ग्रामीणों ने जान बचाने बाल बच्चों के साथ रात में घर छोड़ा, सुबह वापस लौटे तो बस्ती का मंजर देख रह गए दंग..! जंगली हाथियों ने गरीब पहाड़ी कोरवा परिवार की झोपड़ी को किया तहस नहस.... ! तस्वीर में दिख रहा टूटे दीवार से बाहर झांकते मासूम की आंखों में बेबसी और ढेरों सवाल ....?

ग्रामीणों ने जान बचाने बाल बच्चों के साथ रात में घर छोड़ा, सुबह वापस लौटे तो बस्ती का मंजर देख रह गए दंग..! जंगली हाथियों ने गरीब पहाड़ी कोरवा परिवार की झोपड़ी को किया तहस नहस.... ! तस्वीर में दिख रहा टूटे दीवार से बाहर झांकते मासूम की आंखों में बेबसी और ढेरों सवाल ....?

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मैनपाट (महेश यादव)। वन परिक्षेत्र के हाथी प्रभावित इलाकों में ग्रामीण जान बचाने रात के समय बाल बच्चों, परिवार के साथ घर छोड़ सुरक्षित स्थान पर दूसरी जगह जा रहे हैं और सुबह वापस लौट रहे हैं तो बस्ती का मंजर देख उनका कलेजा फट रहा है। घर , झोपड़ी पर हाथियों का कहर ऐसे टूट रहा है मानो रात के समय गांव में भूकंप के समान कोई भारी प्राकृतिक आपदा आई हो....... यह तस्वीर मैनपाट के ग्राम बरवावली की है, जिसमें नजर आ रहा है कि गरीब पहाड़ी कोरवा राजू की झोपड़ी हाथियों के कहर के बाद अब रहने लायक नही है। इस तस्वीर में एक पांच साल का मासूम टूटी दीवार से बाहर झांकता नजर आ रहा है.... उसकी आंखों में भगवान से ढेरों सवाल हैं..!, उसकी मासूम आंखों में बेबसी भी साफ झलक रही है, मानो वह भी कुदरत से पूछ रहा हो अब हम कहां जायेंगे...। यह कहानी मैनपाट क्षेत्र के किसी एक परिवार की नही है, बल्कि हर रोज किसी न किसी परिवार में हाथियों का यह कहर टूट रहा है। बताया जा रहा है कि वर्तमान समय में मैनपाट और रायगढ़ सरहद में हाथियों दल मंडरा रहा है। जिससे वन विभाग का अमला भी रेंजर फेंकू चौबे के नेतृत्व में सक्रिय है और ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है। इधर ग्राम बरवावली के ग्रामीणों को शाम होते ही सुरक्षा के लिए बरडांड के आंगनबाड़ी भवन में शरण दिया जा रहा है, इस भवन में रात बिताने के बाद ग्रामीण वापस अपने घरों में लौटते हैं, दैनिक कार्य, दिन व रात का भोजन करने के बाद शाम को फिर गांव छोड़ देते हैं। इसी प्रकार राजू पहाड़ी कोरवा भी परिवार के साथ रात में आंबा भवन में था, सुबह वापस लौटा तो झोपड़ी को खंडहर में तब्दील पाया, बताया जा रहा है कि यह झोपड़ी अब रहने लायक नही बची है। झोपड़ी टूटने से बारिश के मौसम में पहाड़ी कोरवा परिवार की परेशानी बढ़ गई है कि बाल बच्चों के साथ उनके परिवार का अब क्या होगा , कहां जायेंगे.... रात में तो आंबा भवन में शरण मिल जाता है... दिन में कहां जायेंगे, यदि मूसलाधार बारिश हो गई तो कौन उन्हे शरण देगा....!

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