सूरजपुर में आफत की बारिश: नदी-नाले उफान पर, आधा दर्जन गांव टापू में तब्दील, जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित...पानी से तार-तार हुईं कनेक्टिविटी की कड़ियां

सूरजपुर में आफत की बारिश: नदी-नाले उफान पर, आधा दर्जन गांव टापू में तब्दील, जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित...पानी से तार-तार हुईं कनेक्टिविटी की कड़ियां

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खबरी गुल्लक न्यूज। सूरजपुर। 26 जुलाई 2025। भूपेन्द्र राजवाड़े। 

सूरजपुर जिले में बीते 48 घंटे से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पूरे जिले को प्राकृतिक आपदा की स्थिति में ला खड़ा किया है। भारी बारिश के चलते नदियों और नालों ने रौद्र रूप धारण कर लिया है, जिसके चलते जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। जिला मुख्यालय से लेकर सुदूरवर्ती वनांचल और पहाड़ी क्षेत्रों तक जीवन की गति थम गई है। बारिश के कारण कई स्थानों पर पुल-पुलियों का क्षतिग्रस्त होना, सड़कों पर पानी का बहाव और गांवों का जिला और ब्लॉक मुख्यालय से संपर्क टूटना न केवल प्रशासनिक चुनौती है, बल्कि यह ग्रामीण जीवन की पीड़ा की भी जीवंत तस्वीर है। सबसे अधिक भयावह स्थिति चांदनी-बिहारपुर क्षेत्र की है, जहां की बरंगा और रेडिया नदियां अपने पूरे उफान पर हैं। बरंगा नदी का जलस्तर इतना बढ़ चुका है कि ओड़गी-बिहारपुर मार्ग पर ग्राम पंचायत महुली के समीप बना पुल पूरी तरह जलमग्न हो गया है। सड़क के ऊपर से पानी का बहाव हो रहा है, जिससे लोगों का आना-जाना ठप हो गया है। वाहनों के पहिए थम चुके हैं, और ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं। 


 तार-तार हुईं कनेक्टिविटी की कड़ियां: टुटा जिला-प्रखंड से संपर्क

लगातार हो रही बारिश और नदी-नालों के उफान पर होने के कारण लगभग दो दर्जन ग्राम पंचायतें जिला मुख्यालय और ब्लॉक कार्यालय से कट चुकी हैं। इसमें बिहारपुर, महुली, कोल्हुआ, अंतिकापुर, रामगढ़, उमझर, नवाटोला, सपहा, कुबेरपुर, कांतिपुर, थर्डपत्थर, खैरा, बसनारा, कैलाश नगर, छतरंग और बांक प्रमुख रूप से शामिल हैं। ये क्षेत्र अब प्रशासनिक दायरे से बाहर हो गए प्रतीत हो रहे हैं, क्योंकि वहां तक न तो अधिकारी पहुंच पा रहे हैं और न ही कोई राहत सामग्री। यह स्थिति न केवल इन क्षेत्रों को असहाय बना रही है, बल्कि सरकार और प्रशासन की आपदा पूर्व तैयारी पर भी सवाल खड़े कर रही है।


टापू बन गए गांव: चारों ओर पानी, बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं

चांदनी-बिहारपुर के जिन ग्राम पंचायतों का नाम शायद आम तौर पर बहुत कम लोग जानते हैं, वे आज प्राकृतिक आपदा के प्रतीक बनकर सामने आ रहे हैं। रासोकी, बैजनपाठ, लुल्ह, भुंडा, टेलईपाठ और जुड़वनिया जैसे गांव पूरी तरह जल से घिरे हुए हैं और किसी भी तरह की आवाजाही असंभव हो चुकी है। इन गांवों के लोग न ब्लॉक तक पहुंच पा रहे हैं, न सीमावर्ती गांवों तक। ना स्वास्थ्य सुविधा, ना खाद्यान्न, ना सुरक्षा – ये गांव आज सचमुच एक 'टापू' में तब्दील हो चुके हैं।


गहराता संकट: बिजली ठप, शिक्षा रुकी, खेती पर संकट

बारिश के इस कहर ने सिर्फ सड़कों और संपर्क को नहीं तोड़ा, बल्कि ग्रामीण जीवन की मूलभूत सुविधाओं को भी पूरी तरह से ठप कर दिया है। बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो चुकी है, जिससे गांव अंधेरे में डूबे हुए हैं। स्कूल बंद हैं, बच्चे घरों में कैद होकर रह गए हैं। खेतों में पानी भर गया है, जिससे धान की रोपाई एवं अन्य कृषि कार्य प्रभावित हुए हैं। साग-सब्जी की फसलें पानी में सड़ने लगी हैं, जिससे किसानों को व्यापक आर्थिक नुकसान हो रहा है। एक किसान ने बातचीत में कहा, "फसल तो भगवान भरोसे है...हम खुद भी घर में कैद हो गए हैं।"


प्रशासनिक निष्क्रियता या सीमित संसाधनों की मजबूरी...?

अब बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन इस आपदा से निपटने को लेकर क्या कर रहा है? कहीं से राहत शिविरों की खबर नहीं है, न ही नावों या मोटर बोट से लोगों को बाहर निकालने की योजना दिख रही है। क्या जिला प्रशासन ने इस बारिश की संभावना का पूर्व अनुमान नहीं लगाया था? क्या इतनी बड़ी संख्या में गांवों के संपर्क टूटने की कोई तैयारी पहले से नहीं की गई थी? इन सवालों का जवाब जनमानस को चाहिए।


जरूरत है त्वरित राहत की और दीर्घकालिक समाधान की सोच की

आज आवश्यकता केवल राहत सामग्री पहुंचाने की नहीं है, बल्कि दूरस्थ ग्राम पंचायतों के लिए दीर्घकालिक आपदा प्रबंधन नीति की है। हर बार बारिश में डूबते ये गांव इस बात की गवाही देते हैं कि हमारी नीतियों में कहीं न कहीं आमजन की सुरक्षा प्राथमिकता में नहीं है।


        प्रशासनिक मदद की दरकार – लोगों की निगाहें राहत दल पर

स्थानीय ग्रामीण प्रशासन से राहत और बचाव कार्य शुरू करने की मांग कर रहे हैं। कई गांवों में खाने-पीने की वस्तुओं की किल्लत शुरू हो गई है। हालात ये हैं कि यदि बारिश ऐसे ही जारी रही, तो खाद्यान्न, पानी और दवा संकट और गहराएगा।

यह केवल पानी नहीं है, यह भविष्य की चेतावनी है। इसे पढ़िए, समझिए और जवाब मांगिए।


 



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