अंबिकापुर।। खबरी गुल्लक।।
तीन बालिकाओं का अपहरण कर विवाह के नाम पर देह व्यापार में धकेलने आपराधिक षडयंत्र किए जाने के मामले में न्यायालय विशेष न्यायाधीश (एनआईए) अम्बिकापुर पीठासीन अधिकारी श्री केएल चरयाणी की अदालत ने आरोपी विमला यादव, नीलू उर्फ निर्मला नायक व इसके पति कोमल अहिरवार को भा.दं.सं. के आरोपित धारा 120बी, 363, 365, 366क, 368 एवं 370 के तहत दोषी ठहराते हुए 14 - 14 वर्ष कठोर कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अंबिकापुर की सचिव सुश्री लिनम बनसोडे ने इस संबंध में बताया कि अभियुक्तगण विमला यादव, नीलू उर्फ निर्मला नायक एवं कौमल अहिरवार द्वारा 12.अप्रैल 2024 से 18 अप्रैल 2024 के मध्य आपराधिक षडयंत्र करते हुए जशपुर जिले तपकरा थाना क्षेत्र की तीन नाबालिग लड़कियों का अपहरण कर देहव्यापार की नियत से शादी का झांसा दे बाहर भेजने प्रयास किया जा रहा था। पीड़िताओं के पिता की मौत हो गई थी। रिश्तेदार उनका देखरेख कर रहे थे। अचानक बालिकाओं के गायब हो जाने पर परिजनों ने जब ग्रामीणों से पूछताछ की तो पता चला विमला यादव नामक महिला स्कूटी से तीनों को ले गई है। इस जानकारी के बाद परिजनों ने उक्त महिला के खिलाफ नामजद अपराध पंजीबद्ध कराई। पुलिस ने जब विमला यादव को पकड़ पूछताछ की तो सभ्य समाज को झंझकोरने वाला खुलासा हुआ। इस मामले में सुनवाई करते हुए विद्वान न्यायाधीश श्री केएल चरयाणी द्वारा सम्पूर्ण साक्ष्य विवेचना उपरांत यह स्पष्ट होना पाया कि अभियुक्त विमला ने अन्य अभियुक्त नीलू उर्फ ठुनी एवं कोमल अहिरवार के साथ मिलकर आपराधिक षडयंत्र रचा तथा उक्त आपराधिक षडयंत्र के पालन में अवयस्क पीड़ित बच्चों को अपने साथ बहला- फुसलाकर उनका व्यपहरण कर अपने साथ ले गयी और उनको नीलू और उनके पति कोमल के आधिपत्य में सौंप दिया। जिन्होंने अवयस्क होने के बाद भी विवाह करने के लिये प्रलोभित किया और उसे देखने के लिये लड़के भी बुलाये थे। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा पाया गया कि यदि अवयस्क पीड़ित क्रमांक 1 का विवाह हो जाता तो निश्चित रूप से वह अयुक्त संभोग के लिये विवश की जाती, इस तरह तीनों अभियुक्त का अंततः आशय एवं उद्देश्य पीड़ित बच्चों का दुव्यापार कर उससे लाभ अर्जित किया जाना था। दोषसिद्ध घोषित कर दोषसिद्ध विमला यादव, नीलू उर्फ निर्मला नायक एवं कोमल अहिरवार को अपराध अंतर्गत धारा 363, 365 (जिसमें धारा 368 भा.दं. सं. का अपराध समाहित है) के तहत् 3- 3 वर्ष का कठोर कारावास एवं प्रत्येक को 1,000/- (एक हजार रूपये) का अर्थदण्ड, धारा 366क भा.दं.सं. के तहत् 4-4 वर्ष का कठोर कारावास एवं प्रत्येक को 1,000/- (एक हजार रूपये) का अर्थदण्ड तथा उक्त अपराधों में अर्थदण्ड की राशि अदा नहीं करने पर तीन-तीन माह का साधारण कारावास एवं धारा 370 भा.दं.सं. के तहत् 14-14 वर्ष का कठोर कारावास एवं प्रत्येक को 5000/- (पांच हजार रूपये) के अर्थदण्ड से तथा अर्थदण्ड की राशि अदा न होने पर छह माह का साधारण कारावास से दण्डित किया गया।




