुल्लक 

छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर स्थित श्री महावीर अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की औचक जांच के दौरान एक गंभीर मामला सामने आया है। जांच टीम ने आरोप लगाया है कि अस्पताल के आईसीयू में पिछले लगभग दो वर्षों से सेवा दे रहे डॉ. नुरूल आलम की मेडिकल डिग्री फर्जी पाई गई। इसी निरीक्षण में लैब टेक्नीशियन सुमन राजवाड़े भी बिना वैध दस्तावेज के कार्यरत पाए गए। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी किया है और फर्जी डिग्री के आरोपी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के आदेश के पालन में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी  तथा नोडल नर्सिंग होम एक्ट की संयुक्त टीम ने  महावीर अस्पताल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान टीम ने अस्पताल में तैनात स्टाफ की योग्यता, डिग्री और अन्य दस्तावेजों का सत्यापन किया। जांच के क्रम में जब आईसीयू में कार्यरत डॉ. नुरूल आलम से उनकी डिग्री संबंधी जानकारी मांगी गई, तो प्रस्तुत दस्तावेजों के सत्यापन में डिग्री फर्जी पाई गई। टीम के अनुसार, वे पिछले लगभग दो वर्षों से अस्पताल के आईसीयू में सेवाएं दे रहे थे।

 आईसीयू में सेवा दे रहे थे फर्जी डिग्रीधारी

आईसीयू अस्पताल का सबसे संवेदनशील हिस्सा माना जाता है, जहां गंभीर रूप से बीमार मरीजों का इलाज होता है। ऐसे वार्ड में चिकित्सक की योग्यता, अनुभव और पंजीयन का होना अनिवार्य माना जाता है। यदि बिना वैध योग्यता वाला व्यक्ति वहां निर्णय लेता है या उपचार में शामिल रहता है, तो मरीज की जान को सीधा खतरा हो सकता है। इसी कारण स्वास्थ्य विभाग ने मामले को सामान्य नियम उल्लंघन से अधिक गंभीर माना है। विभाग का कहना है कि आईसीयू जैसी संवेदनशील जगह पर फर्जी डिग्री वाले व्यक्ति को पदस्थ रखना और उससे सेवाएं लेना अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी के क्षेत्र में आता है।

 अस्पताल को नोटिस, डॉक्टर के खिलाफ FIR के निर्देश

जांच रिपोर्ट के बाद विभाग ने श्री महावीर अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अस्पताल प्रबंधन से पूछा जाएगा कि उसने डॉ. नुरूल आलम की नियुक्ति से पहले उनकी डिग्री, पंजीयन और योग्यता का सत्यापन क्यों नहीं किया। साथ ही, दो वर्षों तक ऐसे व्यक्ति को आईसीयू में सेवा देने की अनुमति कैसे दी गई, इसका जवाब भी मांगा जाएगा। फर्जी डिग्री के आरोपी डॉ. नुरूल आलम के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। विभाग का मानना है कि यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य और जीवन से खिलाफ खेलने वाला गंभीर आपराधिक मामला है।

 लैब टेक्नीशियन पर भी चौंकाने वाला खुलासा

इसी निरीक्षण के दौरान एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। अस्पताल में मेडिकल लैब टेक्नीशियन के रूप में कार्यरत सुमन राजवाड़े भी बिना किसी वैध दस्तावेज के कार्य करते पाए गए। लैब टेक्नीशियन का काम रक्त जांच, नमूना संग्रह और रिपोर्ट तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों से जुड़ा होता है। बिना प्रशिक्षण या वैध योग्यता के यह काम करना भी मरीजों के लिए जोखिम भरा माना जाता है। विभाग ने सुमन राजवाड़े के विरुद्ध वैधानिक तथा विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसका अर्थ है कि उनके खिलाफ कानूनी कदम के साथ-साथ अस्पताल से जुड़ी सेवा पर रोक या अन्य विभागीय कार्रवाई भी संभव है।

 पूर्व में भी लगा था आरोप

यह मामला तब सामने आया है जब श्री महावीर अस्पताल पहले ही नर्सिंग होम एक्ट के उल्लंघन के आरोपों में घिरा था। अक्टूबर 2026 में जिला प्रशासन ने इलाज में कथित लापरवाही और आयुष्मान योजना से जुड़ी अनियमितता की जांच के बाद अस्पताल का लाइसेंस एक महीने के लिए निलंबित किया था। जांच में यह भी पाया गया था कि न्यूरो सर्जरी करने वाले चिकित्सक का नाम अस्पताल के पंजीयन दस्तावेजों में दर्ज नहीं था और आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद परिजनों से 87,300 रुपये वसूले जाने का आरोप था।इस संदर्भ में नया खुलासा और अधिक गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि अब सवाल केवल इलाज की प्रक्रिया या बिलिंग पर नहीं, बल्कि अस्पताल में कार्यरत कर्मियों की वास्तविक योग्यता पर उठ रहा है।

 नियुक्ति से पहले दस्तावेजों का सत्यापन जरूरी

स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश है कि निजी अस्पतालों में डॉक्टर, नर्स और तकनीशियन की नियुक्ति से पहले उनके दस्तावेजों का पूर्ण सत्यापन आवश्यक है। राष्ट्रीय मेडिकल आयोग की इंडियन मेडिकल रजिस्ट्री के माध्यम से डॉक्टरों के नाम, योग्यता, पंजीयन संख्या और पंजीयन वर्ष की जानकारी सार्वजनिक रूप से जांची जा सकती है। अब आगे की कार्रवाई में अस्पताल प्रबंधन का जवाब, डॉ. नुरूल आलम के खिलाफ FIR और सुमन राजवाड़े के विरुद्ध कानूनी-विभागीय कदम शामिल होंगे। यदि आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला अम्बिकापुर के निजी स्वास्थ्य क्षेत्र में योग्यता सत्यापन और नियमों के पालन को लेकर अब तक की पहली बड़ी कार्रवाई होगी।



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