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| डीजल लूटते आसपास के ग्रामीण |
खबरी गुल्लक न्यूज़।सूरजपुर।22 जुलाई 2025।( जिला प्रतिनिधि भूपेंद्र राजवाड़े)
प्रतापपुर-अंबिकापुर हाईवे पर पोड़ी मोड़ के समीप मंगलवार को दोपहर अचानक तेल युद्ध का मैदान बन गया! 45,000 लीटर डीजल से भरा एक भारी टैंकर पलटा और चंद मिनटों में सड़क भीड़ और लूटखोरी का अड्डा बन गई। जो मिला वही लूटने टूट पड़ा – गांव, राहगीर, बस-ट्रक वाले... कोई नहीं बचा!
राजस्थान नंबर (RJ-14 2428) का यह टैंकर मुगलसराय से लखनपुर माइंस (झारसुगुड़ा) जा रहा था। ड्राइवर लाल साय यादव (30 वर्ष, निवासी आजमनगर) ने जैसे ही तेज रफ्तार में मोड़ काटा, भारी वाहन अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गया। और फिर शुरू हुआ डीजल लूट का वहशियाना तांडव।
पौड़ी मोड़, आसपास के गांव और राह चलते लोग लूट की खबर सुनते ही मौके पर टूट पड़े। न कोई डर, न कोई शर्म – थाली, बाल्टी, डिक्की, प्लास्टिक की बोतल, लोटा... जो मिला उसमें डीजल भरने लगे। महिलाएं, पुरुष, बूढ़े, बच्चे, ट्रक ड्राइवर, ट्रैक्टर चालक – हर कोई पेट्रोलियम उत्पाद को ऐसे लूट रहा था जैसे मुफ्त में खजाना मिल गया हो। लोग आपस में भिड़े, धक्का-मुक्की हुई, झगड़े हुए और नतीजा यह कि सड़क पर डीजल नहर की तरह बहने लगा। लोग डीजल में सनकर भी खुशी-खुशी घर लौटे।
पुलिस आई, पर तब तक खेल खत्म!
सूचना पर प्रतापपुर पुलिस ASI हरिशंकर तिवारी, बजरंगी, विनोद परीडा, नौशाद व प्रकाश साहू के साथ मौके पर पहुंची। लेकिन जब तक पुलिस आई, टैंकर पूरी तरह खाली हो चुका था। लोगों की भीड़ इतनी बेकाबू थी कि पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। ग्रामीण उल्टा पुलिस से भिड़ गए। भीड़ हटाने में भारी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन तब तक सड़क पर एक बूंद डीजल बाकी न था।
अगर माचिस जल जाती तो… सैकड़ों जलकर मरते
चारों ओर फैल चुका डीजल, कपड़ों में डूबे लोग, और अगर इसी बीच कोई सिरफिरा माचिस जला देता, तो पूरा इलाका जलकर खाक हो जाता। लेकिन डीजल की हवस में डूबे लोग जान की कीमत तक भूल गए।
एक महीना पहले भी इसी रोड पर हुई थी डीजल लूट
ठीक एक महीना पहले भी इसी सड़क पर डीजल से भरा टैंकर पलटा था। तब भी यही नजारा था। तब भी प्रशासन हाथ मलता रह गया था। लेकिन एक भी सबक नहीं लिया गया।
बड़े सवाल जो उठते हैं:
पेट्रोलियम उत्पाद लदे वाहनों की सुरक्षा क्यों नहीं सुनिश्चित की जाती?
बार-बार हादसे के बाद भी प्रशासन अलर्ट क्यों नहीं होता?
क्या आम जनता की मानसिकता अब लूट को जायज मान बैठी है?
क्या अगली बार तब चेतेंगे जब हादसे में सैकड़ों लोग जलकर मर जाएंगे?
यह खबर सिर्फ हादसा नहीं, प्रशासनिक सुस्ती, ग्रामीण चेतना की गिरावट और कानून की बेबसी का खुला दस्तावेज़ है। अगर अब भी नहीं चेते, तो अगली बार ये हादसा "हादसा" नहीं, जनसंहार होगा।





