अंबिकापुर। एशिया का सबसे अधिक तापमान वाला प्राकृतिक गर्मजल स्त्रोत भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के बलरामपुर जिला का प्रमुख पर्यटन और आस्था का केंद्र तातापानी अपने आप में कई रहस्यमय कहानियों को समेटे हुए है, जो न सिर्फ हमें रोमांचित करता है बल्कि दिव्य अनुभूति भी देता है। तातापानी में गर्म जल स्त्रोत स्थल में वर्षो पुराना एक नीम का पेड़ स्तिथ है, जिसके चारो ओर चबूतरा बनाया गया है। यह स्थल पुरातात्विक और ऐतिहासिक रूप से भी महवपूर्ण है। नीम चबूतरे में ग्रामीणों के द्वारा खुदाई में निकली भगवान शिव की नट स्वरूप में प्रतिमा स्थापित किया गया है, इसके अलावा भगवान गणेश, हनुमान जी सहित अन्य देवी देवताओं की प्राचीन प्रतिमा स्थापित की गई हैं। ग्रामीणों की पुरानी मान्यता यह भी है कि शिव मंदिर के समीप ही एक ऋषि की कुटिया थी। वे भगवान शिव के परम भक्त थे, उनके पास दैवीय शक्तियां भी थी। उनके पास ऐसा पात्र था जिससे मनचाहा व्यंजन प्राप्त कर लेते थे। यहां के बुजुर्गो के मुताबिक उन्होंने यह सच्ची कहानियां अपने पुरखों से सुनी है। मान्यता है कि जब भी कोई चरवाहा मवेशी चराते हुए शिव मंदिर की ओर जाता था, ऋषि उन्हे पास बैठाते और चमत्कारी पात्र के माध्यम से मनचाहा भोजन कराते थे। चरवाहे बोलते थे मुनि जी हमें खीर, पूड़ी, हलुवा, फल खाना है तो मुनि जी आश्रम के भीतर जाते और कुछ देर में ही केले के पत्ते में मनचाहा भोजन दे देते जिससे लोग काफी अचरज में रहते थे।
हर मनोकामना होती है पूरी
तातापानी के प्राचीन शिव चबूतरे में लोगों की हर मनोकामना पूरी होती है। इससे जुड़ी एक घटना भी यहां काफी चर्चित है, जो आज से करीब 30 वर्ष पूर्व ही घटित हुई थी। ग्राम पंचायत तातापानी के सरपंच पति अमरदीप मिंज ने बताया कि मैं स्वयं इस घटना का चश्मदीद हूं। शिव मंदिर में हर मनोकामना पूरी होने के कारण यहां की प्रसिद्धि काफी बढ़ रही थी, यहां सैलानी भी मन्नत पूरी होने पर दोबारा पूजन दर्शन के लिए आते हैं। करीब 30 वर्ष पूर्व रामचंद्रपुर विकासखंड के एक मुस्लिम परिवार का इकलौता पुत्र अचानक लापता हो गया था। थाना में सूचना देने के साथ ही पिता ने उसे ढूंढने काफी कोशिश की मगर सफल नहीं हुआ। जिससे मायूस पिता शिव मंदिर पहुंचा और पुत्र के मिलने पर मंदिर में कथा और पूजन का वादा किया था। उसी रात उसकी मनोकामना पूरी हो गई। पुत्र स्वयं घर लौट आया। इसे महज इत्तेफाक समझ पिता मंदिर में दोबारा नहीं आया। इसके बाद पुत्र की अचानक तबियत बिगड़ी गई। चिकित्सक भी बीमारी नही पकड़ पा रहे थे, बुखार लगातार आ रहा था। पुत्र के इलाज में हारने के बाद पिता ने जब भगवान शिव का ध्यान किया तो शिवजी ने स्वप्न में उसे मंदिर में पूजन कराने कहे। इसके बाद पिता ने शिव मंदिर में विधिवत पूजा और कथा संपन्न कराया, इसके बाद आश्चर्यजनक रूप से पुत्र स्वास्थ्य हो गया।
राम चौरा पहाड़ में आए थे भगवान राम , लक्ष्मण
तातापानी,नवाडीह, रजबंधा, लुरघुट्टा सहित अन्य गांव के लोगों की ऐसी मान्यता है कि जब माता सीता का हरण हो गया था, तब भगवान राम और लक्ष्मण उन्हे ढूंढते हुए रामचौरा पहाड़ में आए थे, उस समय वे कुछ दिनों तक पहाड़ में रुके थे, मान्यता है कि पहाड़ के नीचे कुछ लोग बड़ा कड़ाही चढ़ा पकवान बना रहे थे, जिससे लक्ष्मण क्रोधित हो उठे और कड़ाही पर तीर चला दिए, इससे जहां - जहां गर्म तेल पड़ा वहां - वहां से गर्म जल की धारा फूट पड़ी। ग्रामीणों के बीच गर्म पानी को लेकर यह किवंदिती पुराने समय से प्रचलित है। वर्तमान समय में रामचौरा पहाड़ में श्री राम मंदिर और मार्ग निर्माण शुरू किया गया है।
ईंटे चौड़ी और पत्थर जैसी मजबूत
तातापानी में गर्म जल स्त्रोत के वैज्ञानिक कारणों का पता लगाने और ताप विद्युत उत्पादन की संभावना तलाशने करीब 40वर्ष पूर्व भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग की टीम के द्वारा बड़ी - बड़ी मशीनों को लगाकर कई वर्षो तक शोध किया गया था। उस दौरान खुदाई में प्राचीन कीले, इमारत के अवशेष मिले थे, जिसमें ईंटे चौड़ी और पत्थर जैसी मजबूत थी, जबकि हिंदू देवी देवताओं की कई प्रतिमाएं भी प्राप्त हुई थी। यह प्रतिमा नीम चबूतरे में रखी गई थी, इनमें से कई ऐतिहासिक महत्व की मूर्तियां चोरी हो गई।
संक्रांति पर्व पर हर साल लगता है मेला
तातापानी में मकरसंक्रांति पर्व पर हर साल मेला लगता है। यहां छत्तीसगढ़ के अलावा पड़ोसी प्रांत झारखंड, बिहार , उत्तरप्रदेश, उड़ीसा सहित अन्य इलाकों से लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं, गर्म जल स्त्रोत में स्नान का आनंद लेने के साथ भगवान शिव की पूजा, अर्चना करते हैं। मेला में झूले के अलावा हर तरह की सामाने मिलती हैं । सामान्य दिनों में गर्म पानी के कुंड में लोग अंडा, आलू भी उबालते हैं। वहीं पोटली में बांधकर चावल भी पकाते हैं।




