अंबिकापुर। रक्त की जरूरत चाहे जिसे भी हो यदि आसपास मौजूद हैं तो खुद को रोक नहीं पाते हैं... " इमरान "! यह नाम शहर के लिए नया नही है... अब तक 42 जरूरतमंदों की रक्त दान से प्राण बचा चुके इमरान सिद्धिकी (बंटी) सामाजिक गतिविधियों, समाज सेवा में भी सदैव आगे रहते हैं, उनकी सेवा भाव हमेशा दूसरों को भी प्रेरित करती हैं। आम तौर पर चिकित्सकों के द्वारा एक बार रक्त देने के तीन महीने बाद ही फिर किसी को रक्त दान की सलाह दी जाती है मगर इमरान के जीवन में कई बार ऐसे मोड़ आए जब उन्हें तीन माह के भीतर ही रक्त दान करना पड़ा हो। शहर के एक निजी अस्पताल में बलरामपुर जिले से पहुंचे एक अनजान मरीज को आज बुधवार को रक्त दान करने के बाद उन्होंने कहा कि रक्त दान को महादान माना जाता है। इससे न सिर्फ मन को सुकून मिलती है बल्कि किसी की प्राण की भी रक्षा होती है। कई बार लोग बल्ड डायरेक्टरी के नंबर देख उन्हे फोन करते हैं तो कभी किसी पहचान वाले के माध्यम से यह सेवा करने का अवसर मिलता है। उन्होंने बताया कि वे अभी तक जिला अस्पताल अंबिकापुर के अलावा बलरामपुर, सूरजपुर , मनेंद्रगढ़ में भी रक्त दान के लिए जा चुके हैं। Ab+ ग्रुप का उनका रक्त समूह है। उन्होंने युवाओं से आह्वान कर कहा है कि इस पुनीत कार्य में बढ़ चढ़ कर हिस्सा जरूर लें...,!




