सरगुजा संभाग में भूकम्प की पुनरावृत्ति ने बढ़ाई चिंता ..... बार बार आ रहा झटका किसी बड़ी अनहोनी का संकेत तो नही..... भूगर्भ वैज्ञानिकों का शोध भी है जरुरी....

सरगुजा संभाग में भूकम्प की पुनरावृत्ति ने बढ़ाई चिंता ..... बार बार आ रहा झटका किसी बड़ी अनहोनी का संकेत तो नही..... भूगर्भ वैज्ञानिकों का शोध भी है जरुरी....

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अंबिकापुर। सोमवार 28 अगस्त की शाम को पूरे सरगुजा अंचल के लोग भूकंप की 22 मिनट के अन्तराल में आये दो घटना के कारण विस्मित और दहशत से भरे हुए देखे गए। दूसरी घटना के प्रभाव से करीब 20 सेकेंड के भीतर पुनः लोगों ने हल्का कंपन महसूस किया था। देर रात तक लोगों के घरों से बाहर होने और एक दूसरे से जानकारी प्राप्त करते देखे गए। समाज के कुछ बेपरवाह तत्वों ने इसी बीच व्हाट्सएप पर कुछ पोस्ट वायरल कर दिया कि रात को 9.30 फिर से भूकम्प आएगा तो कुछ ने देर रात एक बजे इसकी पुनरावृत्ति की अफवाह फैला दी। इससे जनमानस में पनपा भूकम्प का ख़ौफ़ और बढ़ गया था। कुछ जगह यह इसकी तीव्रता और एपिसेंटर को ले कर भी विरोधाभास रहा। 28 अगस्त की शाम आठ बजे कर चार मिनट पर अम्बिकापुर के शहरी क्षेत्र में दो से तीन सेकेंड तक एक तेज गड़गड़ाहट के साथ धरती के कम्पन की घटना हुई थी। इस भूकम्प का एपिसेंटर अम्बिकापुर के उत्तर-पूर्व दिशा में कोई 10 किमी दूर कल्याणपुर के पास चिखलाडीह में था और भूकम्प का मूल 10 किमी की गहराई में स्थित था। इस भूकम्प की तीव्रता 3.8 रिक्टर थी। हालांकि 3.8 रिक्टर स्केल की भूकम्पीय घटना सामान्य श्रेणी की होती है फिर भी यह कच्चे मकानों या पक्के मकानों के कमजोर हिस्सों को क्षति पहुंचाने में सक्षम होती है। चुकी भूकम्प की तरंगें भूसतह पर एपीसेन्टर के चारों ओर वृत्तीय सनकेन्द्रीय क्षैतिज गति करती है लिहाजा इसका अनुभव केंद्र के चारो ओर दूर तक होता है। बलरामपुर, लखनपुर, सूरजपुर आदि क्षेत्रों में भी इस भूकम्प की तरंगों को अनुभव किया गया है। पहली भूकम्पीय घटना के बाद अभी लोग संभल भी नहीं पाए थे कि 22 मिनट के बाद शाम 8 बज कर 26 मिनट पर एक बार फिर से धरती हिली हालांकि गडगडाहट पहले जितनी तेज नहीं थी और इसकी अवधि भी एक से दो सेकंड थी। दूसरी बार भूकम्प का एपीसेन्टर अम्बिकापुर के पूर्व दिशा में बांकी डेम के ऊपर कोरिमा गांव के नजदीक था। इस बार इसकी तीव्रता पहले की तुलना में 0.1 रिक्टर अधिक रह कर 3.9 रिक्टर थी परन्तु इसका मुलबिन्दु भूसतह से 11 किमी की गहराई में स्थापित था। अर्थात भूकम्प का मूल बिंदु भूमि के भीतर पूर्व दिशा में आगे बढ़ा था और गहराई में भी गया था। यदि भूकम्प की स्थानीय घटनाओं को देखें तो पिछले दिनों में इसकी आवृत्ति बढ़ती हुई प्रतीत होती है। कोरिया, सूरजपुर और सरगुजा में भूकम्प की घटनाएं बढ़ी हैं। उधर कोरबा जिला भी अब अछूता नहीं रहा है। इस तरह भूगर्भीय हलचल की आवृत्ति का होना चिंता उत्पन्न करती है। भूगर्भीय विशद अध्ययन की आवश्यकता को भी आमंत्रित करती है। .... ✍️मौसम वैज्ञानिक अक्षय मोहन भट्ट ..!

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