अंबिकापुर। भोजन के लिए जंगली कंद मूल और इलाज के लिए जड़ी बूटी, झाड़ फूंक के अंधविश्वास पर टिकी विशेष पिछड़ी जनजाति पण्डो और पहाड़ी कोरवा परिवारों के दिन अब फिरने वाले हैं, यह बदलाव प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर हो रही है। आजादी के बाद से आज तक जनजातियों के उत्थान के लिए बनाई गई विभिन्न शासकीय योजनाएं कतिपय अधिकारियों के लिए दुधारू गाय की तरह रहीं। कागजों पर पानी की तरह पैसा बहाया गया मगर इन जनजातीय परिवारों की दशा सुधारने के बजाय और दयनीय होती चली गई। कुछ वर्षों पूर्व पण्डो जनजाति के एक दर्जन से अधिक लोगों के बीमारी, कुपोषण और रक्त की कमी से हुए मौत के पीछे अशिक्षा और जागरूकता की कमी को प्रमुख कारण माना गया था। मौजूदा समय में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर इन विशेष संरक्षित और पिछड़े जनजातियों के लिए विशेष रूप से शासकीय नौकरी के लिए द्वार खोलना किसी संजीवनी से कम नहीं है। सीएम के निर्देश और सरगुजा कलेक्टर कुंदन कुमार के निरंतर मानिटरिंग से जिले के 103 विशेष पिछड़ी जनजाति के युवाओं को सहायक शिक्षक के पद पर नौकरी के साथ नियुक्ति पत्र भी प्रदान किया गया।
और झलक पड़े खुशी के आंसू ...
हाल ही में सरगुजा प्रवास पर पहुंचे प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा विशेष संरक्षित परिवारों के युवाओं को विभिन्न पदों पर नियुक्ति प्रमाण पत्र प्रदान किया गया था। कार्यक्रम में ही सीएम के हाथों नियुक्ति पत्र मिलते ही युवाओं के खुशी के आंसू झलक पड़े। प्रगति पण्डो को सहायक शिक्षक की नौकरी मिली , इसी प्रकार आकाश पण्डो, सुचिता पण्डो सहित अन्य पण्डो युवाओं को विभिन्न पदों पर नौकरी मिली। इन युवाओं का कहना है कि उन्हें उम्मीद नही थी कि कभी शासकीय नौकरी मिल पाएगी,.. मगर उनका यह सपना सीएम भूपेश बघेल की पहल से साकार हो गया......!
यह बदलाव की शुरुआत होगी ...
बताया जा रहा है कि पण्डो और पहाड़ी कोरवा परिवारों में अभी भी अशिक्षा है और जागरूकता के अभाव में उनकी जीवन शैली पहाड़ों और कंद मूल से बाहर नही निकल रही है। बीमार पड़ने पर अस्पताल जाने के बजाय झाड़ फूंक पर विश्वास जताते हैं। मगर इन परिवारों के युवाओं को रोजगार मिलने से यह उम्मीद जताया जा रहा है कि सरकार के इस पहल से उनकी न सिर्फ दशा सुधरेगी बल्कि आत्म विश्वास बढ़ने के साथ इनमें शिक्षा और जागरूकता भी आएगी..!





