आईसीएमआर लैब पुणे ने की इन दस राज्यों के चमगादड़ों में निपाह वायरस एंटी बॉडी मिलने की पुष्टि... सिरो सर्वे में चला पता, देखें इन राज्यों तक पहुंचा यह वायरस.....
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जुलाई 29, 2023
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नई दिल्ली। निपाह वायरस का संक्रमण देश के दक्षिण से अब उत्तर, पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंच रहा है। भारतीय वैज्ञानिक दक्षिणी राज्यों को निपाह वायरस का चेन मानते हैं। सौरो सर्वे में पता चला है कि वायरस दूसरे राज्य तक पहुंच रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद आईसीएमआर के पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (ए) के वैज्ञानिकों ने पिछले तीन साल में दूसरी बार निपाह वायरस को लेकर राष्ट्रीय सौरो सर्वे पूरा किया है, जिसमें बताया गया है कि 10 राज्यों के चमगादड़ों में वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी मिली है इनमें दो केंद्र शासित राज्य भी शामिल हैं । रिपोर्ट के अनुसार जिन नए राज्यों की चमगादड़ों में एंटीबॉडी मिले हैं उनमें गोवा, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और मेघालय शामिल है। केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और पुडुचेरी में पहले भी एंटीबॉडी मिली हैं।
एनआइवी के वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि इसी साल 14 राज्य और दो केंद्र शासित प्रदेशों में भी सर्वे किया गया मगर इन राज्यों में यह वायरस नही मिला। जिसमें तेलंगाना, गुजरात पंजाब, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा और चंडीगढ़ शामिल है, जहाँ के नमूनों में निपाह वायरस की मौजूदगी का पता नहीं चला है।
वैज्ञानिकों के अनुसार सर्वे के आधार पर जिन राज्यों में एंटीबॉडी पाए गए है के स्थानीय प्रशासन स्वास्थ्य विभाग और राज्य सरकार से प्रसार की रोकथाम को लेकर तौर तरीके बताए जाते हैं ताकि कोई भी संदिग्ध मामला सामने आता है तो तत्काल क्वारेंटिन सहित अन्य व्यवस्था की जा सके। बताया गया है कि निपाह के तीन मामले लगातार वर्षों में केरल में सामने आए हैं, यह एक प्रकार से संकेत भी हो सकते है, जिसे लेकर किसी चुनौती से बचने पहल हो सके। इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर चमगादड़ों के नमूने लेकर सीरो सर्वे किया गया। इससे पीड़ित मरीज के शरीर में किस तरह के लक्षण दिखाई देते हैं, इस खबर में हम आपको इसी बारे में बता रहे हैं। निपाह वायरस (NiV) मुख्य रूप से जानवरों में पाया जाता है, और उनके जरिए ही इंसानों में फैलता है। इस वायरस को खत्म करने के लिए फिलहाल किसी तरह का कोई टीका (वैक्सीन) या अन्य दवाई नहीं बनी है। ऐसे में इससे पीड़ित मरीजों का बेहद सुरक्षित तरीके से ध्यान रखते हुए उनका इलाज किया जाता है।
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