वन विभाग का मैदानी अमला न हाथियों की निगरानी कर रहा है और न ही ग्रामीणों को सतर्क... हाथी अचानक बस्ती में घुस मचा रहे हैं उत्पात.... रामपुर में हाथी द्वारा घर ढहाए जाने से सो रहे ग्रामीण की मलबे में दब मौत...... चार खप्पर पोश मकान हुए जमींदोज....

वन विभाग का मैदानी अमला न हाथियों की निगरानी कर रहा है और न ही ग्रामीणों को सतर्क... हाथी अचानक बस्ती में घुस मचा रहे हैं उत्पात.... रामपुर में हाथी द्वारा घर ढहाए जाने से सो रहे ग्रामीण की मलबे में दब मौत...... चार खप्पर पोश मकान हुए जमींदोज....

khabrigullak.com
By -
0
बलरामपुर (ब्यूरो)। वन परिक्षेत्र रामानुजगंज में विचरण कर रहे हाथियों की निगरानी करने में वन विभाग के द्वारा बरती जा रही लापरवाही के कारण जन हानि की घटनाएं लगातार हो रही हैं। हाथी दिन के समय जंगल में विचरण करने के बाद रात में बस्ती की ओर रुख करते हैं। वन कर्मियों द्वारा न तो हाथियों की निगरानी की जा रही है और न ही समय ग्रामीणों को सचेत किया जा रहा है। यही लापरवाही क्षेत्र में एक और का कारण बनी। हालांकि वन अधिकारियों का कहना है कि बारिश के मौसम में रात के समय हाथी नजर नहीं आते हैं। मैदानी अमला दिन के समय हाथियों की निगरानी में कोताही नहीं बरत रहे हैं। बताया जा रहा है कि रामानुजगंज वन परिक्षेत्र में विचरण जंगली हाथी ने सोमवार की रात ग्राम पंचायत कनकपुर के आश्रित ग्राम रामपुर में चार खापोरपोश मकानों को ढहा जमकर उत्पात मचाया। हाथी द्वारा एक घर का दीवार गिराए जाने के दौरान घर में सो रहे ग्रामीण की मलबे में दब मौत हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम रामपुर में देर रात पहुंचे एक जंगली हाथी ने कच्चे घरों को ढहाना शुरू कर दिया। इस वक्त हाथी ने यह कहर बरपाया उस दौरान ग्रामीण सो रहे थे। एक घर में ईश्वर सिंह पत्नी के साथ दीवार से सटाकर खाट लगा सोया था, तभी हाथी ने इस घर के दीवार को ढहा दिया, जिससे ईश्वर मलबे की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि उसकी पत्नी आहट मिलने पर फौरन वहां से हट गई, जिससे वह बाल बाल बची। इधर हाथी ने ननकु, संजय और रामगति के कच्चे घरों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। हाथी ने घरों को क्षतिग्रस्त करने के बाद घर में रखे अनाजों को निवाला बनाया। हाथी ने रात भर गांव में उत्पात मचाया और सुबह गांव से लगे जंगल की ओर चला गया। हाथी के गांव से जाने के बाद ग्रामीणों ने घायल ग्रामीण ईश्वर सिंह को रामानुजगंज अस्पताल में भर्ती कराया जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। बारिश के मौसम में आशियाना उजड़ने से गरीब परिवारों की दिक्कत बढ़ गई है। इधर समय पर पहल करने के बजाए हर बार की भांति इस बार भी ग्रामीण की मौत होने के बाद तात्कालिक सहायता राशि देने वन अधिकारी अस्पताल पहुंचे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कि वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी न तो हाथी की निगरानी कर रहे हैं और न ही ग्रामीणों को सतर्क कर रहे हैं। वन विभाग की यही लापरवाही ईश्वर सिंह की मौत की वजह बनी। ग्रामीणों ने कहा कि यदि वन विभाग के द्वारा हाथी के बस्ती की ओर आने से पहले ग्रामीणों को सतर्क किया जाता तो संभवतः उसकी जान बच जाती।

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)