नाली निर्माण के नाम पर रेलवे प्रशासन ने बारिश में खुदवा दिया गढ्ढा .. बारिश में हुआ लबालब... मार्ग से गुजर रहे लोगों में हादसे का खतरा अब - तब...

नाली निर्माण के नाम पर रेलवे प्रशासन ने बारिश में खुदवा दिया गढ्ढा .. बारिश में हुआ लबालब... मार्ग से गुजर रहे लोगों में हादसे का खतरा अब - तब...

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 सूरजपुर।। खबरी गुल्लक।। ( जिला प्रतिनिधि सूरजपुर - भूपेंद्र राजवाड़े)

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में रेलवे प्रशासन की लापरवाही से बारिश के मौसम में किसी की जल समाधि न हो जाए। झमाझम बारिश होने लोगों की सांसे अटक जाती है कि सड़क किनारे खोदे गए मौत के गढ्ढे उनकी जिंदगी न निगल ले। दर असल रेलवे प्रशासन के द्वारा सूरजपुर रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाला मुख्य मार्ग पर बारिश के मौसम में नाली बनाने के नाम पर गढ्ढा खोदा गया था, बारिश में निर्माण नहीं हो पाने के बावजूद कथित तौर पर प्रबंधन ने कमीशन खोरी के चलते बारिश के मौसम में ठेका देकर वर्क आर्डर जारी कर दिया गया। जिसका नतीजा यह हुआ कि ठेकेदार अभी तक नाली के लिए केवल गढ्ढा खोद पाया है। निर्माण के लिए अब बारिश थमने का इंतजार किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब बारिश में निर्माण नहीं हो सकता था तो गढ्ढा क्यों खोदा गया, यदि गढ्ढा खोद भी लिया गया है तो निर्माण कार्य नहीं हो पाने की स्थिति में हादसा रोकने बेरीकेट्स अथवा सुरक्षा के अन्य उपाय क्यों नहीं किए गए। नागरिकों का कहना है कि रेलवे स्टेशन मार्ग पर इस गढ्ढे के चलते दुर्घटना की संभावना बढ़ गई है। स्कूली बच्चों, बजुर्गो के साथ भी घटना का भय बना रहता है। 


इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में पैदल यात्री, दोपहिया व चारपहिया वाहन गुजरते हैं। स्कूली बच्चे भी इसी रास्ते से स्कूल आते-जाते हैं। ऐसे में इन खुले गड्ढों में किसी वाहन या बच्चे के गिरने की आशंका बनी हुई है। शाम होते ही इस रास्ते पर अंधेरा छा जाता है जिससे दृश्यता और कम हो जाती है, और दुर्घटना की आशंका और भी अधिक बढ़ जाती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस मार्ग से कई वरिष्ठ अधिकारी भी रेलवे स्टेशन आते-जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद न तो रेलवे प्रशासन और न ही जिला प्रशासन ने अब तक कोई सुध ली है। ये निर्माण कार्य रेलवे प्रशासन की निगरानी में चल रहा है, ऐसे में यदि कोई बड़ा हादसा होता है, तो जिम्मेदारी किसकी होगी?


स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गड्ढों के पास चेतावनी संकेतक लगाए जाएं, अस्थाई रूप से बैरिकेडिंग की व्यवस्था हो, रात्रि में प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, निर्माण कार्य को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द पूर्ण किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन इस दिशा में जल्द कदम नहीं उठाता, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज करता है या समय रहते नागरिकों की मांगों पर अमल कर संभावित हादसों को टालने की दिशा में ठोस कदम उठाता है।


 गढ्ढे में पानी, बोर्ड न चेतावनी .. चली न जाए किसी की जिंदगानी - सरपंच दिलीप सिंह 

"रेलवे स्टेशन मार्ग पर नाली निर्माण के लिए खुदाई तो कर दी गई, लेकिन अधूरा कार्य छोड़ देने से अब यह गड्ढे जानलेवा बन गए हैं। बरसात के पानी से यह गड्ढे लबालब भरे हुए हैं और इसके किनारे कोई चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग या रोशनी की व्यवस्था नहीं की गई है। इससे यहां से गुजरने वाले राहगीरों, स्कूली बच्चों और दोपहिया चालकों की जान पर खतरा मंडरा रहा है। हमने इस विषय पर कई बार अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया है, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अगर समय रहते जरूरी सुरक्षात्मक उपाय नहीं किए गए तो किसी दिन बड़ी दुर्घटना हो सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन और संबंधित विभागों की होगी। ग्रामीणों की मांग है कि तुरंत संकेतक, बैरिकेडिंग और प्रकाश व्यवस्था की जाए और निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा किया जाए।"


संकेतक का करे प्रबंध वरना होगा आंदोलन - टीकम राजवाड़े 

"रेलवे स्टेशन मार्ग पर नाली निर्माण के नाम पर केवल गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं, जो अब बारिश में जानलेवा जाल बन गए हैं। राहगीरों और स्कूली बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा यह गंभीर मामला है, लेकिन न तो रेलवे प्रशासन और न ही स्थानीय अधिकारियों ने अब तक कोई सुरक्षात्मक कदम उठाया है। गड्ढों में पानी भर चुका है, और शाम होते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। हम पंच प्रतिनिधियों ने कई बार इस ओर ध्यान दिलाने की कोशिश की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब समय आ गया है कि प्रशासन जागे और तत्काल संकेतक, बैरिकेडिंग तथा प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करे। यदि जल्द कार्रवाई नहीं होती, तो हम ग्रामीणों के साथ मिलकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।"

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