अंबिकापुर। सरगुजा जिले में पहली बार पशु चिकित्सकों ने घूमरी गीड से पीड़ित एक साल के बकरे का ब्रेन सर्जरी कर जान बचाने में सफलता पाई। बकरा इस बीमारी की वजह से पिछले एक सप्ताह से सिर को एक तरफ घुमने , सिर को दिवाल या गाडी से टकराने, रात भर खड़े रहने के साथ चिल्लाता था। पशु पालक ग्राम चठीरमा निवासी चिरंजी राजवाड़े के द्वारा इसकी सुचना डॉक्टर सफदर अली खान पशु चिकित्सक, पशु चिकित्सालय लखनपुर को दिया गया। डॉ. खान के द्वारा जाँच मे पाया कि बकरा के ब्रेन में परजीवी के लार्वा सिस्ट हो सकता है तथा पशुपालक को समझाया कि यदि सर्जरी नही किया गया तो लार्वा सिस्ट के फुटने से बकरा मर सकता है। पशुपालक सर्जरी के लिए राजी हो गया फिर डॉ. खान के द्वारा बकरा को बेहोश कर करेनियोटामी सर्जरी कर ब्रेन से लार्वा सिस्ट को निकाला गया। बकरा सर्जरी के बाद सामान्य रुप से चलने लगा। डॉ. खान ने बताया कि यह एक परजीवी बिमारी, जिसका वैज्ञानिक नाम - टिनिया मल्टीसेप्स तथा इसके लार्वा को सेनुरस सेरेब्रलिस नाम से जाना जाता है, जो कुत्ते के मल के माध्यम से परजीवी का अंडा बकरी जाति के शरीर से होते हुए ब्रेन में पहुँच जाता है। डॉ. खान ने यह भी बताया कि यह एक जुनोटिक बिमारी है जो कुत्ते के मल के माध्यम से टिनिया मल्टीसेप्स परजीवी का अंडा मनुष्य के शरीर से होते हुए ब्रेन मे पहुँच सकता है।
कम दाम में बेचने के बजाए इलाज कराएं
डॉ खान ने पशुपालकों से अपील किया है कि पशुपालक अपने पशु (बकरी तथा कुत्ते प्रजाति) को प्रत्येक 4 माह में पेट के कीड़े की दवा आवश्य पिलायें तथा पशुपालक बिमारी होने पर इसका इलाज करवाये न कि कम दामों में बकरे को बेचे ।




