बजट से आम जनता एवं व्यापारियों के हाथ लगी सिर्फ निराशा- अमित

बजट से आम जनता एवं व्यापारियों के हाथ लगी सिर्फ निराशा- अमित

khabrigullak.com
By -
0

 


अंबिकापुर।। खबरी गुल्लक।। 

जिलाध्यक्ष कांग्रेस व्यापार प्रकोष्ठ सरगुजा अमित तिवारी (राजा) ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि  इस सत्र में प्रस्तुत किए गए बजट को देखकर एसा महसूस हो रहा है कि मोदी सरकार के पास अब नए आइडिया खत्म हो गए हैं। ये बजट भारत की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों के लिए एक सवाल लेकर आया है। इस बजट में गरीब और निचले तबके के लिए कुछ भी नहीं है। इस महत्वपूर्ण बजट में देश  की बढती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए भी कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। इकॉनमिक सर्वे दिखाता है कि व्यापार में अनिश्चितता भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है, लेकिन प्रस्तुुत बजट इस समस्या को पूर्ण रूप से नजरअंदाज कर रहा है।

 रुपए की गिरावट से निपटने के लिए भी सरकार के पास कोई योजना नहीं है। भारतीय अर्थव्यवस्था का मूल संकट ठहरा हुआ वेतन, कमजोर उपभोक्ता मांग और निजी निवेश में सुस्ती है, लेकिन बजट में उपभोक्ता मांग को गति देने का कोई विचार नहीं दिखता है। वहीं, इस बजट में कर्ज के बढ़ते बोझ पर भी ध्यान नहीं दिया गया है।

इस बजट में शिक्षित युवाओं में फैले व्यापक बेरोजगारी संकट के समाधान से जुड़ी कोई बात नहीं है। साथ  ही गंभीर वित्तीय दबाव में चल रही राज्य सरकारों को कोई राहत देते नहीं दिख रही हैं। असमानता ब्रिटिश राज के दौर को पार कर गई है, लेकिन बजट में इसका जिक्र तक नहीं किया गया है। इसके साथ ही SC-ST, पिछड़े वर्ग, EWS या अल्पसंख्यकों के लिए किसी प्रकार की सहायता का प्रावधान नहीं किया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मौजूदा मोदी सरकार ने पिछले साल के आवंटित बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, सोशल जस्टिस जैसे कई जरूरी क्षेत्रों में पूरा बजट भी खर्च नहीं किया।

 मोदी सरकार का नारा है- 'सबका साथ, सबका विकास', लेकिन बजट के आंकड़े दिखाते हैं कि शिक्षा में पैसा खर्च नहीं किया और बजट भी पिछले साल के मुकाबले घटा दिया गया।

पहले की सरकारें शिक्षा, स्वास्थ्य और छात्रों को स्कॉलरशिप पर ज्यादा जोर देती थीं। वित्त मंत्री ने एक भी बार स्कूलों का जिक्र नहीं किया और सामाजिक सुरक्षा और कल्याण को लेकर एक भी घोषणा नहीं की। इसके अलावा, मनरेगा की जगह आए नए कानून के बजट के बारे में कोई जिक्र नहीं किया गया।

ये एक थकी हुई और रिटायर हो चुकी सरकार का बजट है। पहले तो ये पैसा नहीं देना चाहते और ऊपर से मिले बजट को भी खर्च नहीं करते हैं।


एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)