अंबिकापुर।।खबरी गुल्लक।। 14 मई 2026
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में महिला सशक्तिकरण की महत्वाकांक्षी बिहान योजना का दुरुपयोग कर दो पीआरपी प्रोजेक्ट रिपोर्टिंग पर्सन महिलाओं ने सामुदायिक संस्थाओं से लाखों रुपये का गबन किया। जिला स्तरीय जांच समितियों ने अनियमितताओं की पुष्टि कर दी, रिकवरी और पदमुक्ति के सख्त निर्देश जारी हुए, लेकिन महीनों बाद भी कार्रवाई कागजों पर अटकी हुई है। आधिकारिक पत्रों से खुलासा हुआ है कि वनदेवी और गंगा आजीविका संकुल संगठनों में 2022 से 2026 तक कुल 33.90 लाख रुपये की गड़बड़ी हुई। आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से अब सवाल उठ रहे हैं क्या अधिकारी घोटालेबाजों को संरक्षण दे रहे हैं। यदि इसकी सुक्ष्म और निष्पक्ष जांच की जाए तो कई लोगों की संलिप्तता के साथ बड़ी गड़बड़ी उजागर हो सकती है।
वनदेवी संकुल में 28 लाख की चपत
जनपद पंचायत अम्बिकापुर के अंतर्गत वनदेवी आजीविका संकुल स्तरीय संगठन मेण्ड्राकला में पीआरपी जसवंती एक्का ने 2022 से 2026 के बीच नियमों का उल्लंघन कर 28 लाख रुपये गबन किए। जिला कार्यालय के पत्र क्र. 1413/जि.पं./विहान NRLM SMIB/2024 (दिनांक 19.06.2024) और जनपद पंचायत के पत्र क्र. 4269/एनआरएलएम/शिकायत/2023 (दिनांक 31.10.2023) में जिला स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए रिकवरी और पदमुक्ति का निर्देश दिया गया।
जांच में पाया गया कि जसवंती ने इंदिरा गांधी ग्राम संगठन केराकछार से 21.40 लाख रुपये व्यक्तिगत रूप से आहरित कर लिए। विकासखंड परियोजना प्रबंधक ने उन्हें 10 दिनों में चार किस्तों में राशि लौटाने का आदेश दिया, अन्यथा कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी। जिला मिशन संचालक ने अध्यक्ष/सचिव को एक सप्ताह में पूरी राशि (मूल+ब्याज) ग्राम संगठनों के खातों में जमा कराने और पद से हटाने के निर्देश दिए। लेकिन कई महीनों बाद भी कोई प्रगति नहीं हुई।
गंगा संकुल में 5.90 लाख की लूट, आंशिक रिकवरी
इसी तरह, जनपद पंचायत सीतापुर के गंगा आजीविका संकुल (भूसू) में पीआरपी श्रीमती राजकिशोरी कुजूर ने 2022-2024 के बीच 5 ग्राम संगठनों से 5.90 लाख रुपये (5,90,000/-) गबन किए। जिला कार्यालय के पत्र क्र. 12467/जि.पं./बिहान NRLM/FI/2025 (दिनांक 19.12.2025) और जनपद पंचायत सीतापुर के पत्र क्र. 1950/जं.पं.सी./2025-26 (दिनांक 02.12.2025) में जांच रिपोर्ट का उल्लेख है।
समिति ने गबन सही पाया और एक माह में रिकवरी का आदेश दिया। वर्तमान तक 3.63 लाख (3,63,999/-) लौटाए गए, शेष 2.26 लाख (2,26,001/-) बाकी है। जिला मिशन संचालक ने एक सप्ताह में बाकी राशि (ब्याज सहित) मानदेय से काटकर या जमा कराने और पदमुक्ति करने को कहा। तीन महीने गुजरने के बावजूद कार्रवाई अधर में लटकी है।
योजना को बनाया भ्रष्टाचार का जरिया?
बिहान (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) के तहत ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार और सशक्तिकरण प्रदान करने वाली यह योजना अब घोटालों का शिकार बन रही है। जिला पंचायत सरगुजा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने दोनों मामलों में सख्त निर्देश दिए, लेकिन स्थानीय स्तर पर मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं। जसवंती और राजकिशोरी को प्रशिक्षण और चेतावनी के बावजूद अनियमितताएं जारी रहीं। सूत्रों का कहना है कि पदमुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी जानकारी उच्च कार्यालय को नहीं भेजी गई। इससे योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस संबंध में संबंधित विभाग के अधिकारियों से सम्पर्क नहीं हो पाने से उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।




