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कूटरचित दस्तावेजों से सुदखोरी के आपराधिक षड्यंत्र का पर्दाफाश... चार आरोपी गिरफ्तार, 13 लाख का कर्ज दे 3 माह में ही मांग रहे थे 18 लाख

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अंबिकापुर।। खबरी गुल्लक।।

थाना गांधीनगर पुलिस ने सुदखोरी एवं कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से किए गए एक बड़े आपराधिक षड्यंत्र का खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में अनुपमा सिंह, पंकज चौधरी, भक्कू राम मुंडा और अनुज सिंह शामिल हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त मोबाइल स्टांप पेपर जप्त किया है, जबकि मामले में शामिल कुछ अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। पुलिस ने बताया कि जांच से पता चला कि आरोपियों ने 6 जनवरी 2025 को 50 रुपये के स्टांप पर एक अनुबंध तैयार करने का बहाना बनाकर अलका से हस्ताक्षर करवाए। बाद में, अलका की अनुपस्थिति में उसी स्टांप पेपर पर एक फर्जी अनुबंध तैयार किया गया, जिसमें झूठी बातें लिखकर दस्तावेज कूटरचित किए गए। यह फर्जी दस्तावेज बाद में न्यायालय में पेश कर अवैध लाभ प्राप्त करने की कोशिश की गई। पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ कि पंकज चौधरी ने अपने मेमोरैंडम में स्वीकार किया कि उसने स्वयं हाथ से वह स्टांप लिखकर तैयार किया था। मोबाइल स्टांप पेपर भी अनुपमा के कब्जे से बरामद किया गया है। पुलिस के अनुसार सभी चारों आरोपियों की भूमिका स्पष्ट रूप से आपराधिक षड्यंत्र में पाई गई है।

13 लाख के कर्ज में तीन माह के भीतर ही 5 लाख का ब्याज

पुलिस ने बताया कि मामले की शुरुआत उस समय हुई जब नवापारा गोधनपुर रोड निवासी अलका सिंह ने 26 जुलाई 2025 को थाना गांधीनगर में रिपोर्ट दर्ज कराई। अलका ने बताया कि उसने अपनी परिचित अनुपमा सिंह से 13 लाख रुपये उधार लिए थे, जिनमें से 11 लाख 82 हजार रुपये वह पहले ही चुका चुकी थी। इसके बावजूद अनुपमा उस पर 10 प्रतिशत मासिक ब्याज दर से कुल 18 लाख रुपये की मांग कर रही थी और बार-बार गाली-गलौज कर प्रताड़ित कर रही थी।  अलका की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने थाना गांधीनगर में अपराध क्रमांक 423/25 दर्ज किया। यह मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 296 एवं छत्तीसगढ़ ऋणीयों का संरक्षण अधिनियम की धारा 4 के तहत पंजीबद्ध किया गया और विवेचना शुरू की गई।

 षड्यंत्र का हुआ खुलासा

जांच के दौरान नगर पुलिस अधीक्षक अंबिकापुर के मार्गदर्शन में पुलिस टीम ने प्रार्थिया और गवाहों के कथन दर्ज किए तथा घटनास्थल का निरीक्षण किया। विस्तृत जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि अनुपमा सिंह ने स्वयं का 6 लाख, अनुज सिंह का 4 लाख, पंकज चौधरी का 10 लाख तथा भक्कू राम मुंडा का 3 लाख रुपये सहित अन्य स्रोतों से 3 लाख रुपये जुटाए। इन सभी ने मिलकर ब्याज पर पैसा चलाने और अवैध रूप से आर्थिक लाभ कमाने का षड्यंत्र रचा। इसी योजना के तहत इन आरोपियों ने अलका सिंह को उधार के रूप में 13 लाख रुपये दिए और भारी ब्याज दर से पैसा वसूलने का दबाव बनाना शुरू किया। जांच में सामने आया कि अनुपमा सिंह एवं उसके सहयोगियों ने षड्यंत्रपूर्वक अलका और उसके पति से तीन कोरे चेक हासिल किए, जिनमें बाद में अपनी मनमानी रकम भर दी गई।

इन धाराओं के तहत हुई कार्रवाई

मामले की सच्चाई उजागर होने पर थाना गांधीनगर पुलिस ने धारा 61(ख), 318(4), 338, 339(3)(5) बीएनएस के अंतर्गत चारों आरोपियों के विरुद्ध अपराध दर्ज किया और उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। वहीं अन्य फरार आरोपियों की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की गई है।

लंबे समय से कर रहे थे सूदखोरी

थाना गांधीनगर के प्रभारी निरीक्षक प्रदीप जायसवाल ने बताया कि यह पूरा गिरोह लोगों को कर्ज देकर अत्यधिक ब्याज की वसूली करता था और रकम की सुरक्षा के नाम पर गलत तरीके से चेक व दस्तावेज हस्ताक्षरित करवाता था। जांच में यह भी सामने आया कि ये आरोपी सामूहिक रूप से लोगों को ब्याज के जाल में फंसाकर आर्थिक रूप से शोषण कर रहे थे। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक प्रदीप जायसवाल के नेतृत्व में उप निरीक्षक नवल किशोर दुबे, महिला आरक्षक प्रिया रानी और आरक्षक अतुल शर्मा की टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई। टीम ने गहन जांच कर आरोपियों के बीच हुई लेनदेन, तैयार दस्तावेजों और गवाहों के बयानों को मिलान कर मामला मजबूत सबूतों के साथ प्रस्तुत किया है।


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