नेतृत्व, नवाचार और नीति का संगम: सूरजपुर में ऑयल पॉम खेती की नई इबारत... आत्मनिर्भरता व समृद्धि की दिशा में नवाचार

नेतृत्व, नवाचार और नीति का संगम: सूरजपुर में ऑयल पॉम खेती की नई इबारत... आत्मनिर्भरता व समृद्धि की दिशा में नवाचार

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 खबरी गुल्लक | सूरजपुर।23 जुलाई 2025।

( जिला प्रतिनिधि भूपेंद्र राजवाड़े) 

सूरजपुर जिले के भैयाथान विकासखंड के ग्राम सिरसी में एक विशेष अभियान की शुरुआत की गई, जिसने जिले की कृषि संभावनाओं को नई उड़ान दी है। राष्ट्रीय मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स – ऑयल पॉम योजना के तहत सूरजपुर को 300 हेक्टेयर क्षेत्र में पॉम तेल उत्पादन का लक्ष्य मिला है। यह न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करेगा, बल्कि देश को खाद्य तेल के आयात पर निर्भरता से भी मुक्ति दिलाएगा।


शुभारंभ कार्यक्रम में कृषक आशीष गुप्ता के खेत में 143 पौधों का रोपण किया गया। यह शुरुआत प्रतीक है उस परिवर्तन की, जिसकी नींव विज्ञान, प्रबंधन और सरकार की योजनागत प्रतिबद्धता से रखी जा रही है। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष चंद्रमणी पैकरा, उपाध्यक्ष  रेखा राजलाल राजवाड़े, जनपद पंचायत भैयाथान के जनप्रतिनिधि, स्थानीय किसान तथा अधिकारीगण उपस्थित रहे।


"पारंपरिक फसलों की तुलना में ऑयल पॉम खेती से चार गुना अधिक लाभ संभव है," कलेक्टर एस. जयवर्धन का यह वक्तव्य इस पहल की ताकत को दर्शाता है। न्यूनतम श्रम, कम रोग जोखिम और दीर्घकालिक उत्पादन यह सभी खूबियां इसे किसान के लिए ‘स्मार्ट फसल’ बनाती हैं।


यह योजना सूरजपुर जिले को केवल कृषि में समृद्ध नहीं बनाएगी, बल्कि भारत के खाद्य तेल उत्पादन को वैश्विक मंच पर नई पहचान देगी। वर्तमान में भारत 60-70% खाद्य तेल का आयात करता है, जिसमें पॉम ऑयल की हिस्सेदारी सर्वाधिक है। ऐसे में सूरजपुर का यह प्रयास, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में एक निर्णायक अध्याय जोड़ रहा है।


कृषि वैज्ञानिकों, विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता ने इस पहल को जमीन पर उतार दिया है। किसान आज न केवल नई उम्मीद से देख रहे हैं, बल्कि उन्होंने वैकल्पिक खेती के क्षेत्र में एक साहसिक कदम भी बढ़ाया है।


एक एकड़ से 10-12 टन उत्पादन और 25-30 वर्षों तक लगातार आय

यह सपना अब किसानों के लिए हकीकत बनता दिख रहा है। राज्य सरकार ने अनुदानों की श्रृंखला के माध्यम से खेती को प्रोत्साहन और सुरक्षा दी है। पौधे, फेंसिंग, ड्रिप सिंचाई, बोर खनन से लेकर विपणन तक हर मोर्चे पर सहारा दिया गया है।किसानों की फसल सीधे उनके खेत से कंपनी द्वारा खरीदी जाएगी। प्री यूनिक एशिया प्रा. लि. और सरकार के बीच हुए एमओयू ने इस चिंता को जड़ से खत्म कर दिया है।


इस अवसर पर कलेक्टर एस. जयवर्धन ने कहा कि पारंपरिक फसलों की तुलना में ऑयल पॉम खेती से चार गुना अधिक लाभ संभव है। इसमें न्यूनतम श्रम लगता है, रोग कम लगते हैं और उत्पादन दीर्घकालिक है। यह सूरजपुर के किसानों की आय को नई ऊंचाई देगा।" इस सोच के पीछे न केवल आर्थिक सुधार है, बल्कि कृषि नवाचार और आत्मनिर्भरता का दीर्घकालिक दृष्टिकोण भी है। कलेक्टर ने यह सुनिश्चित किया है कि किसानों को तकनीकी सहायता, वित्तीय अनुदान, और विपणन सुरक्षा सभी मोर्चों पर मजबूत आधार मिले।

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