नियति की बे आवाज लाठी अचानक पड़ रही.. रिश्वतखोर अधिकारी परिवार को दे रहे जिल्लत भरी जिंदगी...! एक और विकेट गिरा, मूर्खता से नौकरी भी लगी दांव पर.. दूसरे भी चेत जाएं.. वरना उनकी होगी अगली बारी...

नियति की बे आवाज लाठी अचानक पड़ रही.. रिश्वतखोर अधिकारी परिवार को दे रहे जिल्लत भरी जिंदगी...! एक और विकेट गिरा, मूर्खता से नौकरी भी लगी दांव पर.. दूसरे भी चेत जाएं.. वरना उनकी होगी अगली बारी...

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अंबिकापुर।। खबरी गुल्लक।। 

 किसी की मजबूरी का फायदा उठा कोई रिश्वत वसूल  कितना भी धनवान क्यों न बन जाए मगर नियति उसे एक न एक दिन उसके किए कि जरूर सजा देती है, या यूं कहें कि रिश्वतखोर अधिकारी मूर्खता पूर्वक अवैध कमाई करता रहता है, रिश्वत के मद में चूर होने के कारण उसे यह आभास नहीं हो पाता है कि उसकी मान प्रतिष्ठा के साथ  नौकरी भी दांव पर लग रही है, चंद कामयाबी से उसे ऐसा लगता है मानो उसे कुछ नहीं हो सकता, वह सामने वाले अधिकारी को भी अपने चश्में से देखने लगता है, वह समझता है कभी दिक्कत आई तो सामने वाले को भी रिश्वत देकर बच जाएगा ... मगर ऊंट एक न एक दिन पहाड़ के नीचे जरूर आता है जहां उसकी न सिर्फ ऊंचाई की घमंड टूटती है बल्कि ईश्वर की बे आवाज लाठी से अंजाम तक पहुंच जाता है..! इसके बाद शेष बचता है परिवार के लिए जिल्लत भरी जिंदगी और बेबसी..! 

दोस्तो.. यह दशा होती है हर रिश्वतखोर की। अपने ओहदे को कमाई का जरिया बना जरूरतमंदों को लूटने वालों की.., 

दोस्तो हाल ही में बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ विकासखंड में एसीबी की टीम के द्वारा ग्रामीण से सीमांकन के एवज में 15 हजार रुपए की रिश्वत वसूल रहे पटवारी को रंगे हाथों पकड़ा था। तहसील कार्यालय में पटवारी महेंद्र कुजूर, पीड़ित ग्रामीण राजेश यादव से रिश्वत वसूल मांग रहा था। ग्रामीण ने उसकी शिकायत एसीबी से कर दी और एसीबी की टीम ने जाल बिछा पटवारी को रंगे हाथों पकड़ लिया। 

दोस्तो एक पटवारी की शुरुआती सैलरी  35 से 36 हजार रुपए तक की होती है। वह जैसे जैसे सीनियर होता है सैलरी बढ़ती है। जानकारों के मुताबिक वरिष्ठ होने पर सैलरी 75 से 80 हजार या इससे भी अधिक पहुंच जाती है। शंकरगढ़ में रिश्वत वसूल करते जो पटवारी पकड़ा गया उसकी सैलरी 45 हजार रुपए तक पहुंच गई थी। यदि वह चाहता तो इतने वेतन में परिवार को सम्मानजनक अच्छी जिंदगी दे सकता था। बच्चों को उच्च शिक्षा देकर ऊंचा मुकाम भी दे सकता था। प्राइवेट काम करने वाले लोग तो 15 से 20 हजार रुपए के वेतन में भी गुजारा कर लेते हैं.. इसे तो 45 हजार रुपए मिल रहा था। मगर रिश्वत ने उसे बर्बाद कर दिया। 

दोस्तो यह सबक है हर रिश्वतखोर अधिकारी के लिए जो अपने ओहदे को कमाई का जरिया बनाते हैं... वक्त है अभी भी चेत जाएं ..वरना एसीबी का अगला निशाना आप भी बन सकते हो...



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